जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश अब ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ के नाम से जानी जाएगी मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना दूध उत्पादन में अव्वल पशुपालकों को मिलेंगे

आगर-मालवा। पशुपालकों की आय बढ़ाने और देशी गोवंश की उन्नत नस्लों को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के एक घटक का नाम बदलकर अब ‘गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप शुरू की जा रही इस योजना के तहत प्रदेश के 208 चयनित वृंदावन ग्रामों में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को एक लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
यह निर्णय 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में मुख्यमंत्री की घोषणा के परिपालन में लिया गया है। पूर्व में यह योजना प्रदेश की मूल गोवंशीय एवं भारतीय उन्नत नस्ल की दुधारू गायों के लिए पुरस्कार योजना के रूप में संचालित थी। योजना वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक संचालित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 23.50 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है।
दूध उत्पादन बढ़ाने और देशी नस्लों के संरक्षण पर जोर
योजना का मुख्य उद्देश्य वृंदावन ग्रामों में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करना, अधिक दूध देने वाली गायों की पहचान करना और पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करना है। इसके माध्यम से गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी सहित अन्य अधिसूचित स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की मंशा वृंदावन ग्रामों को दुग्ध उत्पादन और देशी पशुधन संवर्धन के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करने की है, जिससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो सके।
6 लीटर या अधिक दूध देने वाली गायें होंगी पात्र
प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें ऐसे सभी वर्गों के पशुपालक भाग ले सकेंगे, जिनके पास भारतीय उन्नत नस्ल की ऐसी दुधारू गाय है, जो प्रतिदिन कम से कम 6 लीटर दूध देती है। इच्छुक पशुपालकों को आवेदन फार्म के माध्यम से अपनी गाय का पंजीयन कराना होगा। आवेदन में पशुपालक का नाम-पता, गाय का यूआईडी अथवा ईयर टैग नंबर, नस्ल, उम्र, ब्यात संख्या, ब्यात तिथि, दुग्ध उत्पादन और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी गाय की पहचान एवं स्वास्थ्य का सत्यापन करेंगे।
तीन समय के दूध उत्पादन के औसत से होगा चयन
प्रतियोगिता के संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर राजस्व एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की समिति गठित की जाएगी। समिति आवेदनों का परीक्षण कर प्रतियोगिता आयोजित करेगी। गाय के तीन समय के दुग्ध उत्पादन के औसत के आधार पर विजेताओं का चयन किया जाएगा। दूध मापने की प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए विभागीय कर्मचारियों, दुग्ध समितियों अथवा मान्य दुग्ध संग्रहण केंद्रों की सहायता ली जा सकेगी।
विकासखंड स्तर पर तैयार परिणाम जिला उपसंचालक पशुपालन को भेजे जाएंगे। इसके बाद कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और उपसंचालक पशुपालन की समिति परिणामों के आधार पर विजेताओं का निर्धारण करेगी। सत्यापित आंकड़ों के अनुसार निर्धारित अवधि में सर्वाधिक दूध देने वाली गाय को विजेता घोषित किया जाएगा।
यदि प्रथम, द्वितीय या तृतीय स्थान पर दो गायों का दुग्ध उत्पादन समान रहता है, तो तीनों समय के दूध उत्पादन में कम अंतर वाली गाय को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही कम ब्यात और कम उम्र वाली गाय को वरीयता मिलेगी। किसी विवाद की स्थिति में विकासखंड स्तरीय समिति का निर्णय अंतिम होगा।
प्रथम पुरस्कार एक लाख, द्वितीय को 50 हजार
योजना के तहत प्रत्येक वृंदावन ग्राम में उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाली गाय के पालक को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
योजना के माध्यम से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, उन्नत स्वदेशी नस्लों को संरक्षित करने और पशुपालन को अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






