गौशाला और मंदिर तक सड़क की मांग पर महंत का आरोप- बीडीओ ने संपत्ति पर उठाए सवाल, बोले- गलत साबित हुई तो त्याग दूंगा संन्यास

महंत नागा गिरजेश दास ने बीडीओ की संपत्ति की भी जांच कराने की उठाई मांग, बीडीओ बोले- मैंने अपमानजनक कोई बात नहीं कही
बस्ती। कप्तानगंज ब्लॉक के ग्राम पंचायत पोखरा स्थित प्राचीन राम जानकी हनुमानगढ़ी मठ के महंत नागा गिरजेश दास और खंड विकास अधिकारी के बीच विवाद सामने आया है। महंत ने आरोप लगाया है कि गौवंशों के लिए टीन शेड और मंदिर परिसर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 150 मीटर आरसीसी सड़क निर्माण की मांग करना उन्हें महंगा पड़ गया।
महंत के मुताबिक, उन्होंने इन निर्माण कार्यों के लिए 7 मई 2026 को खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज राकेश कुमार दीपक को ज्ञापन सौंपा था। इसी ज्ञापन की जांच के लिए 2 नवंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे खंड विकास अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। महंत का आरोप है कि जांच के दौरान अधिकारी ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी ने उनसे सवाल किया कि आपके पास पहले से इतनी गाड़ियां और सभी उपयोग के संसाधन मौजूद हैं, फिर सरकारी सुविधाओं की क्या जरूरत है? महंत का आरोप है कि अधिकारी ने उनकी संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए।
दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दी खुली चुनौती
महंत नागा गिरजेश दास ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा कि यदि किसी भी सक्षम सरकारी जांच में उनकी संपत्ति गलत तरीके से अर्जित होना साबित होता है तो वह अपना संन्यासी जीवन तक त्यागने को तैयार हैं। सरकार और हिंदू समाज उन्हें जो भी दंड देगा, उसे वह हंसते हुए स्वीकार करेंगे।उन्होंने कहा कि यदि उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही खंड विकास अधिकारी की संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी जिम्मेदार अधिकारी की संपत्ति या कार्यप्रणाली में गड़बड़ी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।महंत ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि जनहित में मांग करने वाले लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी। वह इस मामले को लेकर आगे भी जिम्मेदार अधिकारियों से मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे।बीडीओ बोले- मैंने अपमानजनक कोई बात नहीं कहीइस संबंध में खंड विकास अधिकारी राकेश कुमार दीपक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही, जिससे महंत को अपमानित महसूस हुआ हो। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत के दौरान उन्होंने महंत से इतना जरूर कहा था कि आपके पास गाड़ी है। महंत द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि महंत जी ऐसा आरोप लगा रहे हैं तो क्या कहा जाए, ऐसे संत के बारे में क्या कहा जाए।अब इस मामले में महंत के आरोप और बीडीओ के जवाब के बाद प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल यह है कि जनहित में दिए गए ज्ञापन की जांच के दौरान वास्तव में क्या बातचीत हुई और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
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