पूजा के नाम पर बिकने वाले घी पर यूपी में रोक; निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पाबंदी

अजीत मिश्रा (खोजी)
आस्था और सेहत का सौदा: ‘पूजा घी’ के नाम पर परोसा जा रहा जहर
- नवरात्र से पहले प्रदेशभर में 20,924 किलोग्राम मिलावटी खाद्य पदार्थ जब्त
- खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई: 66.87 लाख रुपये के मिलावटी उत्पाद और घी बरामद
- खतरनाक रसायनों और मिनरल ऑयल से बन रहा था नकली ‘पूजा घी’, स्वास्थ्य के लिए था गंभीर खतरा
उत्तर प्रदेश में एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) द्वारा नवरात्र से ठीक पहले किए गए खुलासे ने हर इंसान की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। जिस देश में घी को पवित्रता, पूजा-पाठ और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता हो, उसी घी के नाम पर मौत का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। क्या हमारी आस्था और जिंदगी इतनी सस्ती हो गई है कि मुनाफाखोर केमिकल और मिनरल ऑयल से तैयार जहर को ‘पूजा घी’ का नाम देकर खुलेआम बेच रहे हैं?
मुख्य बिंदु और आंकड़े:
- एफएसडीए के प्रदेशव्यापी अभियान के तहत नवरात्र से पहले 20,924 किलोग्राम मिलावटी और अनियमित खाद्य पदार्थ जब्त किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 66.87 लाख रुपये है।
- जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ असामाजिक इकाइयां वनस्पति, रिफाइंड तेल, एस्सेंस, पैराफिन, मिनरल ऑयल और अन्य खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करके पूजन सामग्री तैयार कर रही थीं।
- इन नकली उत्पादों की रंग-गंध और पैकेजिंग हूबहू खाद्य घी जैसी बनाई जा रही थी, जिससे उपभोक्ताओं द्वारा इन्हें गलती से खाने में इस्तेमाल करने का गंभीर और जानलेवा खतरा था।
- प्रदेश के विभिन्न जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए बरेली में 3,281 किलो घी, लखनऊ में 748 किलो घी व 573 किलो अन्य सामग्री, नोएडा में 3,559 किलो पिसे मसाले, गाजियाबाद में 2,848 किलो साबूदाना समेत घी और कुट्टू का आटा तथा मऊ में दूग्ध उत्पाद जब्त कर नष्ट किए गए हैं।
व्यवस्था पर तमाचा और तीखा सवाल
यह बेहद शर्मनाक है कि मिलावटखोर पर्वों के पवित्र माहौल को भी नहीं बख्शते। क्या प्रशासन की सख्ती सिर्फ त्योहारों के समय ही जागती है? आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा ‘पूजा घी’ के नाम पर किसी भी अखाद्य उत्पाद के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाना और सख्त कदम उठाना एक जरूरी कदम है, लेकिन क्या महज निर्देश जारी कर देने से इन सौदागरों के हौसले पस्त हो जाएंगे?
उत्पादों के एक ही परिसर में निर्माण और पैकेजिंग होने के कारण संदूषण और अखाद्य उत्पादों के खाद्य आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने की आशंका हमेशा बनी रहती है। यदि समय रहते इन मिलावटखोरों पर रासूका जैसी कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी आस्था की वेदी और रसोईघर दोनों ही इन जहरीले तत्वों के हवाले हो जाएंगे। जनता को भी अब आंखें मूंदकर भरोसा करने के बजाय सतर्क होना होगा, क्योंकि जान और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए नरमी दिखाना सबसे बड़ा अपराध है।
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