आगर-मालवा, 28 अक्टूबर। जिले में उन्नत नस्ल के गौवंश के संवर्धन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ का शुभारंभ हो गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना के मार्गदर्शन में आगर, बड़ौद, सुसनेर और नलखेड़ा तहसीलों में 27 से 31 अक्टूबर तक दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता के प्रथम चरण की शुरुआत ग्राम तनोड़िया में गौ-पूजन और पुष्पमालाओं से गौवंश का स्वागत कर की गई।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. एस.एल. जारोलिया ने योजना के उद्देश्य, नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। इस दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद महाजन, सहायक विस्तार अधिकारी डॉ. अनिकेत जैन सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पशुपालक मौजूद रहे।
*मालवी और गिर नस्ल की 6 गायें प्रतियोगिता में शामिल*
ग्राम तनोड़िया से प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद छह पात्र गौपालकों का चयन किया गया है। ये पशुपालक अपनी उत्कृष्ट मालवी और गिर नस्ल की गायों के साथ प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक गौवंश के दुग्ध मापन एवं निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके लिए पशु चिकित्सा डिप्लोमाधारियों के अलग-अलग दल तैनात किए गए हैं। साथ ही, प्रत्येक चरण के दुग्ध मापन की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।
प्रतियोगिता के प्रथम चरण का दुग्ध मापन बुधवार को पूरा किया गया। इसके बाद 29 अक्टूबर को सुबह और शाम दूसरे एवं तीसरे चरण का दुग्ध मापन किया जाएगा।
*तीन चरणों के औसत उत्पादन से होगा विजेताओं का फैसला*
योजना के तहत तीनों चरणों में दर्ज किए गए दुग्ध उत्पादन के औसत के आधार पर विजेता गौपालकों का चयन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले गौपालक को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
*उन्नत नस्ल और दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा*
‘गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर नस्ल के गौवंश के पालन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना से पशुपालकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने के साथ जिले में डेयरी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालन को लाभकारी गतिविधि बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।