जपतलाई आश्रम स्कूल हादसा: 3 छात्राओं की मौत का आरोपी अब भी फरार, गणेश मंडल में विपक्ष के नेता संग दिखने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका स्थित जापातलाई (कुप्पा लिंगो) अनुदानित आश्रम स्कूल में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की हुई दर्दनाक मौत के मामले में मुख्य जिम्मेदार संस्था चालक अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। एक तरफ पुलिस प्रशासन आरोपी की तलाश का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर 15 सितंबर को गणेशोत्सव के दौरान विधानसभा के विपक्ष के नेता के साथ आरोपी को सार्वजनिक गणेश मंडल के कार्यक्रम में देखा गया।
इस घटनाक्रम ने पुलिसिया कार्रवाई और आरोपी को मिल रहे राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटनाक्रम का संक्षिप्त ब्योरा
दर्दनाक हादसा: अगस्त 2026 में जापातलाई के आवासीय आश्रम स्कूल में रात को सोते समय जहरीले करैत (मन्यार) सांप के काटने से तीन मासूम छात्राओं की मौत हो गई थी, जबकि अन्य छात्राओं की हालत बिगड़ गई थी।
प्रशासनिक कार्रवाई: घटना के बाद उपजे भारी जनआक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार और आदिवासी विकास विभाग ने संबंधित आश्रम स्कूल की मान्यता रद्द कर दी तथा विभागीय अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की।
मामला दर्ज: आश्रम स्कूल की जर्जर स्थिति, सुरक्षा मानकों में घोर लापरवाही और समय पर चिकित्सा न मिलने के कारण संस्था चालक (संस्था अध्यक्ष/संचालक) तथा स्कूल प्रशासन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या व लापरवाही की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
राजनीतिक आश्रय और पुलिस पर दबाव के आरोप
15 सितंबर को आरोपी के सार्वजनिक रूप से दिखने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। इस घटनाक्रम से कई अहम पहलू सामने आ रहे हैं:
पुलिस का दोहरा रवैया: जिस आरोपी को पुलिस लंबे समय से रिकॉर्ड में ‘फरार’ या ‘अज्ञात स्थान पर’ बता रही थी, वह सरेआम राजनीतिक मंचों और कार्यक्रमों में सक्रिय है।
इससे पुलिस की निष्पक्षता और जांच की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक संरक्षण का संकेत: राज्य विधानसभा के विपक्ष के नेता के साथ गणेशोत्सव के मंच पर आरोपी की मौजूदगी से यह संदेश गया है कि उसे रसूखदार राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस उस पर हाथ डालने से कतरा रही है।
परिजनों का बढ़ता रोष: पीड़ित आदिवासी परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण ही पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी में टालमटोल कर रही है। न्याय की मांग
स्थानीय सामाजिक संगठनों, आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिजनों ने शासन-प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
उनका कहना है कि तीन मासूम बच्चों की जान जाने के बावजूद यदि मुख्य आरोपी खुलेआम घूमता रहेगा, तो कानून-व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। प्रशासन पर अब जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजने का भारी दबाव है।
विशेष टीमों का गठन: पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं और संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।
वायरल फोटो/वीडियो पर रुख: गणेश मंडल में आरोपी की मौजूदगी वाली तस्वीरों की जांच की जा रही है और उसे शरण या संरक्षण देने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पारदर्शी जांच का दावा: पुलिस का दावा है कि मामले में किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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