बस्ती: हिंदूवादी नेता पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: हिंदूवादी नेता अखिलेश सिंह पर ग्रामीणों ने लगाया साजिश और फर्जी मुकदमेबाजी का आरोप, एसपी से की शिकायत
- पोखरा भिटवा का मामला: सरकारी गनर और रसूख के दुरुपयोग से ग्रामीणों में दहशत, उच्च स्तरीय जांच की मांग
- मृतक ऑटो चालक की मौत पर उठा विवाद, ग्रामीणों ने अखिलेश सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
- बस्ती पुलिस को ग्रामीणों का ज्ञापन: ‘फर्जी मुकदमों से प्रताड़ित कर रहे हिंदूवादी नेता, तुरंत हो कार्रवाई’
बस्ती। जनपद के पोखरा भिटवा गांव के ग्रामीणों ने लामबंद होकर एक हिंदूवादी नेता अखिलेश सिंह के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच और कानूनी कार्यवाही की मांग की है।जनपद के थाना कोतवाली अंतर्गत ग्राम पोखरा भिटवा के निवासी ग्रामीणों ने एकजुट होकर हिंदूवादी नेता अखिलेश सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में अखिलेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों ने अपने शिकायती पत्र में दावा किया है कि मृतक हरेन्द्र सिंह, जो पेशे से ऑटो चालक थे, ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अखिलेश सिंह ने साजिश के तहत इस घटना को एक फर्जी मुकदमे (मु0अ0स0- 263/26 धारा 108 बी0एन0एस0) में बदलने का प्रयास किया है।
ग्रामीणों के मुख्य आरोप:
शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने कई गंभीर बातें कही हैं:
- साजिश का आरोप: ग्रामीणों का आरोप है कि अखिलेश सिंह ने मृतक हरेन्द्र सिंह को अपने घर बुलाकर पहले नशा कराया और फिर उसे आत्महत्या के लिए उकसाया।
- वीडियो का दुरुपयोग: ग्रामीणों का यह भी दावा है कि अखिलेश सिंह और उनके चचेरे भाई उपेन्द्र सिंह ने मृतक से एक स्क्रिप्ट पर बयान दिलवाकर वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई और उसके आधार पर गांव के ही संभ्रांत व्यक्तियों के खिलाफ मनगढ़ंत मुकदमा दर्ज करवा दिया।
- दबदबे का इस्तेमाल: पत्र में उल्लेख किया गया है कि अखिलेश सिंह ‘विश्व हिंदू महासंघ’ के जिलाध्यक्ष हैं और उनके पास सरकारी सुरक्षा (गनर) भी है, जिसका इस्तेमाल वे ग्रामीणों और अपने विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए करते हैं।
फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि अखिलेश सिंह और उनके चचेरे भाई उपेन्द्र सिंह ने उक्त वीडियो रिकॉर्डिंग का उपयोग करते हुए गांव के संभ्रांत व्यक्तियों—श्याम बहादुर सिंह और राघवेन्द्र सिंह उर्फ पप्पू—के विरुद्ध मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर मुकदमा (मु0अ0स0- 263/26, धारा 108 बी0एन0एस0) दर्ज करवाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया निजी शत्रुता के चलते प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से की गई है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अखिलेश सिंह के इस रवैये से गांव में भय का माहौल है और वे लगातार फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर एसपी से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक तीन सदस्यीय टीम गठित की जाए, जो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करे।शिकायती पत्र में अखिलेश सिंह के रसूख और उसके दुरुपयोग का भी उल्लेख किया गया है:
- अखिलेश सिंह ‘विश्व हिंदू महासंघ’ के जिला अध्यक्ष हैं।
- उनके पास एक सरकारी सुरक्षा कर्मी (गनर) है।
- ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपने इस रसूख का उपयोग करके ग्रामीणों और अपने शत्रुओं को डराने-धमकाने का काम करते हैं।
- लगातार दर्ज कराए जा रहे फर्जी मुकदमों के कारण पूरे गांव में भय का वातावरण व्याप्त है।
तीन सदस्यीय जांच टीम की मांग
इस पूरे प्रकरण से आहत होकर गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि:
- मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय पुलिस टीम गठित की जाए।
- इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

इस शिकायती पत्र पर गांव के अनेक निवासियों, जिनमें आशुतोष सिंह, सत्यम सिंह, कुसुमलता, अनंत सिंह, अंगद सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हैं, ने हस्ताक्षर कर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायती पत्र पर गांव के दर्जनों लोगों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति दर्ज कराई है।
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