Vande Bharat Live TV News
देश • राज्य • जिला — खबरें तेज़, साफ और विश्वसनीय तरीके से
उत्तर प्रदेश

गड़ा धन सरकारी, गड़ा गांजा आपका: कानून की दोहरी नीति का कड़वा सच!

01 Jul 2026, 12:29 PM • Vande Bharat Live TV News
📣 शेयर करें: Facebook X Telegram LinkedIn लिंक कॉपी हो गया ✅
1782888617033

अजीत मिश्रा (खोजी)

गड़ा धन सरकारी, गड़ा गांजा आपका: कानून की दोहरी चाल का कड़वा सच!

  • कानून की दोहरी नीति: ‘गड़ा धन’ और ‘गड़ा गांजा’ के बीच झूलता आम आदमी
  • न्याय का दोहरा मापदंड: जब खजाना राष्ट्र की धरोहर और गांजा नागरिक का अपराध बन जाए!
  • क्या कानून व्यवस्था आम आदमी के लिए केवल एक चक्रव्यूह है?

​क्या हमारे कानून का तराजू न्याय करने के लिए बना है या केवल आम आदमी की कमर तोड़ने के लिए? यह स्थिति हमारे तंत्र की उस विडंबना को उजागर करती है, जो सुनने में भले ही मजाकिया लगे, लेकिन हकीकत में बेहद डरावनी है।अक्सर कहा जाता है कि कानून अंधा होता है, लेकिन क्या वह कभी-कभी इतना ‘चयनित’ भी हो सकता है कि लाभ और हानि के आधार पर अपनी परिभाषाएं बदल ले? यह विषय केवल एक मजाकिया टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह हमारे न्यायिक और सामाजिक ढांचे की एक गंभीर विडंबना की ओर इशारा करता है।

​मुनाफे पर सरकार का कब्जा, मुसीबत में आम आदमी की जिम्मेदारी

​कल्पना कीजिए, आपने अपनी मेहनत से अपने खेत की खुदाई की और वहां से सोने के सिक्कों से भरा मटका निकल आया। आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा, लेकिन अगले ही पल सरकारी फरमान आता है—यह ‘गड़ा धन’ है और इस पर सरकार का हक है। आपकी जमीन, आपकी मेहनत, फिर भी खजाना सरकारी!

​लेकिन जरा रुकिए, खेल तब और दिलचस्प हो जाता है जब वही खेत गांजे की बोरी उगल दे। अचानक, ‘सरकारी संपत्ति’ वाला नियम हवा में गायब हो जाता है। अब कोई नहीं कहता कि यह जमीन के अंदर मिला है तो सरकार का है। अब सारा शक सीधा जमीन के मालिक पर घूम जाता है और गांजा निकलते ही जिम्मेदारी पूरी तरह आपकी हो जाती है।सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो ‘जमीन का मालिक’ होने का अर्थ है उस भूमि और उसके भीतर की वस्तुओं पर प्राथमिक अधिकार होना। हालांकि, कानून जब ‘गड़े धन’ (सोने-चांदी) की बात करता है, तो वह उसे ‘राष्ट्र की धरोहर’ घोषित कर सरकार के नियंत्रण में ले आता है। यहाँ तक तो तर्क दिया जा सकता है कि यह सार्वजनिक हित में है।

लेकिन, न्यायसंगतता पर सवाल तब उठता है जब वही मापदंड ‘गांजे की बोरी’ या अवैध सामग्री के मामले में पूरी तरह बदल जाता है। अचानक, ‘जमीन के भीतर की वस्तु’ होने का तर्क गायब हो जाता है और सारी जिम्मेदारी जमीन के मालिक पर डाल दी जाती है। यह दोहरा रवैया आम आदमी के मन में एक गहरा अविश्वास पैदा करता है।

​क्या कानून का चश्मा केवल मुनाफा और सजा देखने के लिए है?

​यह विडंबना ही है कि जब खजाना निकलता है तो वह ‘राष्ट्र की धरोहर’ बन जाता है, और जब नशीला पदार्थ निकलता है तो वह ‘नागरिक की जिम्मेदारी’। आम आदमी यह सोचने पर मजबूर है कि आखिर जमीन के नीचे पड़ी चीजों का सिद्धांत एक जैसा क्यों नहीं है? अगर जमीन से निकला सोना मेरा नहीं है, तो जमीन से निकला अपराध बिना किसी जांच के मेरा कैसे हो गया? न्याय का मूल सिद्धांत समानता है। यदि जमीन के नीचे दबी वस्तु पर सरकार का मालिकाना हक है, तो उस जमीन से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के लिए भी जांच की एक पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि सीधे जमीन के मालिक को दोषी मान लेना।

लेख में उठाए गए बिंदु कुछ प्रमुख सामाजिक और कानूनी विरोधाभास पेश करते हैं:

  • लाभ का बंटवारा: खजाना मिलने पर उसे ‘राष्ट्र की संपत्ति’ मानकर सरकार अपने नियंत्रण में ले लेती है।
  • जवाबदेही का बोझ: नशीला पदार्थ मिलने पर उसे ‘नागरिक की जिम्मेदारी’ मानकर सारा दोष उस व्यक्ति पर मढ़ दिया जाता है, जिसकी जमीन है।
  • कानूनी विरोधाभास: कानून की जटिलताओं के बीच आम समझ यह पूछने पर मजबूर है कि यदि जमीन से निकली वस्तु मेरी नहीं है, तो वह अपराध मेरा कैसे हुआ?

