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आष्टी के मंजूर अप्पर तहसील कार्यालय पर किसने लगाया ब्रेक?

23 Sep 2026, 08:40 PM • Vande Bharat Live TV News
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आष्टी के मंजूर अप्पर तहसील कार्यालय पर किसने लगाया ब्रेक? - गडचिरोली, महाराष्ट्र

गडचिरोली से वंदे भारत LIVE TV NEWS के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की रिपोर्ट

गडचिरोली जिले में प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने और लोगों को उनके घर के पास ही सरकारी सुविधाएं देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की थी। भौगोलिक स्थिति, तेजी से बढ़ती आबादी और प्रशासनिक बोझ को देखते हुए सरकार ने जिले में कई नए अप्पर तहसील कार्यालयों को मंजूरी दी थी। इस लिस्ट में जिले के मध्यवर्ती और महत्वपूर्ण स्थान चामोर्शी तालुका के *आष्टी* का भी नाम शामिल था, जिससे आष्टी परिसर के लोगों में खुशी की लहर थी।

लेकिन 22 सितंबर को जारी हुए नए शासन आदेश (GR) ने सभी को चौंका दिया है। इस नए आदेश में गडचिरोली जिले के कई अप्पर तहसील कार्यालयों के नाम हैं, लेकिन आष्टी का नाम गायब है।

आदेश में किन कार्यालयों को मिली मंजूरी?
22 सितंबर के शासन आदेश के अनुसार, जिन कार्यालयों को मंजूरी मिली है, उनकी लिस्ट इस प्रकार है:

कुरखेड़ा तहसील: तहसीलदार कार्यालय कुरखेड़ा (कुरखेड़ा, कढोली) और अप्पर तहसीलदार कार्यालय मालेवाडा (मालेवाडा, पुराडा)
आरमोरी तहसील: तहसीलदार कार्यालय आरमोरी (आरमोरी, देऊळगाव) और अप्पर तहसीलदार कार्यालय वैरागड (वैरागड, पिसेवडधा)
धानोरा तहसील: तहसीलदार कार्यालय धानोरा (मुरुमगाव, सुरसुंडी, रांगी, धानोरा, चातगाव) और अप्पर तहसीलदार कार्यालय पेंढरी (पेंढरी, गट्टा, कारवाफा)
सिरोंचा तहसील: तहसीलदार कार्यालय सिरोंचा (सिरोंचा, बामणी) और अप्पर तहसीलदार कार्यालय आसरअल्ली (आसरअल्ली, पेंटीपाका)

इस पूरी लिस्ट में आष्टी का कहीं भी उल्लेख नहीं है, जबकि पहले आष्टी को मंजूरी मिल चुकी थी।

आष्टी की जनता के साथ अन्याय?
आष्टी, चामोर्शी तालुका का एक बड़ा और तेजी से विकसित हो रहा केंद्र है। यहां अप्पर तहसील कार्यालय बनने से हजारों ग्रामीणों को 30-40 किलोमीटर दूर चामोर्शी या गडचिरोली जाने से राहत मिलती। अब अचानक नाम हट जाने से लोगों में नाराजगी है।

सवाल उठ रहा है कि आखिर आष्टी के मंजूर कार्यालय को ब्रेक किसने लगाया? पर्दे के पीछे का वो ‘झाड़ी का शुक्राचार्य’ कौन है जो आष्टी के विकास में रोड़ा बन रहा है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सीधे तौर पर आष्टी परिसर के लोगों के साथ अन्याय है और इसका जवाब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को देना चाहिए।

अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और आष्टी को उसका हक वापस मिलता है या नहीं।

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