सुलतानपुर में एसटीएफ का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 90 लाख का गांजा जब्त, बिहार का तस्कर दबोचा गया

अजीत मिश्रा (खोजी)
सुलतानपुर में ‘नशे की खेप’ पर एसटीएफ का सर्जिकल स्ट्राइक: 90 लाख का गांजा जब्त, बिहार का तस्कर गिरफ्तार
तस्करी का ‘डेडली रूट’: सुलतानपुर में 90 लाख का गांजा बरामद, क्या खत्म होगा नशे का यह संगठित कारोबार?
सुलतानपुर: उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर में एसटीएफ (STF) ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी और आक्रामक कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है। जिले के चांदा थाना क्षेत्र के बरनी मोड़ टोल प्लाजा के पास से एसटीएफ ने एक ट्रक से 360 किलोग्राम गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 90 लाख रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की सड़कों का इस्तेमाल अपराधी बेखौफ होकर ‘नशे के गलियारे’ के रूप में कर रहे हैं।
ओडिशा से अयोध्या-बहराइच का ‘डेडली रूट’
खुफिया जानकारी के अनुसार, यह गांजा ओडिशा से तस्करी कर लाया गया था और इसे अयोध्या व बहराइच जिलों में खपाने की तैयारी थी। एसटीएफ और एनसीबी (NCB) गोरखपुर की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर बरनी मोड़ टोल प्लाजा पर घेराबंदी की। जब बिहार नंबर के ट्रक की तलाशी ली गई, तो प्लास्टिक के 12 बंडलों में छिपाकर रखा गया 360 किलो गांजा देख पुलिस महकमा भी दंग रह गया।
चालक नहीं, यह एक ‘पेशेवर मोहरा’ है
पकड़े गए आरोपी की पहचान मधुबनी (बिहार) निवासी दीपक कुमार महतो के रूप में हुई है। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह महज एक ट्रक चालक नहीं, बल्कि इस तस्करी नेटवर्क का एक सक्रिय हिस्सा है। उसने कबूल किया कि ‘नौमान’ नाम के एक शख्स के जरिए वह बहराइच के सरगनाओं के संपर्क में आया था। लालच ऐसा कि मात्र 50 हजार रुपये के चक्कर में वह अपने भविष्य को सलाखों के पीछे धकेल बैठा।
एसटीएफ की सक्रियता और खुफिया तंत्र की जीत
अपर पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ लखनऊ) अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में उपनिरीक्षक फैजुद्दीन सिद्दीकी की टीम ने जिस मुस्तैदी से काम किया, उसने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। यह कोई पहली बार नहीं है जब सुलतानपुर तस्करों के रडार पर है। पिछले साल भी इसी तरह 27 जून को 70 लाख रुपये की खेप पकड़ी गई थी। बार-बार ओडिशा से गांजे की खेप का उत्तर प्रदेश के जिलों में आना, एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।
सवाल जो अनुत्तरित हैं:
- सुरक्षा घेरा क्यों है कमजोर? क्या ओडिशा से यूपी की सीमाओं तक आने वाले ट्रकों की चेकिंग सिर्फ खानापूर्ति है?
- असली ‘माफिया’ कब पकड़े जाएंगे? क्या 50 हजार के लालची चालक को पकड़ने तक ही पुलिस का काम सीमित रहेगा, या उस बहराइच और ओडिशा के बड़े तस्करों तक भी हाथ पहुंचेंगे जो पर्दे के पीछे से इस पूरे ‘मौत के कारोबार’ को चला रहे हैं?
फिलहाल, एनसीबी ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब एसटीएफ उसके मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल्स के जरिए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है। सवाल यही है कि क्या इस गिरफ्तारी से नशामुक्त समाज की मुहिम को बल मिलेगा, या फिर कुछ दिनों बाद फिर किसी टोल प्लाजा पर कोई और ट्रक ‘सफेद जहर’ लेकर खड़ा मिलेगा?
नोट: आरोपी के पास से बरामद व्यक्तिगत पहचान संबंधी दस्तावेजों (जैसे कि आधार कार्ड) का उपयोग पुलिस जांच और वैधानिक कार्रवाई के लिए किया जा रहा है।
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