बस्ती की सियासत: संजय चौधरी की ‘डूबती नैया’ और सपा का ‘अजीब सहारा’
भाजपा अध्यक्ष का 'अपना' कौन और 'पराया' कौन? सपा से बढ़ती नजदीकियों ने खड़े किए सवाल; एथेनॉल फैक्ट्री पर घमासान: क्या भाजपा नेता के बचाव में उतरकर सपा विधायक बिछा रहे कोई नई सियासी बिसात?
अजीत मिश्रा (खोजी)
‘क्यों’ हर बार ‘संजय चौधरी’ की ‘डूबती’ नैया का ‘सहारा’ बनते ‘सपाई’?
- रुधौली की राजनीति में ‘खिचड़ी’: भाजपा नेता का बचाव कर रहे विपक्षी नेता, जनता असमंजस में
- भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ‘सहारा’ कौन? संजय चौधरी और सपा नेताओं के रिश्तों की चर्चा तेज
- भाजपा नेता संजय चौधरी और सपा नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों के सियासी मायने
बस्ती: राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी की ‘डूबती नैया’ का सहारा बार-बार विपक्षी दल (सपा) क्यों बन रहे हैं? यह स्थिति राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों के बीच कई तरह के कयासों को जन्म दे रही है। बस्ती जिले की राजनीति में इस समय एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है, जहाँ भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी और विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच का तालमेल चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह स्थिति न केवल राजनीतिक जानकारों बल्कि आम जनता के बीच भी कौतूहल का विषय है।
भाजपा बनाम सपा: बदलती राजनीतिक समीकरण
संजय चौधरी का भाजपा कार्यकर्ताओं से दूरी बनाना और सपा के करीब आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उदाहरण के तौर पर, जिला पंचायत की एक बैठक में जहाँ भाजपा के ही कुछ लोग संजय चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे। उस समय भाजपा के अपने सहयोगियों के बजाय, सपा के विधायक महेंद्रनाथ यादव, राजेंद्र चौधरी और अतुल चौधरी उनके बचाव में आगे आए।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संजय चौधरी का भाजपा के कार्यकर्ताओं से किनारा करना और सपा नेताओं के प्रति नरम रुख अपनाना कई गहरे सवाल खड़े कर रहा है। लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर भाजपा के नेता के लिए उनके अपने दल के लोग ‘पराए’ क्यों महसूस हो रहे हैं और विपक्षी दल के नेता उनके ‘करीबी’ क्यों बनते जा रहे हैं।
‘संकटमोचक’ की भूमिका में सपा नेता
संजय चौधरी के लिए सपा नेताओं का बचाव में उतरना कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह एक पैटर्न की तरह दिख रहा है:
- जिला पंचायत बैठक का वाकया: जब भाजपा के ही कुछ सदस्यों ने संजय चौधरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बात हाथापाई तक पहुँच गई थी, तब भाजपा के साथियों का साथ मिलने के बजाय सपा के विधायक महेंद्रनाथ यादव, राजेंद्र चौधरी और अतुल चौधरी ने उनका बचाव किया था।
- चुप्पी और सवाल: इस घटना ने उन लोगों को भी सवाल उठाने का मौका दिया जो भाजपा में संजय चौधरी का विरोध कर रहे थे। सवाल यह उठता है कि आखिर सपा नेता संजय चौधरी का बचाव क्यों कर रहे थे, जबकि उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी?
’दिशा’ बैठक और एथेनॉल फैक्ट्री का विवाद
हाल ही में ‘दिशा’ नामक बैठक में एथेनॉल फैक्ट्री के मुद्दे पर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
- जब संजय चौधरी ने एथेनॉल फैक्ट्री के मुद्दे को उठाया, तो सपा विधायक तुरंत उनके पक्ष में खड़े हो गए, ठीक उसी तरह जैसे वे पहले जिला पंचायत की बैठक में हुए थे।
- भाजपा विधायक अजय सिंह ने इस दौरान विरोध किया और कहा कि फैक्ट्री के मामले में सरकार की कोई भूमिका नहीं है, यह मामला फैक्ट्री और गांव वालों के बीच का है।
- यह सवाल उठ रहा है कि जो विरोध फैक्ट्री की नींव रखते समय होना चाहिए था, वह उसके निर्माण के समय क्यों हो रहा है और इसका राजनीतिक श्रेय किसे मिलेगा?
सियासी श्रेय का गणित
रुधौली विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में इस समय बड़ा भ्रम व्याप्त है:
- संजय चौधरी और सपा विधायक राजेंद्र चौधरी, दोनों का ही प्रभाव क्षेत्र रुधौली है।
- जनता यह तय नहीं कर पा रही है कि यदि फैक्ट्री का निर्माण रुकता है या जारी रहता है, तो इसका राजनीतिक श्रेय किसे जाएगा—भाजपा को या सपा को?
अंततः, यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि भाजपा के भीतर संजय चौधरी की स्थिति और सपा के साथ उनकी बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में जिले की राजनीति में बड़े बदलावों का आधार बन सकती है।
जनता के बीच असमंजस
क्षेत्र की जनता इस पूरी घटनाक्रम को लेकर भ्रमित है। रुधौली विधानसभा क्षेत्र में जहां भाजपा के संजय चौधरी और सपा के राजेंद्र चौधरी दोनों का प्रभाव है, वहां यह ‘सियासी खिचड़ी’ लोगों के लिए समझ से परे है। जनता यह सोचने पर मजबूर है कि यदि निर्माण रुकता है या जारी रहता है, तो इसका राजनीतिक लाभ अंततः किस दल को मिलेगा?


















