बस्ती: प्रशासनिक आदेशों की सरेआम धज्जियां, गाटा संख्या 207ख पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे का प्रयास और पुलिस की निष्क्रियता।

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में भू-माफियाओं का दुस्साहस: प्रशासनिक आदेश हवा में, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल
- हरैया तहसील के सिक्टा गांव में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: पूर्व के प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जमीन हड़पने की फिराक में आरोपी।
- अधिकारियों के आदेश कागजों तक सीमित: वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में दबंगों द्वारा जमीन कब्जाने और जान से मारने की धमकी देने का मामला।
- बस्ती में न्याय की गुहार: एस.डी.एम. और एस.पी. के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भू-माफियाओं का आतंक जारी, पीड़ित परिवार दहशत में।
बस्ती: जनपद के हरैया तहसील अंतर्गत सिक्टा गांव में कानून और व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए भू-माफियाओं और दबंगों का दुस्साहस चरम पर पहुंच गया है। प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों के स्पष्ट आदेशों को ताक पर रखकर जमीन पर अवैध कब्जा करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस-प्रशासन की चुप्पी न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है।
क्या है पूरा मामला?
- भूमि का मालिकाना हक: गाटा संख्या 207ख राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में वैध रूप से प्रार्थी वीरेंद्र कुमार शुक्ल (पुत्र श्री परमात्मा प्रसाद शुक्ल) के पिता के नाम दर्ज है।
- दबंगों की दबंगई: गांव के ही रहने वाले सीताराम यादव और उनके पुत्रों (राममणि, राजमणि, श्याममणि) का इस जमीन पर कोई सह-खातेदारी या विधिक अधिकार नहीं है, इसके बावजूद वे बलपूर्वक और दबंगई के बल पर इस भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
कागजों में सिमट कर रह गए प्रशासनिक आदेश
इस गंभीर मामले में उप जिला अधिकारी (SDM) और पुलिस प्रशासन द्वारा पूर्व में सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं:
- दिनांक 30.09.2018 को उप जिला मजिस्ट्रेट और उच्चाधिकारियों द्वारा प्रभारी निरीक्षक (SHO) थाना वाल्टरगंज एवं राजस्व निरीक्षक (RI) को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे मौके की जांच कर शांति व्यवस्था बनाए रखें और प्रार्थी की भूमि पर कोई अवैध कब्जा न होने दें।
- इसके बावजूद स्थानीय पुलिस और राजस्व कर्मियों की संदिग्ध निष्क्रियता और सुस्ती के कारण आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अदालती और प्रशासनिक आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
जान का खतरा और खुलेआम धमकियां
पीड़ित परिवार का जीना मुहाल हो गया है। प्रार्थना-पत्र के अनुसार, आरोपीगण संगठित होकर प्रार्थी, उसके परिवार और शुभचिंतकों को अहितकर गालियां देते हैं। लाठी-डंडों व हथियारों से लैस होकर जान से मारने की नीयत से मारपीट पर उतारू हैं और लगातार जान-माल की धमकी दे रहे हैं। वे किसी भी वक्त बड़े अप्रिय घटना को अंजाम देने और अवैध निर्माण/कब्जा करने की फिराक में हैं।

अब आगे क्या?
यह घटना स्पष्ट करती है कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाया जाता है और पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होते हैं।
प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक महोदय से गुहार लगाई है कि थाना वाल्टरगंज को तत्काल आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाए। अब देखना यह है कि क्या पुलिस प्रशासन नींद से जागेगा और इन दबंगों पर शिकंजा कसेगा, या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जाएगा?
इस मामले में थाना वाल्टरगंज पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि कानून का राज स्थापित हो सके।
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