सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप, पंचायत के विकास कार्य में दबंगई का रोड़ा! महिला सरपंच से मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज की शिकायत

*सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप, पंचायत के विकास कार्य में दबंगई का रोड़ा! महिला सरपंच से मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज की शिकायत*
*धनवाही कला में सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर बवाल, बंदूक और फरसा लेकर पहुंचने का आरोप; महिला सरपंच ने थाने में लगाई न्याय की गुहार*
मैहर। ग्राम पंचायत धनवाही कला, जनपद पंचायत मैहर में शासकीय भूमि पर कथित कब्जे, पंचायत के विकास कार्य में बाधा उत्पन्न करने और निर्वाचित महिला सरपंच के साथ मारपीट किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जनहित के लिए बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण को लेकर उपजा विवाद अब पुलिस और प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। मामले ने गांव में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी जमीन की सुरक्षा और महिला जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत धनवाही कला की अन्य पिछड़ा वर्ग से निर्वाचित महिला सरपंच श्रीमती सुषमा रामप्रकाश कुशवाहा द्वारा ग्रामीणों की सुविधा और सार्वजनिक उपयोग के उद्देश्य से सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। बताया गया है कि पूर्व में विवाद के चलते निर्माण कार्य लंबित था, लेकिन शासन की सहमति मिलने के बाद इसे दोबारा प्रारंभ कराया गया।
बंदूक और फरसा लेकर निर्माण स्थल पहुंचने का आरोप
महिला सरपंच की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान पुष्पराज सिंह बघेल, उनके पुत्र युवराज सिंह एवं यशराज सिंह निवासी ग्राम हिनौता कथित तौर पर बंदूक और फरसा लेकर निर्माण स्थल पर पहुंचे और निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान महिला सरपंच के साथ मारपीट, अभद्र गाली-गलौज और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया।
एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह के कथित व्यवहार ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि पंचायत के सार्वजनिक कार्य और महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है।
तीन एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का भी आरोप
इस विवाद के बीच शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि पूर्व में लगभग तीन एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण करा लिया गया और आज भी उक्त भूमि को निजी अधिपत्य में रखा गया है। इतना ही नहीं, दोबारा शासकीय भूमि पर कब्जा करने के प्रयास की शिकायत भी की गई है।
यदि सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप सही हैं तो यह राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। सवाल यह है कि आखिर शासकीय भूमि पर कथित कब्जे की स्थिति में अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या राजस्व विभाग ने भूमि का सीमांकन और भौतिक सत्यापन कराया है?
पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
महिला सरपंच श्रीमती सुषमा रामप्रकाश कुशवाहा ने पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस थाना नादन देहात में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि शिकायत में लगाए गए मारपीट, धमकी और जातिसूचक शब्दों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए। वहीं राजस्व विभाग शासकीय भूमि के अभिलेखों, सीमांकन और मौके के भौतिक सत्यापन के जरिए कथित कब्जे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
बड़ा सवाल: सरकारी जमीन किसकी और पंचायत के विकास कार्य पर किसका पहरा?
ग्राम पंचायत के सार्वजनिक निर्माण कार्य में यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेकर बाधा उत्पन्न करता है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोप और महिला सरपंच के साथ कथित मारपीट की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं, सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं और जनहित के सामुदायिक भवन का निर्माण बिना किसी दबाव के पूरा हो पाता है या नहीं।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के पक्ष पर आधारित हैं। आरोपित पक्ष का जवाब तथा पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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