उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती: बिजली विभाग की जानलेवा लापरवाही, पेड़ों और पुल के सहारे दौड़ रही 11 केवी लाइन

जुगाड़ के भरोसे बिजली विभाग: कड्सरी मिश्र गाँव में मौत को दावत दे रहे नंगे तार; ​क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा बिजली विभाग? खंभों की जगह पेड़ों पर टिकाई गई हाई-वोल्टेज लाइन

अजीत मिश्रा (खोजी)

बिजली विभाग का ‘जुगाड़’: क्या हम किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?

  • बिजली विभाग की जानलेवा लापरवाही: कड्सरी मिश्र गाँव में ‘जुगाड़’ के सहारे दौड़ रही मौत
  • बस्ती में अधिकारियों की बेरुखी: मनोरमा नदी के पुल पर ‘जुगाड़’ से दौड़ाई गई बिजली, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
  • ​सुरक्षा से खिलवाड़: कड्सरी मिश्र में बिजली की लचर व्यवस्था, इंसुलेटर के नाम पर सिर्फ जुगाड़

बस्ती: विकास और आधुनिकता के इस दौर में, जहाँ हम ‘स्मार्ट’ बनने की होड़ में हैं, वहीं बस्ती ज़िले का बिजली विभाग अपनी कार्यशैली से हमें वापस आदिम युग की उस ‘जुगाड़’ संस्कृति की ओर ले जा रहा है, जो जानलेवा साबित हो रही है। तस्वीरें केवल लापरवाही की तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि यह उस व्यवस्था की नाकामी का जीता-जागता सबूत है जो लोगों की जान की कीमत पर खिलवाड़ कर रही है।बिजली विभाग की लचर कार्यशैली और ‘जुगाड़’ व्यवस्था के कारण कई जगहों पर पहले भी बड़े हादसे हो चुके हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद, विभागीय अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। ताजा मामला बस्ती जिले के कुड़रा ब्लॉक के कड्सरी मिश्र गाँव का सामने आया है, जहाँ जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के चलते एक बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है।

क्या है पूरा मामला?

गाँव की बिजली आपूर्ति के लिए विभाग ने बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना तरीका अपनाया है:

  • पेड़ों का सहारा: गाँव के दक्षिण में स्थित अर्जुन के हरे पेड़ों पर एंगल लगाकर 11 केवी की बिजली लाइन दौड़ाई गई है, जहाँ कई बार स्पार्किंग की घटनाएँ भी हो चुकी हैं।
  • नदी पार करने का जोखिम: मनोरमा नदी के ऊपर एलटी (LT) तार को ले जाने के लिए किसी खंभे का उपयोग करने के बजाय, पुल की रेलिंग को ही बिजली के तार का आधार बना दिया गया है।
  • जुगाड़ का पुल: पुल पर लोहे की पाइप का जुगाड़ खड़ा कर नंगे तारों को नदी के उस पार ले जाया गया है। इंसुलेटर फँसाकर इन तारों को रोका गया है, जो मात्र छह-सात फीट की ऊंचाई पर लटक रहे हैं।

​मौत को दावत देता ‘जुगाड़’

​कुड़रा ब्लॉक के कड्सरी मिश्र गाँव में जो नज़ारा देखने को मिला, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। कहीं हरे-भरे अर्जुन के पेड़ों पर एंगल ठोककर 11 केवी की खतरनाक लाइन दौड़ाई गई है, तो कहीं मनोरमा नदी पार कराने के लिए पुल की रेलिंग को ही सहारा बना लिया गया है। क्या विभाग के पास बिजली के खंभे लगाने के लिए फंड नहीं है, या फिर यह पूरी प्रक्रिया ही उनकी संवेदनहीनता का हिस्सा है? स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से बिजली आपूर्ति इसी जानलेवा जुगाड़ के भरोसे चल रही है। बारिश के दिनों में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। पुल की रेलिंग से बंधे नंगे तारों के कारण रेलिंग में करंट उतरने का खतरा बना रहता है, जिससे यहाँ से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति की जान जा सकती है।

​जब अधिकारी हों ‘बेखबर’

​सबसे दुखद पहलू यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे कई वर्षों से चल रहा है। नंगे तारों का पुल की रेलिंग से सटा होना और बारिश के मौसम में करंट लीक होने का सीधा खतरा—क्या विभागीय अधिकारियों को यह दिखाई नहीं देता? जब इस बारे में सवाल पूछा गया, तो संबंधित एसडीओ का जवाब था कि मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता। यह जवाबदेही से पल्ला झाड़ने का एक क्लासिक उदाहरण है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारी इस खतरनाक स्थिति से पूरी तरह बेखबर हैं। जब इस संबंध में एसडीओ कलवारी ओम प्रकाश शर्मा से सवाल किया गया, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह क्षेत्र उनके अधीन नहीं आता। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि बहादुरपुर उपकेंद्र की लाइन को पेड़ों पर एंगल लगाकर ले जाया गया है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।

​निष्कर्ष

​क्या एक बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी? कागजी जांच के आदेश देकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया जा सकता। समय रहते इस जानलेवा जुगाड़ को हटाकर स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था बहाल करना अनिवार्य है, इससे पहले कि कोई और मासूम इसकी भेंट चढ़ जाए।

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