अयोध्या के बाद अब नागपुर की दीक्षाभूमि में दान के पैसों में घोटाले का आरोप, धर्मादाय आयुक्त से जांच की मांग

वंदे भारत LIVE TV NEWS के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की रिपोर्ट
अयोध्या में राम मंदिर के दान में चोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि अब नागपुर की विश्व प्रसिद्ध दीक्षाभूमि के दान के पैसों में बड़े घोटाले का आरोप लगा है।
परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष पद का दावा करने वाले विलास गजघाटे और सचिव पद का दावा करने वाले डॉ. राजेंद्र गवई ने धर्मादाय आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने समिति के वर्तमान अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई, सचिव सुधीर फुलझेले और उनके भाई सदस्य एड. आनंद फुलझेले के कार्यकाल के आर्थिक और प्रशासनिक व्यवहारों की गहन जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है।
इस मामले में जब सचिव सुधीर फुलझेले से संपर्क किया गया तो उन्होंने आरोपों पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
3 करोड़ से ज्यादा के खर्च पर सवाल
गजघाटे और गवई ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाए कि 2015 से 2024 के बीच समिति के खाते से विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर करीब 3 करोड़ 20 लाख 72 हजार 721 रुपये खर्च दिखाए गए। इसके अलावा निर्माण और मरम्मत के लिए ठेकेदारों को 3 करोड़ 17 लाख 85 हजार 266 रुपये एडवांस दिए गए, जिसका कोई ब्याज समिति को नहीं मिला, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ है।
उन्होंने 2015 से 2025 तक के सभी ऑडिट रिपोर्ट की जांच की मांग की है।
कंप्यूटर खरीदी में भी घोटाला?
शिकायत के अनुसार:
– निर्माण के लिए – 1 करोड़ 55 लाख 58 हजार 50 रुपये
– मरम्मत के लिए – 80 लाख 82 हजार 653 रुपये
– फर्नीचर और लैब साहित्य – 1 करोड़ 39 लाख 10 हजार 305 रुपये
– इलेक्ट्रॉनिक साहित्य – 44 लाख 99 हजार 949 रुपये
– 2023 में कंप्यूटर खरीदी के लिए – 1 करोड़ 16 लाख 85 हजार 657 रुपये खर्च किए गए, और इसके लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
समिति के नियम के अनुसार हर तीन महीने में बैठक होनी चाहिए, लेकिन 2023 से कोई बैठक नहीं हुई है। कैश पेमेंट, चेक, रसीद और बैंक ट्रांजेक्शन में भी गड़बड़ी का आरोप है।
कुर्सी की लड़ाई भी तेज
इसी बीच विलास गजघाटे ने खुद को अध्यक्ष और डॉ. राजेंद्र गवई ने खुद को सचिव बताया है। उनका दावा है कि 11 जुलाई 2023 को गवई को बहुमत से सचिव चुना गया था और 20 फरवरी 2026 को धर्मादाय उपायुक्त ने भी उन्हें ही सचिव माना है। हाईकोर्ट ने भी 18 अगस्त 2026 को इसके खिलाफ याचिका खारिज कर दी थी। वहीं 22 जून 2026 को गजघाटे को अध्यक्ष चुना गया था।
विजयादशमी पर होने वाले धम्मचक्र प्रवर्तन दिन समारोह को लेकर डॉ. गवई ने कहा कि सभी मतभेद भुलाकर सभी को एक साथ आना चाहिए और भंते सुरेई ससाई को ही मुख्य भूमिका निभानी चाहिए।
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