बड़ी खबर | नकली दवा कारोबार पर FSDA का बड़ा शिकंजा, सहारनपुर से लखनऊ तक फैले नेटवर्क का खुलासा


**लखनऊ में एजाज से पूछताछ के बाद सामने आया सहारनपुर कनेक्शन! नागल में मकान के तहखाने से नकली दवाओं की पैकिंग का कथित ठिकाना मिला, मशीनरी से लेकर हजारों प्रिंटेड कार्टन और दवा स्ट्रिप्स बरामद**
### **लखनऊ/सहारनपुर।** उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ **FSDA (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन)** की कार्रवाई ने एक बड़े नेटवर्क की ओर जांच को मोड़ दिया है। लखनऊ में दवाओं की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले की जांच के दौरान **एजाज से पूछताछ** में सामने आए कनेक्शन के आधार पर जांच टीम की कार्रवाई सहारनपुर तक पहुंची, जहां **नागल क्षेत्र में एक मकान के तहखाने से कथित तौर पर नकली दवाओं की पैकिंग से जुड़ी मशीनरी, दवा स्ट्रिप्स, प्रिंटेड कार्टन, एल्युमिनियम फॉयल और बड़ी मात्रा में गोलियां बरामद** किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान **स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो तथा डाई-पंच** जैसी पैकिंग/प्रिंटिंग से जुड़ी सामग्री भी मिलने की बात कही गई है। जांच टीम के अनुसार मौके से करीब **32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स**, **973 प्रिंटेड कार्टन**, अतिरिक्त **472 प्रिंटेड कार्टन**, करीब **6.95 किलो पीली गोलियां और 4.9 किलो सफेद गोलियां** बरामद की गईं। इसके अलावा **प्रिंटेड और सादा एल्युमिनियम फॉयल** भी जब्त किए जाने की जानकारी है। इतनी बड़ी मात्रा में दवा पैकिंग से संबंधित सामग्री मिलने के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित तौर पर तैयार या पैक की जा रही दवाएं किन बाजारों में भेजी जानी थीं, इनके पीछे कौन लोग हैं और इस पूरे नेटवर्क का संचालन कहां-कहां से किया जा रहा था।
## 🔴 **लखनऊ से खुला सहारनपुर कनेक्शन**
बताया जा रहा है कि मामले की शुरुआत लखनऊ में दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित जांच से हुई। यहां **एजाज से पूछताछ** के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच की कड़ियां सहारनपुर के नागल क्षेत्र तक पहुंचीं। इसके बाद टीम ने संबंधित स्थान पर कार्रवाई की, जहां मकान के **तहखाने में दवा पैकिंग से जुड़ी गतिविधियों के संकेत** मिलने की बात सामने आई।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि लखनऊ और सहारनपुर में सामने आए दोनों मामलों के बीच किस स्तर का कनेक्शन है और क्या यह किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
## 🏭 **तहखाने में मिली पैकिंग मशीनरी ने बढ़ाई चिंता**
सहारनपुर के नागल में जिस मकान पर कार्रवाई की गई, वहां तहखाने से **स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो और डाई-पंच** समेत अन्य सामग्री बरामद होने की बात कही गई है। दवाओं की स्ट्रिप और पैकिंग से संबंधित इस तरह की सामग्री की मौजूदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया है।
अब जांच का अहम हिस्सा यह होगा कि बरामद मशीनरी का इस्तेमाल किन दवाओं की पैकिंग में किया जाता था और क्या इनके जरिए किसी वास्तविक दवा कंपनी के नाम, बैच नंबर अथवा अन्य विवरण की नकल की जा रही थी।
## 💊 **दवा स्ट्रिप्स और हजारों कार्टन बरामद**
कार्रवाई में **32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स** के अलावा बड़ी संख्या में प्रिंटेड कार्टन बरामद किए जाने की जानकारी है। बताया गया है कि मौके से **973 प्रिंटेड कार्टन और 472 अन्य प्रिंटेड कार्टन** मिले हैं। इसके साथ ही प्रिंटेड और सादा एल्युमिनियम फॉयल भी बरामद हुआ।
जांच एजेंसियां अब इन पैकिंग सामग्रियों का मिलान उन दवाओं और ब्रांडों से कर सकती हैं जिनके नाम या पैकेजिंग इन पर अंकित हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित तौर पर किन दवाओं की पैकिंग तैयार की जा रही थी।
## 🟡⚪ **पीली और सफेद गोलियों की बड़ी खेप भी मिली**
तलाशी के दौरान करीब **6.95 किलो पीली गोलियां और 4.9 किलो सफेद गोलियां** मिलने की बात सामने आई है। इन गोलियों की वास्तविक प्रकृति और उनमें मौजूद औषधीय तत्वों की पुष्टि अभी परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। इसी वजह से बरामद सामग्री को लेकर अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।
