जल जीवन मिशन बना ‘भ्रष्टाचार मिशन’: पानी भरते ही ताश के पत्तों की तरह ढही राजपुर की टंकी!

अजीत मिश्रा (खोजी)
जल जीवन मिशन या ‘भ्रष्टाचार मिशन’? पहली बार पानी भरते ही ताश के पत्तों की तरह ढही राजपुर की टंकी
- बस्ती में विकास का ‘कच्चा चिट्ठा’ उजागर: घटिया निर्माण की पोल खोलती ढही टंकी, बाल-बाल बची ग्रामीणों की जान।
- ‘बलि का बकरा’ खोज रही प्रशासन: टंकी ढहने के मामले में बड़े ठेकेदारों और अफसरों को बचाने की साजिश?
- राजपुर का ‘टंकी कांड’: पहली टेस्टिंग में ही फेल सरकारी तंत्र, जवाबदेही तय करने में क्यों हिचकिचा रहा जिला प्रशासन?
बस्ती: केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ की हकीकत बस्ती जिले के कुदरहा ब्लॉक के राजपुर गाँव में सामने आ गई है। जिस टंकी का निर्माण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए किया गया था, वह पहली बार पानी भरते ही भरभरा कर ढह गई। गनीमत रही कि इस दौरान कोई ग्रामीण आसपास नहीं था, वरना एक बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता था।
घटिया निर्माण की ‘लाइव’ गवाही
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा टंकी के ढहने का लाइव वीडियो सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जिस तरह से टंकी फटी और पानी का सैलाब सड़कों पर उतरा, उसने यह साबित कर दिया है कि इसमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया है। लोगों का कहना है कि यह ‘विकास’ नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे की लूट है।
प्रशासन की ‘लिपा-पोती’ और दोषियों को संरक्षण
घटना के बाद से ही जिला प्रशासन का रवैया सवालों के घेरे में है। बड़े मगरमच्छों (ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों) पर हाथ डालने के बजाय, प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए केवल एक बेचारे ऑपरेटर पर गाज गिराकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है। सूत्रों की मानें तो ग्राम प्रधान और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस ‘खेल’ को छिपाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों की हुंकार
राजपुर गाँव के लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि जल जीवन मिशन के तहत बन रही ज्यादातर टंकियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। घटिया सामग्री का इस्तेमाल खुलेआम हुआ है, लेकिन अधिकारी अपनी जेबें भरने में व्यस्त रहे।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
अब सवाल यह उठता है कि:
- टंकी की गुणवत्ता की जांच (Quality Check) के समय अधिकारी कहाँ सो रहे थे?
- निर्माण करने वाली फर्म को भुगतान किस आधार पर किया गया?
- क्या सिर्फ एक ऑपरेटर को बलि का बकरा बनाकर बड़े ठेकेदारों को बचाया जा रहा है?
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
क्या बस्ती प्रशासन में इतनी हिम्मत है कि वह अपनी ही नाक के नीचे हुए इस भ्रष्टाचार के ‘असली गुनहगारों’ को जेल की सलाखों के पीछे भेज सके, या यह मामला भी फाइलों की धूल में दब जाएगा?
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