संतकबीरनगर: शिक्षा के मंदिर में ‘लूट’ का खेल, प्रबंधक-प्रधानाचार्य पर लगे भ्रष्टाचार के संगीन आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)
शिक्षा के मंदिर में ‘लूट’: संतकबीरनगर के इस स्कूल में ‘प्रबंधक-प्रधानाचार्य’ का तानाशाही फरमान
- संतकबीरनगर: टीसी और अंकपत्र के नाम पर अवैध वसूली, स्कूल प्रबंधक और प्रधानाचार्य घिरे
- बौरव्यास इंटर कॉलेज में घपले की पोल: एमडीएम की धनराशि हड़पने का आरोप, जांच शुरू
- शिक्षा विभाग पर उठे सवाल: क्या सरकारी स्कूलों में अब खुलेआम चलेगा वसूली का धंधा?
- डीएम की दो टूक: शिक्षा के नाम पर शोषण करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा
- बीईओ बेलहर की बड़ी कार्रवाई की तैयारी: बौरव्यास स्कूल की अनियमितताओं की होगी निष्पक्ष जांच
संतकबीरनगर। जनपद के शिक्षा विभाग की नींव उस समय हिल गई, जब बौरव्यास स्थित ‘राष्ट्रीय इंटर कॉलेज’ (विद्यालय कोड: 721021) के विरुद्ध गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा जिलाधिकारी के दरबार में पहुँचा। शिक्षा का मंदिर माने जाने वाले इस विद्यालय में प्रबंधक और प्रधानाचार्य की मिलीभगत से जो ‘लूट’ चल रही है, वह न केवल सरकारी आदेशों का अपमान है, बल्कि गरीब विद्यार्थियों के भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ भी है।

क्या है मामला?
शिकायतकर्ता राममिलन ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में जो आरोप लगाए हैं, वे हैरान कर देने वाले हैं। आरोप है कि विद्यालय प्रशासन द्वारा शासन द्वारा निर्धारित मानकों को दरकिनार कर छात्रों से दोगुना फीस वसूली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि वसूली के बावजूद छात्रों को कोई रसीद तक नहीं दी जा रही है।
भ्रष्टाचार की फेहरिस्त:
- अवैध वसूली: ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC), अंकपत्र और चरित्र प्रमाण पत्र देने के नाम पर 100 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली।
- MDM में भी हाथ साफ़: कोविड-19 काल के दौरान कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आए मध्याह्न भोजन (MDM) और जूता-मोजा की DBT धनराशि में भी बंदरबांट का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पात्र छात्रों के बजाय मिलीभगत से चुनिंदा खातों में पैसा भेजा गया और शेष राशि का गबन कर लिया गया।
- सरकारी धन का दुरुपयोग: कक्षा 11 और 12 की फीस को आधिकारिक बैंक खाते में जमा करने के बजाय प्रबंधक और प्रधानाचार्य आपस में बांट रहे हैं।
- कागजी हेरफेर: एमडीएम योजना में छात्रों की संख्या अधिक दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी की जा रही है।
जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी, अब जांच का इंतज़ार
इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, “विद्यार्थियों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी (बेलहर) अनीता तिवारी ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
सवाल बड़ा है:
क्या शिक्षा के नाम पर चल रही यह दुकानें केवल धन उगाहने का जरिया बन चुकी हैं? क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस भ्रष्टाचार के पीछे किसी बड़ी राजनीतिक शह का हाथ है? जनता की नजरें अब इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होगी या मामला हमेशा की तरह ‘लीपा-पोती’ की भेंट चढ़ जाएगा?
यह खबर संतकबीरनगर के बौरव्यास के ‘राष्ट्रीय इंटर कॉलेज’ में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी है। देखना होगा कि प्रशासन इस शिक्षा माफिया पर कब तक लगाम लगा पाता है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