​लोकतंत्र में आईना दिखाती बहस

​भले ही कानूनी प्रावधान अलग-अलग हों, लेकिन यह सवाल व्यवस्था को आईना दिखाने का काम करता है। जब लाभ की बारी आती है तो मालिक सरकार हो जाती है, और जब मुसीबत की बारी आती है तो मालिक आम नागरिक?

सामाजिक प्रभाव: व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह

लोकतंत्र में व्यवस्था का उद्देश्य न्याय करना है, न कि उसे पेचीदा बनाकर आम जनता को परेशान करना। जब आम आदमी देखता है कि सरकार ‘लाभ की बारी आने पर मालिक’ बन जाती है और ‘मुसीबत की बारी आने पर नागरिक को मालिक’ बना देती है, तो व्यवस्था पर से भरोसा उठने लगता है।

यह बहस चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक फैलती है क्योंकि यह आम आदमी के अस्तित्व और उसकी सुरक्षा से जुड़ी है। एक न्यायसंगत समाज वह है जहाँ नियम स्पष्ट हों, न कि स्थितियों के अनुसार बदलते हुए। लोकतंत्र में कभी-कभी एक तार्किक व्यंग्य, भारी-भरकम भाषणों से कहीं अधिक असरदार और आईना दिखाने वाला साबित होता है।

क्या आपको नहीं लगता कि समय आ गया है कि कानून की इन अस्पष्टताओं को दूर कर एक पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए?

​यह लेख केवल एक व्यंग्य नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर एक तंज है जहां आम समझ और कानूनी व्यवहार के बीच एक गहरी खाई है। लोकतंत्र में कभी-कभी एक ऐसा ही कड़वा व्यंग्य, सौ भाषणों से ज्यादा असरदार साबित होता है।

क्या आपको लगता है कि इस तरह के दोहरे मापदंड आम आदमी का व्यवस्था से भरोसा कम कर रहे हैं?

📣 शेयर करें: Facebook X Telegram LinkedIn लिंक कॉपी हो गया ✅

🔔 Vande Bharat News Alerts

नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।

संबंधित और ताज़ा खबरें

6 महीने की उम्र में हादसे ने छीन लिया पैर, फिर भी नहीं टूटा हौसला; एक टांग पर 400 मीटर दूर स्कूल जाती है बलिया की 7 साल की रागिनी
Ballia05 Sep

6 महीने की उम्र में हादसे ने छीन लिया पैर, फिर भी नहीं टूटा हौसला; एक टांग पर 400 मीटर दूर स्कूल जाती है बलिया की 7 साल की रागिनी

दूसरे बच्चों को स्कूल जाते देख पढ़ने की जिद करती थी मासूम रागिनी; आर्थिक तंगी के बीच परिवार…

पूरी खबर पढ़ें →
रिपोर्टर/अनिरुद्ध अग्रहरि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर विशाल दंगल का आयोजन, पूर्व विधायक दिग्विजयनारायण जय चौबे व राकेश चतुर्वेदी ने किया उद्घाटन—रोमांचक मुकाबले देखने उमड़ी भारी भीड़
Sant Kabir Nagar05 Sep

रिपोर्टर/अनिरुद्ध अग्रहरि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर विशाल दंगल का आयोजन, पूर्व विधायक दिग्विजयनारायण जय चौबे व राकेश चतुर्वेदी ने किया उद्घाटन—रोमांचक मुकाबले देखने उमड़ी भारी भीड़

तामेश्वरनाथ धाम में सजा कुश्ती का अखाड़ा, ब्रह्मानंद ने लड़ी सबसे बड़ी कुश्ती संतकबीरनगर/श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर…

पूरी खबर पढ़ें →
रिपोर्टर-अनिरुद्ध अग्रहरि महुली पुलिस की सतर्क निगरानी — शराब की दुकानों के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग, पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
A2Z सभी खबर सभी जिले की05 Sep

रिपोर्टर-अनिरुद्ध अग्रहरि महुली पुलिस की सतर्क निगरानी — शराब की दुकानों के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग, पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

संतकबीरनगर /पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा द्वारा अपराध एवं अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने…

पूरी खबर पढ़ें →
थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार की मौत
A2Z सभी खबर सभी जिले की05 Sep

थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार की मौत

थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार धर्मेंद्र शर्मा…

पूरी खबर पढ़ें →
थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार की मौत
A2Z सभी खबर सभी जिले की05 Sep

थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार की मौत

थाना हजरतपुर म्याऊ दातागज मार्ग पर पिकअप और मोटरसाइकिल की आमने सामने टक्कर से बाइक सवार धर्मेंद्र शर्मा…

पूरी खबर पढ़ें →
error: Content is protected !!