हिंदू धार्मिक दृष्टिकोण से कार्तिक मास का बहुत महत्व रहता है।

हिंदू धर्मावलंबियों के लिए हिंदी महिना कार्तिक मास का बहुत महत्व रहता है। कार्तिक मास को चार्तुमास का अंतिम मास भी माना जाता है।
हिंदू पौराणिक मान्यतानुसार भगवान श्री हरि विष्णु जी चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जातें हैं, इस दौरान हिंदू धर्म के लोग कोई भी शुभ कार्य नहीं किया करतें हैं। कार्तिक मास भगवान श्री हरि विष्णु जी की जागृति का मास होता है, इसलिए यह कार्तिक मास अत्यंत शुभ माना जाता है।
हिंदू वार्षिक कैलेंडर के अनुसार यह कार्तिक मास अश्विन मास के अंत में पूर्णिमा तिथि से शुरू होता है और कार्तिक मास पूर्णिमा तिथि तक चलता है, और इस पूरे महिने में भगवान श्री हरि विष्णु जी की उपासना का बहुत महत्व रहता है। इस महिने में कार्तिक पूर्णिमा कथा,सुनना, पढ़ना शुभ होता है।
कार्तिक का यह पूरा महिना धार्मिकता से भरा हुआ रहता है। भगवान श्री हरि विष्णु जी जिस दिन योगनिद्रा से जानतें हैं, उस दिन को देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है।
कार्तिक मास में तुलसी पौधे की विशेष पूजा वंदना भी की जाती है। कार्तिक मास में ही शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह भगवान श्री हरि विष्णु जी के साथ कराने की परंपरा रही है।
तुलसी जी को देवी माता लक्ष्मी जी का प्रतीक भी माना जाता है। पूरे कार्तिक मास भर तुलसी पौधे के समक्ष प्रत्येक शाम को दीपक प्रज्वलित करना, और उनकी पूजा आराधना करना बहुत ही शुभ दायक माना जाता है।
तुलसी के पौधे में अधिक से अधिक ऑक्सीजन प्रदान करने की क्षमता रहती है, तुलसी के पौधे से वायु प्रदूषण दूर होता है। कार्तिक के इस पवित्र मास को दामोदर मास भी कहा जाता है।
दामोदर भगवान श्री हरि विष्णु जी का ही एक नाम है। पौराणिक व्रत कथाओं के अनुसार इस पवित्र कार्तिक मास में भगवान शिव जी ओर भगवान श्री हरि विष्णु जी दोनों ही इस पृथ्वीलोक पर प्रकट होतें हैं , और इसलिए भी धूमधाम से इनकी पूजा आराधना करनी चाहिए।
पवित्र कार्तिक मास में गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने का भी बहुत महत्व रहता है। कार्तिक का यह.महिना आत्मशुदधि, आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस पवित्र कार्तिक मास में ही प्रतिवर्ष दीपावली का त्योहार भी आता है। दीपावली को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है, और दीपों का पर्व भी कहा जाता है।
कार्तिक मास में मनाए जाने वाला यह दीपावली त्योहार समाजिक मेल मिलाप, भाईचारा, और सौहार्द्र बढ़ाता है। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष घोर अंधकार भरी अमावस की रात्रि में पूरा शहर गांव सुंदर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है, और इन दीपों की रोशनी से सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
कार्तिक मास के इन दिनों में कई प्रकार के कीड़े मकोड़ों का प्रकोप भी बढ़ जाता है, जो कि दीपावली के दीपों की अग्नि में नष्ट हो जातें हैं, और पूरा वातावरण प्रदूषण रहित हो जाता है । पवित्र कार्तिक मास का समापन दिवस प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा से होती है, इसे देव दीपावली भी कहा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव जी ने एक असुर का संहार किया था, जिसका नाम त्रिपूरासुर था और इसलिए भी कार्तिक मास पूर्णिमा तिथि के दिन को त्रिपूर पूर्णिमा भी कहा जाता है। कार्तिक मास पूर्णिमा तिथि पर भोलेनाथ महादेव की आराधना पूजा भी की जाती है।
कार्तिक मास के दौरान लोग दलहन कम खाया करतें हैं, बहुत ही संतुलित, संयमित भोजन किया जाता है,। इस मास में बहुत ही संयम नियम से जीवन जीतें हैं।
कार्तिक मास में शरीर में तेल भी कम लगाया जाता है। इस तरह से देखा जाए तो कार्तिक मास बहुत ही आध्यात्मिक, अनुष्ठानों से भरा हुआ पवित्र मास भी माना जाता है।
कार्तिक के इस पूरे महीने भर गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करना, दीपदान करना, अर्ध्य देकर मानव अपने सभी दुर्गुणों दोषों से मुक्त होकर पवित्र पथ पर आगे बढ़ सकता है। कार्तिक का यह पवित्र महिना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, इसी महीने में कार्तिक मास कथा, भगवान श्री हरि विष्णु जी, भोलेनाथ महादेव जी, का पूजा महत्व, तुलसी विवाह, पूजन, दीपदान आदि किए जातें हैं।
अलग अलग धार्मिक परंपराओं में कार्तिक मास की कथा पूजन के कई रूप भी देखने सुनने को भी मिलते है। कार्तिक मास में श्रद्धालु भक्तगण अपनी श्रद्धा परंपरा के अनुसार कुछ धार्मिक कार्य भी किया करतें हैं।
कार्तिक का यह पवित्र महिना हम सबको भक्ती, शक्ति, सेवा, उत्तम कार्यों, को करने का महत्व भी समझाता है। कार्तिक मास का संदेश भी है कि, पूजा आराधना के साथ साथ ही जरूरतमंद लोगों की सहायता, दया रखना ,भी जीवन में बहुत आवश्यक होता है।
सच्ची निष्ठा, भक्ति, श्रद्धा केवल धार्मिक नियमों, कार्यों तक सीमित नहीं होती , बल्कि यह.हमारे सद्व्यवहार, और कर्मों में दिखाई देनी चाहिए।
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