बड़े खेल का खुलासा: एक ही कंपनी और एक ही ब्रांड की दवा की एमआरपी अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग पाई गई।

अजीत मिश्रा (खोजी)
लूट का नुस्खा: अस्पताल बदलिए, दवा के दाम बढ़ाइए!
- 214 अस्पतालों के आंकड़ों से पर्दाफाश: देश के 214 अस्पतालों की फार्मासियों से जुटाए गए आंकड़ों में 167 दवाओं की कीमतों में भारी अंतर सामने आया है।
- हजारों रुपये का अंतर: फाइजर के इन्ग्रूटेड बायोडाग्रेडेबल (इनका), टेनेक्ट-प्लाज और अन्य जीवनरक्षक दवाओं की एमआरपी में भारी हेरफेर का खुलासा हुआ है।
- पारदर्शिता की नई व्यवस्था: दवा खरीद और बिक्री दरों में पारदर्शिता लाने के लिए 1 नवंबर से अस्पतालों को वास्तविक खरीद दर (PTSR) और मरीज को दी जाने वाली दर (PDR) बतानी होगी।
एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश कर दिया है। देश के 214 अस्पतालों की फार्मासियों से जुटाए गए आंकड़ों से यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि एक ही कंपनी और एक ही ब्रांड की दवाओं की एमआरपी (MRP) अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग है। यानी, जैसे ही मरीज अस्पताल बदलते हैं, उनकी जेब पर डाका डालने का पैमाना भी बदल जाता है।
- खुलासा: रिपोर्ट के अनुसार, 214 अस्पतालों की फार्मासियों से जुटाए गए आंकड़ों में 167 दवाओं की एमआरपी (MRP) में बड़ा अंतर सामने आया है। इसमें यह खुलासा हुआ है कि एक ही कंपनी और एक ही ब्रांड की दवा की कीमत अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग पाई गई है।
- अस्पताल उद्योग का खेल और पारदर्शिता की पहल: अस्पताल उद्योग में एक ही कंपनी, एक ही ब्रांड और एक ही दवा की आपूर्ति में संस्था-दर-संस्था सनसनीखेज अंतर देखा गया है। अलग-अलग अस्पतालों में दवा की खरीद, सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (ड्रग सेफ्टी) की आड़ में खुला मुनाफा किया जा रहा है। गंभीर इलाज के प्रसंग में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं के मामले में समाधान के इन केंद्रों ने सरकार और एनजीओ के सहयोग से गरीबों के हित में पारदर्शिता के लिए कदम उठाने को कहा है। दवा कीमतों में पारदर्शिता लाने के लिए रणनीतिक परिवार में संचालित फार्मासियों में वास्तविक खरीद दर (PTSR – प्राइस टू रिटेलर, जिस पर अस्पताल ने दवा खरीदी) और मरीज को दी जाने वाली दर (PDR – प्राइस टू कंज्यूमर, जिस पर मरीज को दवा दी जाएगी) बतानी होगी। यह व्यवस्था 1 नवंबर से लागू की जाएगी।
- जांच और 167 दवाओं की सूची: ईपीआरएसएवी के ‘ड्रग सेफ्टी’ के तहत अस्पतालों की फार्मासियों की जांच के दौरान दवाओं और मेडिकल उत्पादों के आंकड़े जुटाए गए थे, जिसके तहत 167 दवाओं की सूची तैयार की गई थी। इसमें यह देखा गया कि एक ही कंपनी और ब्रांड की दवा अलग-अलग अस्पतालों की संस्थाओं द्वारा आपूर्ति के दौरान किस दर पर उपलब्ध कराई गई। विभाग के अनुसार, एक ही दवा के दामों में यह अंतर कंपनियों और अस्पतालों में पारदर्शिता तथा मरीजों के हित के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
- प्रमुख दवाओं की एमआरपी में अंतर के आंकड़े:
- फाइजर की इनग्रूटेड बायोडाग्रेडेबल (इनका): इसमें सबसे बड़ा अंतर मिला है, जहां अलग-अलग संस्थाओं की आपूर्ति में इसकी एमआरपी 3,02,610 रुपये और 3,30,000 रुपये दर्ज की गई, यानी दोनों में 27,390 रुपये का अंतर है।
