आगर-मालवा। जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास कितने प्रभावी हो सकते हैं, इसकी मिसाल सुसनेर विकासखंड के ग्राम गरड़ा में देखने को मिल रही है। यहां 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित अमृत सरोवर न केवल जल संचयन का महत्वपूर्ण केंद्र बना है, बल्कि आसपास के कुओं का जलस्तर बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रहा है। गुरुवार को कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना ने सरोवर का निरीक्षण कर इसके स्थल चयन और ग्रामीणों के सामूहिक संकल्प की सराहना की।
*गर्मियों में भी उपलब्ध रहता है पानी*
वर्ष 2025-26 में निर्मित अमृत सरोवर वर्तमान में लबालब भरा हुआ है। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि सरोवर में गर्मियों के दौरान भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है। इससे क्षेत्र के कुओं के जलस्तर में वृद्धि हुई है और जल उपलब्धता को लेकर ग्रामीणों को राहत मिली है।
*ग्रामीणों का संकल्प बना मिसाल*
अमृत सरोवर की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीणों ने स्वेच्छा से सामूहिक संकल्प लिया है कि वे सिंचाई के लिए सरोवर से पानी नहीं लेंगे, ताकि इसका जल लंबे समय तक संरक्षित रह सके। कलेक्टर डॉ. मीना ने ग्रामीणों की इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय प्रयास बताया।
*जल संचयन के साथ भूजल स्तर में भी सुधार*
अमृत सरोवर के निर्माण से ग्रामीणों और किसानों में खुशी है। सरोवर वर्षा जल को संचित करने के साथ भूजल स्तर में सुधार लाने में भी सहायक साबित हो रहा है। ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी ने यह संदेश दिया है कि जल संरक्षण के लिए जनसहयोग और जिम्मेदारी की भावना बेहद महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी, जनपद पंचायत सीईओ अभिषेक यादव सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।