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गाड़ी में उल्टी होने पर अपहरण और मारपीट की सनसनीखेज घटना सामने आई।

यह घटना सिर्फ एक मामूली मारपीट या अपहरण का मामला नहीं है, बल्कि यह एक संगठित आपराधिक मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण है, जो अपने आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए समाज में खुलेआम आतंक फैला रहे हैं। क्या जरा सी बात पर किसी की जान लेने का लाइसेंस इन बदमाशों को किसने दिया है?

इंसानियत शर्मसार: गाड़ी में उल्टी होने पर महाकाल भक्तों का अपहरण और खूनी तांडव!

  • महरीपुर पेट्रोल पंप के पास महाकाल दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों के साथ हुआ विवाद।
  • बिना नंबर प्लेट की थार गाड़ी से जबरन अपहरण कर सुनसान स्थान पर ले जाकर दी गई जान से मारने की धमकी।
  • पीड़ित बलराम त्रिपाठी की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

बस्ती: धर्म और आस्था की नगरी से महाकाल के दर्शन के लिए निकली एक यात्रा उस वक्त खौफनाक मंजर में बदल गई, जब मामूली सी बात पर तथाकथित ‘बदमाशों’ ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। बस्ती के नगर थाना क्षेत्र के महरीपुर पेट्रोल पंप के पास हुई इस घटना ने कानून-व्यवस्था और इंसानी संवेदनाओं को ठेंगा दिखाते हुए यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में इंसानियत कितनी गिर चुकी है।

क्या थी वजह? सिर्फ एक उल्टी!

​घटना 19 जुलाई की है। रुधौली थाना क्षेत्र के पड़री गांव निवासी बलराम त्रिपाठी अपने साथियों—कप्तान सिंह और अमन सिंह—के साथ अर्टिगा गाड़ी से महाकाल (उज्जैन) के दर्शन के लिए निकल रहे थे। गाड़ी मोहित सिंह चला रहा था। महरीपुर पेट्रोल पंप के पास पहुंचते ही गाड़ी में बैठे बलराम त्रिपाठी को उल्टी होने लगी। बस, फिर क्या था—अमन सिंह का ‘अहंकार’ जागा और इसी मामूली सी बात पर विवाद शुरू हो गया।

​एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया को अपराधियों ने अपनी तौहीन मान लिया और मारपीट पर उतारू हो गए।

अपराधियों का दुस्साहस: थार गाड़ी से अपहरण और बर्बरता

​विवाद बढ़ा तो आरोपी अमन सिंह ने फोन कर अपने साथियों को बुला लिया। काले रंग की थार गाड़ी (बिना नंबर प्लेट) से रिषु सिंह उर्फ लल्ला और हरदीप सिंह अपने अन्य अज्ञात साथियों के साथ वहां आ धमके। हत्या की नीयत से बलराम त्रिपाठी का जबरन अपहरण कर उन्हें थार गाड़ी में पीछे बैठा लिया गया।

​इसके बाद अपराधियों का दुस्साहस देखिए—पीड़ित को एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहां गालियों की बौछार के बीच उन्हें बेरहमी से पीटा गया। आंखों पर गंभीर चोटें आईं, जान से मारने की धमकियां दी गईं। जब हमलावरों को यह अहसास हुआ कि पीड़ित के दूसरे साथी ने पुलिस को सूचना दे दी होगी, तब जाकर उन्होंने दहशत की स्थिति में उन्हें वापस पेट्रोल पंप के पास छोड़ा।

सवालिया घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

​यह घटना सिर्फ एक मामूली मारपीट या अपहरण का मामला नहीं है, बल्कि यह एक संगठित आपराधिक मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण है, जो अपने आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए समाज में खुलेआम आतंक फैला रहे हैं। क्या जरा सी बात पर किसी की जान लेने का लाइसेंस इन बदमाशों को किसने दिया है?

​गनीमत रही कि पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना उपनिरीक्षक श्याम सुंदर को सौंप दी है। लेकिन जनता के मन में यह सवाल सुलग रहा है कि क्या आम आदमी अब सड़कों पर सुरक्षित सफर भी नहीं कर सकता? यदि ऐसे मुल्जिम प्रवृत्ति के लोग खुलेआम घूमते रहे, तो कानून का खौफ जनता के दिलों से पूरी तरह मिट जाएगा। जरूरत इस बात की है कि पुलिस इन अपराधियों के इस संगठित गिरोह की कमर तोड़े और इन्हें सलाखों के पीछे भेजकर कड़ा संदेश दे।

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