- हिमालय लाइफसाइंसेज की टेनक्ट-प्लाज 40 एमजी (टेनक्टेल): इस इंजेक्शन की एमआरपी अलग-अलग संस्थागत आपूर्ति में 43,119.14 से लेकर 49,060 रुपये तक मिली, जिसमें 5,940.86 रुपये का अंतर है।
- सुपन एलब्यूमिन 20 प्रतिशत (एम्पुल): इसी कंपनी की इस दवा की एमआरपी 7,986, 9,749 और 10,724 रुपये दर्ज मिली, जिसमें 2,738 रुपये का अंतर है। इसके अलावा, इसी दवा की एमआरपी 7,986 और 10,989 रुपये भी दर्ज पाई गई, जिससे 3,003 रुपये का अंतर सामने आया।
- बेयारिस्क्युम 400 एम्पुल (बेनेटास): इसी कंपनी की इस दवा में 56,991 और 62,690.10 रुपये की एमआरपी दर्ज हुई, जिसमें 5,699.10 रुपये का अंतर है।
- ग्राफिक की अन्य दवाओं में भी अंतर:
- गोलिक बायोसाइंसेज की कई दवाओं की संस्थागत आपूर्ति में अलग-अलग एमआरपी मिली।
- कोलिस्टिमेथेट 4.5 ग्राम की एमआरपी 8,018.44 से 9,702.31 रुपये तक मिली, जिसमें 1,683.87 रुपये का अंतर है। कोलिस्टिमेथेट 2 एमजी/एम्पुल में 670.22 रुपये और 3,003 रुपये का अंतर दर्ज हुआ।
- इसी कंपनी की बेयारिस्क्युम 50 एम्पुल में 1,326.47 रुपये और सेफोटेक्साइम 70 एम्पुल में 680 रुपये का अंतर दर्ज हुआ।
- सेफोटेक्साइम (पाइंट लाइफ) की एमआरपी करीब 3,811 से 4,980.94 रुपये तक मिली।
- पोंटोप्रीन 2 ग्राम (दवाम) में 1,874.06 और 1,999 रुपये तथा टरारिथ्रिन इंजेक्शन में 2,600 और 3,050 रुपये एमआरपी दर्ज हुई।
- सनसोफी पाश्चर की मेनेक्ट्रा वैक्सीन में 250 रुपये का अंतर मिला।
- बायोलॉजिकल ई की पेटी-डी की 300 एम्पुलियों में 297 रुपये और 14-वैक्सीन इम्यूनोग्लोबुलिन में 335 रुपये का अंतर मिला।
- संघर्ष लाइड्समडस के ऑनिट्रोएटाइड 100 एम्पुलियों (एंटाडाड़) में 73.33 रुपये का अंतर मिला।
167 दवाओं की एमआरपी में भारी अंतर
जांच के दायरे में आई 167 दवाओं की सूचियों से यह स्पष्ट हुआ है कि अलग-अलग अस्पतालों की फार्मेसी में एक ही दवा की कीमतों में बड़ा हेरफेर चल रहा है। मुनाफाखोरी और मरीजों के हितों के बीच का यह फासला चिकित्सा जगत की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आंकड़ों की जुबानी, मरीजों की लूट की कहानी:
- टेनेक्ट-प्लाज 40 एमजी इंजेक्शन: हिमालय लाइफसाइंसेज के इस महत्वपूर्ण इंजेक्शन की एमआरपी अलग-अलग संस्थानों में 43,119.14 रुपये से लेकर 49,060 रुपये तक पाई गई, जिसमें सीधे तौर पर 5,940.86 रुपये का अंतर है।
- सुपन एलब्यूमिन 20 प्रतिशत: इसी कंपनी की इस दवा की एमआरपी 7,986 रुपये से लेकर 10,724 रुपये तक दर्ज की गई, यानी इसमें 2,738 रुपये का अंतर है।
- अन्य जीवनरक्षक दवाएं: कोरॉबिक्स, कोलिस्टिमेथेट और सेफोटेक्साइम जैसी कई अन्य दवाओं की कीमतों में भी सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये का अंतर खुलेआम सामने आया है।
बड़ा सवाल: इस संगठित लूट पर चुप्पी क्यों?
जब निर्माता कंपनी एक है, ब्रांड एक है और दवा भी वही है, तो फिर अस्पताल की दहलीज बदलते ही उसकी कीमत आसमान क्यों छूने लगती है? यह स्पष्ट रूप से मरीजों के शोषण और दवा निर्माताओं-अस्पतालों की सांठगांठ को उजागर करता है।
क्या स्वास्थ्य प्रशासन और नियामक एजेंसियां इस मुनाफाखोरी पर लगाम कसने के लिए कभी कोई ठोस कदम उठाएंगी, या फिर मरीजों की मजबूरी का फायदा यूं ही उठाया जाता रहेगा?
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