FSDA की टीम ने **चार दवाओं के नमूने परीक्षण के लिए भेजे हैं।** अब लैब रिपोर्ट यह स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाएगी कि नमूनों में निर्धारित औषधीय तत्व मौजूद हैं या नहीं और क्या उनमें गुणवत्ता, संरचना अथवा लेबलिंग से संबंधित कोई गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है।
## 📦 **प्रिंटेड और सादा फॉयल भी जांच के दायरे में**
मौके से प्रिंटेड और सादा **एल्युमिनियम फॉयल** मिलने की बात भी सामने आई है। दवा स्ट्रिप तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली इस सामग्री को भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि फॉयल पर किस प्रकार की छपाई की जानी थी और वह किन दवाओं की पैकेजिंग से संबंधित था।
## 🧾 **लखनऊ में खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की भी पड़ताल**
जांच केवल सहारनपुर में बरामद सामग्री तक सीमित नहीं है। लखनऊ में दवाओं की **खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, इनवॉइस और लेजर** की भी पड़ताल किए जाने की जानकारी है। इन दस्तावेजों के जरिए जांच एजेंसियां कथित सप्लाई चेन को ट्रेस करने का प्रयास कर रही हैं।
किससे दवा खरीदी गई, किसे बेची गई, किस कंपनी या सप्लायर से माल आया, किन दुकानों या स्थानों तक पहुंचा और भुगतान किस माध्यम से हुआ—इन तमाम सवालों के जवाब रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकते हैं।
## 🚨 **लखनऊ और सहारनपुर—दोनों मामलों में FIR**
मामले में **लखनऊ और सहारनपुर से जुड़े प्रकरणों में FIR दर्ज** किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां दोनों मामलों को जोड़कर कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाश रही हैं।
जांच का दायरा केवल मौके से बरामद सामान तक नहीं, बल्कि उसके **स्रोत, सप्लाई चैन, पैकिंग, वितरण और बिक्री** तक बढ़ सकता है।
## 🔍 **अब इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसी**
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नागल के मकान के तहखाने में इतनी बड़ी मात्रा में दवा पैकिंग सामग्री आखिर किस उद्देश्य से रखी गई थी? **क्या यहां दवाओं की अवैध पैकिंग की जा रही थी? क्या किसी वास्तविक फार्मा कंपनी के नाम या पैकेजिंग की नकल की जा रही थी? बरामद गोलियां कौन सी हैं? उनका निर्माण किसने किया? प्रिंटेड कार्टन और फॉयल कहां से आए? लखनऊ में सामने आए एजाज के कथित कनेक्शन का नागल से क्या संबंध है? दवाओं की सप्लाई किन शहरों और राज्यों तक पहुंचाई जा रही थी? और इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं?**
इन सवालों के जवाब **FSDA की जांच, दस्तावेजों की पड़ताल, पूछताछ और लैब रिपोर्ट** के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
## ⚠️ **लैब रिपोर्ट होगी जांच का अहम आधार**
बरामद चार दवाओं के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जाने के बाद अब रिपोर्ट का इंतजार है। किसी दवा को नकली, मिलावटी या मानक के विपरीत घोषित करने के लिए संबंधित परीक्षण और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसलिए फिलहाल बरामद सामग्री और जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर **अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही** सामने आएगा।
### 🔥 **सहारनपुर से लखनऊ तक जांच का दायरा बढ़ा**
नकली दवा कारोबार के खिलाफ FSDA की यह कार्रवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें **लखनऊ की खरीद-बिक्री से लेकर सहारनपुर के नागल में कथित पैकिंग ठिकाने तक की कड़ियां** सामने आने की बात कही गई है। एक तरफ लखनऊ में इनवॉइस और लेजर की जांच हो रही है, तो दूसरी तरफ सहारनपुर में बरामद मशीनरी, दवा स्ट्रिप्स, गोलियां, कार्टन और फॉयल की पड़ताल की जा रही है। अब जांच एजेंसियों की कोशिश पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन तक पहुंचने और यह पता लगाने की होगी कि यदि अवैध दवा निर्माण या पैकिंग हुई है तो उसका बाजार कहां तक फैला था।
**FSDA की कार्रवाई में आगे की जांच जारी है और बरामद दवाओं की वास्तविक स्थिति परीक्षण रिपोर्ट तथा जांच के अन्य निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।**
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📰 VANDE BHARAT LIVE TV NEWS
✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
📰 संपादक: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📍 सहारनपुर
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