राहुल गांधी का इंदौर दौरा: राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ में उठाई युवाओं की आवाज, कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरा

तेजकुमार जारवाल, ज़िला रिपोर्टर/ वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़,/ इंदौर, मध्य प्रदेश/
इंदौर आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए छात्रों से शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सीधे संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों से उनके अनुभव जाने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर सवाल किए।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के मन में अपने भविष्य को लेकर कई सवाल हैं और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर उनका भरोसा प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने माना आभार, इंदौर पहुंचने पर राहुल गांधी ने स्वागत के लिए मौजूद लोगों का आभार जताते हुए कहा कि जिस तरह से उनका स्वागत किया गया, उससे वह बेहद खुश हैं।
उन्होंने बताया कि कोटा, देहरादून और पुणे के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इंदौर में आयोजित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, अलग-अलग शहरों में छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है।
रोजगार को लेकर छात्र ने बताई भर्ती प्रक्रिया की समस्या
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्र से पूछा कि क्या देश के औसत छात्र को रोजगार मिल सकता है। छात्र ने जवाब दिया कि रोजगार मिलना चाहिए और देश में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, लेकिन भर्तियां समय पर नहीं होतीं।
छात्र ने आरोप लगाया कि कई बार युवा आंदोलन करते हैं तो भर्तियां निकालने के बाद परिणाम रोक दिए जाते हैं। उसके मुताबिक, कई पदों को भरने के बजाय संविदा के जरिए नियुक्तियां की जाती हैं और निजीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
छात्र ने दावा किया कि कई विभागों में बड़ी संख्या में पद अब भी खाली हैं। सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ रहा कार्यक्रम का मुख्य विषय
राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में कार्यक्रम का विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ रखा गया है।
उन्होंने कहा कि छात्र खुद बताएंगे कि व्यवस्था क्या है, वह किस तरह उनके जीवन और भविष्य को प्रभावित कर रही है और उनके सामने कौन-कौन सी चुनौतियां हैं। उन्होंने पेपर लीक, संस्थागत विफलता, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षा की बढ़ती लागत और निजीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर छात्र आज खुश नहीं हैं, और उन्हें अपना भविष्य स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है, तो उनकी बात सुनना जरूरी है। राहुल गांधी ने स्क्रीन पर समझाया ‘सिस्टम’
राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान स्क्रीन पर एक स्लाइड दिखाते हुए ‘सिस्टम’ की अपनी व्याख्या रखी।
उन्होंने कहा कि देश में व्यवस्था की कई परतें हैं और शीर्ष स्तर पर कुछ लोगों के हाथों में इसका नियंत्रण है। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी उल्लेख करते हुए उन पर राजनीतिक आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अलग-अलग युवा मंच पर आकर अपनी समस्याएं और अनुभव साझा करेंगे। इसके बाद ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों के साथ संवाद का सिलसिला शुरू हुआ।
छात्रा ने कहा- यूनिवर्सिटीज में पारदर्शिता की कमी
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने एक छात्रा से पूछा कि जिस व्यवस्था को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की सुरक्षा तथा बेहतर संचालन के लिए बनाया गया है, अगर वही व्यवस्था छात्रों के खिलाफ काम करने लगे तो वह इसे किस तरह देखती हैं। छात्रा ने जवाब दिया कि विश्वविद्यालय छात्रों के साथ अपेक्षित सहयोग नहीं कर पा रहे हैं।
उसने व्यवस्था में फर्जीवाड़े और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान होना चाहिए।परीक्षा पर भरोसा कैसे करें?’ राहुल ने छात्रों से पूछा
राहुल गांधी ने कहा कि आज कई छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर है। उन्होंने पूछा कि छात्र कैसे भरोसा करें कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ हुई है और चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से भी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन जब व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो जाता है तो इसका सीधा असर युवाओं पर पड़ता है। कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने कहा, ‘सर, हम सिस्टम से हार गए।’ राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था में मौजूद कुछ लोग भ्रष्ट हो सकते हैं और पैसे के लिए पेपर लीक जैसी घटनाएं कर सकते हैं।
उनका कहना था कि यदि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार रहेगा तो उसका नुकसान लाखों छात्रों को उठाना पड़ेगा।परीक्षाओं को लेकर सवाल
छात्र ने कहा कि एमबीबीएस, व्यापम और अन्य भर्ती परीक्षाओं के परिणामों को लेकर भी युवाओं में असमंजस बना हुआ है। उसने आरोप लगाया कि सरकार कई बार कोर्ट का हवाला देकर परिणाम रोकती है।
छात्र के मुताबिक, लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे युवाओं की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ा है। उसने कहा कि कई युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए एसडीएम और डीएम जैसे पदों तक पहुंच सकते थे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण वे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
छात्र ने बताया कि वह खुद इंदौर में पार्ट-टाइम नौकरी कर रहा है। राहुल गांधी बोले- शिक्षा देश की नींव
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि व्यवस्था को संचालित करने वाले लोगों के बच्चों की शिक्षा और युवाओं की स्थिति के बीच अंतर को भी समझने की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ देश के युवाओं को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों के बच्चे देश से बाहर पढ़ने जाते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से यह बात रखी है कि स्टूडेंट देश का निर्माण करता है और शिक्षा देश की नींव है।
उनके मुताबिक शिक्षा प्रत्येक छात्र का अधिकार है। एमबीबीएस छात्रों ने 13% होल्ड का मुद्दा उठाया, परीक्षाओं को लेकर सवाल
छात्र ने कहा कि एमबीबीएस, व्यापम और अन्य भर्ती परीक्षाओं के परिणामों को लेकर भी युवाओं में असमंजस बना हुआ है।
उसने आरोप लगाया कि सरकार कई बार कोर्ट का हवाला देकर परिणाम रोकती है। छात्र के मुताबिक, लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे युवाओं की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ा है।
उसने कहा कि कई युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए एसडीएम और डीएम जैसे पदों तक पहुंच सकते थे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण वे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। छात्र ने बताया कि वह खुद इंदौर में पार्ट-टाइम नौकरी कर रहा है।
गंभीरता का प्रश्न
स्कूल में मिड-डे मील से लेकर उच्च शिक्षा और फिर रोजगार तक युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीरता से चर्चा की जानी चाहिए।
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