उत्तर प्रदेशबस्ती

सिद्धार्थनगर में ‘खाकी’ के साये में पनप रहा नशे का कारोबार, थाने से 300 मीटर दूर खुलेआम बिक रहा गांजा!

डुमरियागंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गांजा बिक्री होने से स्थानीय अभिभावक बेहद चिंतित हैं। नशे की सुलभ उपलब्धता ने क्षेत्र के युवाओं को बर्बाद करना शुरू कर दिया है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

सिद्धार्थनगर: खाकी के साये में ‘नशाखोरी का साम्राज्य’, थाना परिसर से महज 300 मीटर की दूरी पर खुलेआम बिक रहा गांजा

  • डुमरियागंज: थाना तो सिर्फ 300 मीटर दूर है, फिर क्यों बेखौफ बिक रहा गांजा? पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
  • ‘मंथली’ की बदौलत फली-फूली नशे की मंडी; पुलिस की नाक के नीचे बर्बाद हो रही डुमरियागंज की युवा पीढ़ी।
  • कानून के पहरेदार या नशे के मददगार? डुमरियागंज में थाना परिसर के पास ही गांजे का अवैध साम्राज्य।
  • सिद्धार्थनगर में नशाखोरी पर ‘मौन’: क्या थाना प्रभारी के संरक्षण में चल रहा गांजे का काला कारोबार?
  • डुमरियागंज की सड़कों पर ‘नशे का जहर’, स्थानीय लोगों का आरोप- पुलिस की मिलीभगत से चल रहा नेटवर्क।

डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर): क्या सिद्धार्थनगर जिला पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि डुमरियागंज की जनता पूछ रही है। जिले के डुमरियागंज थाना क्षेत्र में नशे का कारोबार इस कदर बेखौफ हो चुका है कि थाना परिसर से महज 300 मीटर की दूरी पर खुलेआम गांजे की पुड़िया बेची जा रही है।

​पुलिस की ‘मंथली’ और तस्करों की मौज

​स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरे जिले में गांजे का एक बड़ा नेटवर्क बस्ती जनपद का एक शातिर तस्कर संचालित कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार के बारे में पुलिस को सब पता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल चुप्पी साधे रखना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​जनता के बीच चर्चा है कि पुलिस की कथित ‘मंथली’ बंधी हुई है, जिसके चलते तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं है। क्या ‘नशा मुक्त समाज’ का सरकारी दावा केवल कागजों तक ही सीमित है?

​’संरक्षण’ देने के आरोपों से घिरा थाना प्रभारी का पद

​इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप डुमरियागंज के थाना प्रभारी श्री प्रकाश यादव पर लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि उनके संरक्षण के बिना इलाके में गांजे की इतनी बड़ी खेप का कारोबार संभव ही नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से थाना प्रभारी के कार्यक्षेत्र में नशे का जहर घुल रहा है, उससे उनकी कार्यप्रणाली पर संदेह की सुई घूमना स्वाभाविक है।

​युवाओं का भविष्य दांव पर

​डुमरियागंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गांजा बिक्री होने से स्थानीय अभिभावक बेहद चिंतित हैं। नशे की सुलभ उपलब्धता ने क्षेत्र के युवाओं को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। सवाल यह है कि:

  • ​क्या पुलिस का इंटेलिजेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है?
  • ​थाने के ठीक पीछे चल रहे इस ‘मिनी ड्रग रैकेट’ पर उच्चाधिकारी मौन क्यों हैं?
  • ​क्या किसी बड़े हादसे या विरोध प्रदर्शन के बाद ही पुलिस प्रशासन की नींद खुलेगी?

सुर्खियां बनीं यह घटना न केवल पुलिस विभाग के लिए चुनौती है, बल्कि जिले के आला अधिकारियों की कार्यक्षमता पर भी तमाचा है। अब देखना यह होगा कि क्या पुलिस अधीक्षक इस मामले को संज्ञान में लेकर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर ‘मंथली’ के इस खेल में नशे का यह कारोबार यूं ही फल-फूलता रहेगा?

यह लेख स्थानीय जनता द्वारा दी गई शिकायतों और आरोपों पर आधारित है।

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