‘जेल’ की हवा भी खा रहे, ‘वेतन’ का मजा भी ले रहे मुजरिम: प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा खुलासा

अजीत मिश्रा (खोजी)
‘जेल’ की हवा खा रहे मुजरिम पर प्रधानाचार्य की मेहरबानी, वेतन का मजा भी जारी!
- खैर इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज, बस्ती में धारा 376 में 10 साल की सजा काट रहे अनुचर को बचाने का गंभीर आरोप
- डीआईओएस संजय सिंह ने प्रधानाचार्य फैज आलम अंसारी को थमाया कड़ा नोटिस, 6 बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण
- निलंबन के 9 महीने बाद भी अनुमोदन न कराने और वेतन भुगतान के मामले में मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
बस्ती जिले के खैर इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है. यहाँ एक तरफ संगीन जुर्म में सजा काट रहा मुजरिम सलाखों के पीछे है, तो दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन की मेहरबानी से उसे बचाने के पूरे इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
खैरा इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में अनुचर के पद पर तैनात मोहम्मद सलीम को 27 अक्टूबर 2025 को अदालत ने धारा 376 (रेप) समेत अन्य संगीन धाराओं में दोषी करार देते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और वह वर्तमान में बस्ती जिला जेल में निरुद्ध है।
नियमानुसार, किसी भी सरकारी या सहायता प्राप्त संस्था के कर्मचारी को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने पर तत्काल सेवा समाप्त (बर्खास्त) किया जाना अनिवार्य है। आरोप है कि कॉलेज के प्रधानाचार्य फैज आलम अंसारी ने तुरंत बर्खास्तगी करने के बजाय तथ्यों को छुपाया और आरोपी को बचाने के लिए मामले में घोर लापरवाही बरती।
लापरवाही और लीपापोती की इंतहा
- सजा की जानकारी होने के बावजूद 14 दिन की देरी से 11 नवंबर 2025 को निलंबन आदेश जारी किया गया।
- निलंबन के लगभग 9 महीने बीत जाने के बाद भी डीआईओएस कार्यालय से निलंबन का अनुमोदन नहीं कराया गया।
- सेवा समाप्ति की पत्रावली और प्रस्ताव विभागीय नियमानुसार समय पर उपलब्ध कराने के बजाय मामले को जानबूझकर लटकाए रखा गया।
- डीआईओएस की सख्ती और मुख्यमंत्री दरबार में गुहार
मामले का संज्ञान लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक
(डीआईओएस) बस्ती, संजय सिंह ने 22 अगस्त 2026 को स्मरण पत्र (पत्रांक 4938-42) जारी करते हुए प्रधानाचार्य फैज आलम अंसारी से 6 मुख्य बिंदुओं पर तत्काल साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है. डीआईओएस ने चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो यह माना जाएगा कि प्रधानाचार्य द्वारा जानबूझकर मामले में विलंब किया जा रहा था, और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मड़वानगर बस्ती निवासी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने इस पूरे फर्जीवाड़े और मिलीभगत की शिकायत सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानाचार्य ने सजायाफ्ता अनुचर से दुर्विसंथि (साठगांठ) कर विभाग को पूरी तरह अंधेरे में रखा. शिकायतकर्ता ने यह सवाल भी उठाया है कि निलंबन अवधि के दौरान आरोपी को जीवन निर्वाह भत्ता या वेतन किस आधार पर दिया गया और इसमें क्या वित्तीय लाभ लिया गया, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. साथ ही, दोषी प्रधानाचार्य के खिलाफ सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की माँग की गई है।
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