“डीएम के आदेश पर भारी लेखपाल की कलम, कागजी रिपोर्टिंग से बंद हुआ सरकारी रास्ता!”

अजीत मिश्रा (खोजी) विशेष रिपोर्ट
क्या प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी पड़ रही लेखपालों की ‘पावर’?
डीएम के निर्देशों को ठेंगा दिखाती ‘कागजी रिपोर्टिंग’, बनकटी के ग्राम गौरी में सरकारी रास्ते पर कब्जे से सहमे ग्रामीण
- “क्या ‘साहब’ से भी बड़े हैं ‘हलका लेखपाल’? बनकटी में प्रशासनिक प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल”
- “फर्जी रिपोर्ट और सरकारी पैसों की बर्बादी: क्या अब लेखपाल तय करेंगे जनता का अधिकार?”
- “कागजों में रास्ता बहाल, मौके पर कब्जा! बनकटी में राजस्व महकमे की लीपापोती की खुली पोल”
विशेष संवाददाता, बनकटी (बस्ती)
तहसील और जिला मुख्यालय पर अक्सर फरियादी यह सवाल उठाते सुने जाते हैं कि “क्या लेखपाल डीएम से भी अधिक शक्तिशाली होता है?” यह सवाल कोई हवा-हवाई नहीं, बल्कि उन कड़वी सच्चाइयों का नतीजा है, जहाँ जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बावजूद निचले स्तर के राजस्व कर्मी अपनी मनमर्जी से बाज नहीं आ रहे हैं।
कागजों में जांच, मौके पर सन्नाटा
ताजा मामला बनकटी विकास क्षेत्र के ग्राम गौरी का है। आरोप है कि जिस सार्वजनिक रास्ते पर ग्राम पंचायत के सरकारी धन से खरंजा निर्माण कराया गया था, उसे दबंगों द्वारा पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित लेखपाल ने धरातल पर जाकर निष्पक्ष जांच करने के बजाय दफ्तर में बैठकर कागजी खानापूर्ति कर फर्जी रिपोर्ट लगा दी।
“जब-जब डीएम साहब ऐसे मामलों में सख्त आदेश देते हैं, तब-तब निचले स्तर पर फर्जी या भ्रमित करने वाली रिपोर्ट लगाकर मामले को और उलझा दिया जाता है। ऐसा लगता है मानो निष्पक्ष काम के लिए जनता को हर कदम पर ‘मेहनताना’ चुकाना पड़े!” — पीड़ित ग्रामीणों का आक्रोश
फर्जी हस्ताक्षर और लीपापोती का गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता मनोज कुमार (पुत्र राम वकील) ने आईजीआरएस (IGRS) के माध्यम से मामला उच्चाधिकारियों तक पहुँचाया है। उनका साफ आरोप है कि:
- रास्ते पर पूर्व में लगाया गया गेट अब हटाकर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया गया है।
- रिपोर्ट में जिन लोगों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, उनमें से कई लोग गाँव के निवासी ही नहीं हैं या फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
- पूर्व प्रधान अर्जुन तिवारी के अनुसार, इस खरंजे का निर्माण बाकायदा ग्राम पंचायत के आधिकारिक बजट से कराया गया था।
जनता की माँग: फर्जीवाड़ा करने वालों पर हो मुकदमा
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:
- संयुक्त टीम का गठन: राजस्व और पंचायत विभाग की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल मौके की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- अभिलेखों का मिलान: सरकारी रिकॉर्ड, पंचायत के प्रस्ताव और लेखपाल की आख्या का आमने-सामने मिलान हो।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई: सरकारी धन के दुरुपयोग, सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे और झूठी आख्या लगाने के दोषी अधिकारियों व व्यक्तियों पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- मुख्य मुद्दा: ग्रामीण अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि क्या लेखपाल डीएम (जिलाधिकारी) के आदेशों से ऊपर या अधिक शक्तिशाली होते हैं। कई मामलों में लेखपालों की कथित लापरवाही या मनमानी के कारण जमीन और रास्ते से जुड़े विवादों का निस्तारण नहीं हो पाता और सरकारी जमीनों व रास्तों पर अवैध कब्जे हो जाते हैं।
- बनकटी विकास क्षेत्र का मामला: बनकटी विकास क्षेत्र के ग्राम गौरी का एक मामला सामने आया है जहाँ सरकारी धन से खरंजा निर्माण (रास्ता) कराए जाने के बावजूद उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
- शिकायत और आरोप:
- ग्राम गौरी निवासी मनोज कुमार (पुत्र राम वकीलं) ने आईजीआरएस (IGRS) के माध्यम से शिकायत कर रास्ता तुरंत खुलवाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- आरोप है कि संबंधित लेखपाल ने मौके पर पहुंचे बिना ही फर्जी या बिना जांच रिपोर्ट लगा दी, जिससे मामला और विवादित हो गया।
- पूर्व ग्राम प्रधान अर्जुन तिवारी का कहना है कि उनके कार्यकाल में ग्राम पंचायत के बजट से इस स्थान पर खरंजा निर्माण कराया गया था
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कड़ा रुख अपनाता है या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह कागजी लीपापोती की भेंट चढ़ जाती है।
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