बस्ती: कप्तानगंज के मंदिर परिसर में हरियाली का कत्ल, 20 कीमती पेड़ साफ; वन विभाग मौन!

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: कप्तानगंज में हरियाली का कत्ल! वन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
- जमीन हड़पने की गहरी साजिश या लकड़ी तस्करों का आतंक? बनहरा मंदिर से 4 लाख के पेड़ गायब।
- वन विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे गंभीर सवाल, 2019 के बाद अब दोबारा मंदिर परिसर में चला आरा।
- कप्तानगंज में पेड़ों की अवैध कटान: मंदिर की जमीन पर भू-माफियाओं की नजर, पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग।
- 4 लाख के पेड़ रातों-रात गायब: क्या सो रहा है कप्तानगंज का वन विभाग?
लघु मंदिर बनहरा परिसर में 20 कीमती पेड़ों की अवैध कटान, भू-माफियाओं के हौसले बुलंद; आखिर किसकी शह पर चल रहा है आरा?
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय सुस्ती पर एक बड़ा तमाचा है। क्षेत्र के लघु मंदिर बनहरा परिसर से लगभग 20 कीमती हरे पेड़ों को काटकर रातों-रात गायब कर दिए जाने की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। करीब चार लाख रुपये की कीमत वाले इन पेड़ों के अवैध कटान से यह साफ जाहिर होता है कि स्थानीय स्तर पर अपराधियों और भू-माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं।
क्या सो रहा है वन विभाग?
शिकायतकर्ता अवध शरण दास द्वारा थाने में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, मंदिर परिसर में खड़े 20 कीमती पेड़ों पर बेरहमी से आरा चला दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काट लिए जाते हैं और लकड़ी उठा भी ली जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
क्या वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? या फिर इस अंधेर नगरी में अधिकारियों की चुप्पी किसी बड़ी मिलीभगत का इशारा करती है? यह वह सवाल है जिसका जवाब आज हर स्थानीय नागरिक जानना चाहता है।
जमीन हड़पने की गहरी साजिश
यह मामला सिर्फ लकड़ी तस्करों द्वारा की गई चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश की बू आ रही है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि मंदिर परिसर की इस बहुमूल्य भूमि और बाग पर कुछ दबंगों की बुरी नजर है। उस भूमि पर अवैध कब्जा जमाने की नापाक नीयत से ही वहां खड़े हरे-भरे पेड़ों को धीरे-धीरे साफ किया जा रहा है।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि वर्ष 2019 में भी इसी मंदिर परिसर से पेड़ों को काटकर चुराने की घटना को अंजाम दिया जा चुका है। इसके बावजूद यदि प्रशासन ने कोई कड़ा सबक नहीं लिया, तो यह स्पष्ट करता है कि सिस्टम की ढिलाई अपराधियों के लिए वरदान साबित हो रही है।
इन मुख्य बिंदुओं पर टिकी हैं सबकी निगाहें:
- निष्पक्ष जांच: पुलिस और वन विभाग को मामले की लीपापोती करने के बजाय मौके पर पहुंचकर गहन और निष्पक्ष जांच करनी होगी।
- दोषियों पर शिकंजा: पेड़ों की इस अवैध कटान में शामिल तमाम चेहरों की शिनाख्त कर उन पर कठोर विधिक कार्रवाई की जाए।
- मंदिर संपत्ति की सुरक्षा: धार्मिक स्थलों की जमीनों और हरियाली को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
”मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। जब ऐसी संपत्तियों पर भू-माफियाओं की नजरें टेढ़ी हों और प्रशासन मूकदर्शक बन जाए, तो यह कानून व्यवस्था के लिए बड़ा गंभीर संकट है।”
अब देखना यह होगा कि कप्तानगंज पुलिस और वन विभाग इस मामले में महज कागजी औपचारिकताएं निभाकर इतिश्री करते हैं, या सचमुच आरा चलाने वाले इन दबंगों पर कानून का डंडा चलता है। क्षेत्र की जनता की निगाहें अब इस प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
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