पादूकलां में श्रीमहंत कपिलदास महाराज की आठवीं पुण्यतिथि मनाई, संत समागम में उमड़े श्रद्धालु

पादूकलां में श्रीमहंत कपिलदास महाराज की आठवीं पुण्यतिथि मनाई, संत समागम में उमड़े श्रद्धालु
सीयाराम धाम में संगीतमय सुंदरकांड पाठ, प्रतिमा पूजन और कन्या भोज का आयोजन; संतों ने दिया सेवा, संस्कार और सामाजिक सद्भाव का संदेश
पादूकलां। कस्बे के मेला मैदान स्थित सीयाराम धाम आश्रम में बुधवार को पूर्व श्रीमहंत ब्रह्मलीन कपिलदास महाराज की आठवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर आयोजित धार्मिक महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आश्रम परिसर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों के चलते भक्तिमय माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पुण्यतिथि महोत्सव के दौरान महामंडलेश्वर महंत संतदास महाराज, नागौर के मौनी बाबा ओंकारदास महाराज सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों से पधारे संत-महात्माओं का सान्निध्य रहा।
कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। वहीं, बुधवार सुबह श्रीमहंत कपिलदास महाराज की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
कन्या पूजन कर कराया भोजन, भेंट की दान-दक्षिणा
धार्मिक आयोजन के तहत कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन किया गया। इस दौरान बालिकाओं के पैर धोकर पूजन किया गया और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया।
साथ ही बालिकाओं को दान-दक्षिणा एवं पुरस्कार भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से बेटियों के सम्मान और समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्कारों को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
संतों ने दिया सेवा और मानव कल्याण का संदेश
महोत्सव में संत-महात्माओं ने धर्म, सेवा, संस्कार और मानव कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गौसेवा, धार्मिक स्थलों की देखभाल तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए समाज के लोगों को आगे आने का आह्वान किया।
श्रद्धालुओं ने गांव और प्रदेश की खुशहाली, राष्ट्रीय एकता तथा बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु
पुण्यतिथि महोत्सव में अजमेर, नागौर सहित विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा। श्रीमहंत कपिलदास महाराज की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम ने संत सेवा, गौसेवा, बेटियों के सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
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