बस्ती: पीतपुर में मनरेगा की उड़ी धज्जियां, ‘मजदूरों का हक’ डकार रहे जिम्मेदार!

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: ‘यंत्र लगाओ-मजदूर हटाओ’ की नीति से पीतपुर में सरकारी धन की खुली लूट, जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
- हरैया में मनरेगा का मजाक: मजदूरों को ठेंगा, जेसीबी से हो रही ‘भ्रष्टाचार की खुदाई’।
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो: पीतपुर में सरकारी धन की बंदरबांट, क्या जागेगा हरैया प्रशासन?
- ग्राम पंचायत पीतपुर में मनरेगा में ‘जेसीबी राज’, खंड विकास अधिकारी की भूमिका संदिग्ध!
- चुनाव से पहले ‘खजाना खाली’ करने की तैयारी? पीतपुर में जेसीबी से तालाब खुदाई पर उठ रहे सवाल।
बस्ती: विकासखंड हरैया के अंतर्गत ग्राम पंचायत पीतपुर में मनरेगा योजना की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार की ओर से मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) यहाँ ‘मशीनी लूट’ का जरिया बन गई है। गाँव में तालाब खुदाई का काम मनरेगा मजदूरों से कराने के बजाय जेसीबी मशीन से धड़ल्ले से कराया जा रहा है।

वायरल फोटो ने खोली पोल
सोशल मीडिया पर पीतपुर में जेसीबी से तालाब खुदाई का एक वीडियो/ फोटो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकारी नियमों को ताक पर रखकर विकास कार्य के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। सवाल यह है कि यदि तालाब की खुदाई मशीन से ही होनी थी, तो मनरेगा के तहत मजदूरों का पंजीकरण क्यों किया गया और उनके नाम पर निकलने वाली मजदूरी का पैसा किसकी जेब में जा रहा है?
‘मलाई’ काटने का खेल, जिम्मेदारों की मिलीभगत
सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और एपीओ मनरेगा की मिलीभगत है। खण्ड विकास अधिकारी (BDO) हरैया की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विकास खंड के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर सरकारी खजाने की ‘मलाई’ काटने में जुटे हैं। पंचायत चुनाव नजदीक देख, ग्राम प्रधान ने सरकारी धन को आनन-फानन में ठिकाने लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
प्रदेश सरकार की मंशा पर फिर रहा पानी
योगी सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन का दावा करती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बैठे अधिकारी और जनप्रतिनिधि इन दावों को ठेंगा दिखा रहे हैं। जेसीबी का इस्तेमाल सीधे तौर पर गरीब मजदूरों के हक पर डाका डालना है। जब मशीनें काम करेंगी, तो बेचारा मजदूर रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होगा।
क्या कुंभकर्णी नींद से जागेंगे अधिकारी?
अब पूरे जिले में चर्चा का विषय यह है कि क्या सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हरैया के खंड विकास अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे? क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी ग्राम प्रधान व संबंधित विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी?
जनता की नजरें अब उच्चाधिकारियों के एक्शन पर टिकी हैं। क्या प्रशासन इस भ्रष्टाचार के ‘पीतपुर मॉडल’ को रोकेगा या फिर जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
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