महुली की 80वीं ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन ताड़का वध और अहिल्या उद्धार का भव्य मंचन

महुली सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_सोनभद्र के विकास खंड दुद्धी के श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली में आयोजित 80वीं ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और गंगा अवतरण की पौराणिक कथा का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के रूप में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं गुरु विश्वामित्र की प्रभावशाली भूमिका ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश और प्रभु श्रीराम की करुणा का संदेश देती लीला के दौरान पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ रामलीला मंडली महुली के डायरेक्टर विश्वनाथ शर्मा की मधुर आवाज में रामायण की आरती से हुआ। इसके बाद भगवान श्रीराम की आरती उतारी गई। पूजन-अर्चन के उपरांत रामलीला का मंचन शुरू हुआ। कलाकारों ने अपने संवाद, भाव-भंगिमाओं और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से दर्शकों को रामायण के पौराणिक प्रसंगों से जोड़ दिया।
रामलीला की कथा के अनुसार, महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ से अपने यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। पुत्रों के प्रति राजा दशरथ के स्नेह और गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन से जुड़े प्रसंग को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। अंततः गुरु की आज्ञा और धर्म की रक्षा के उद्देश्य से श्रीराम तथा लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। यात्रा के दौरान गुरु विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को धर्म, कर्तव्य, साहस और शस्त्रविद्या की शिक्षा देते हैं। राम और लक्ष्मण के रूप में कलाकारों ने गुरु के प्रति सम्मान, आपसी स्नेह और अनुशासन का सुंदर परिचय दिया। वहीं गुरु विश्वामित्र की भूमिका में कलाकार ने गंभीर संवादों और प्रभावशाली अभिनय से गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को साकार किया।
वन में पहुंचने पर महर्षि विश्वामित्र बताते हैं कि ताड़का नामक राक्षसी अपने आतंक से ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग करती है और पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण बनाए हुए है। गुरु की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ताड़का का सामना करते हैं। युद्ध के दौरान श्रीराम के पराक्रम और साहस का शानदार मंचन किया गया। अंततः श्रीराम ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाते हैं। इस दृश्य पर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
ताड़का वध के बाद महर्षि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को अपने आश्रम ले जाते हैं और यज्ञ की तैयारी करते हैं। यज्ञ के दौरान मारीच और सुबाहु सहित राक्षस विघ्न डालने पहुंचते हैं। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम राक्षसों का सामना करते हैं और यज्ञ की रक्षा करते हैं। श्रीराम के पराक्रम से ऋषि-मुनियों को राहत मिलती है और धार्मिक अनुष्ठान निर्विघ्न संपन्न होने का मार्ग प्रशस्त होता है। इस प्रसंग में राम-लक्ष्मण की वीरता, गुरु विश्वामित्र के मार्गदर्शन और धर्म की रक्षा के संकल्प को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
इसके बाद रामलीला में माता अहिल्या के उद्धार का भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। महर्षि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को लेकर मिथिला की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में वे गौतम ऋषि के आश्रम पहुंचते हैं, जहां माता अहिल्या श्राप के कारण लंबे समय से कष्ट भोग रही होती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, गौतम ऋषि के श्राप से अहिल्या जड़वत अवस्था में थीं। महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को उनके उद्धार का प्रसंग बताते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम के चरण-स्पर्श से माता अहिल्या श्राप से मुक्त हो जाती हैं। इस दृश्य में श्रीराम की करुणा, दया और कृपालु स्वरूप का सुंदर चित्रण किया गया। अहिल्या उद्धार के मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कथा के माध्यम से संदेश दिया गया कि भगवान श्रीराम का जीवन लोककल्याण, करुणा, मर्यादा और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित था।
रामलीला के दौरान मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा का भी वर्णन किया गया। कथा के अनुसार, राजा सगर के साठ हजार पुत्रों की मुक्ति के लिए उनके वंशजों ने मां गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को पृथ्वी पर अवतरित होने के लिए प्रसन्न किया। गंगा के प्रचंड वेग को धारण करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समाहित किया और फिर उनकी धारा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। मां गंगा के पवित्र जल से राजा सगर के पुत्रों के उद्धार का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस प्रसंग के माध्यम से तपस्या, दृढ़ संकल्प, त्याग और लोककल्याण की महत्ता को दर्शाया गया।
महुली की ऐतिहासिक रामलीला में प्रतिदिन प्रस्तुत किए जा रहे प्रसंग दर्शकों को रामायण की आदर्श शिक्षाओं से जोड़ रहे हैं। राम-लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र के अभिनय से सजी तीसरे दिन की लीला ने श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और कर्तव्यपालन की प्रेरणा दी। रामलीला समिति के अनुसार, आज भगवान श्रीराम के नगर दर्शन एवं फुलवारी लीला का मंचन किया जाएगा। मिथिला नगरी में श्रीराम के आगमन, नगर की सुंदरता और पुष्पवाटिका में श्रीराम-सीता के प्रथम दर्शन से जुड़े मनोहारी प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया जाएगा। इन प्रसंगों को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।
इस मौके पर व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, महंत दयाराम कन्नौजिया, रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, कोषाध्यक्ष अमित कुमार कन्नौजिया, राजनाथ गोस्वामी, शारदा प्रसाद कन्नौजिया, मनीष कुमार और राजकपूर कन्नौजिया सहित समिति के सैकड़ों पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
महुली की यह ऐतिहासिक रामलीला धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सहेज रही है। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से नई पीढ़ी को मर्यादा, सत्य, त्याग, गुरु-भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल रही है।
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