बस्ती: पुलिस की नाक के नीचे बड़ेवन चौकी क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहा ऑनलाइन जुए का काला कारोबार!

अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी की सुस्ती या सांठगांठ? बस्ती के बड़ेवन क्षेत्र में बेखौफ चल रहा ऑनलाइन जुए का काला कारोबार
- मोबाइल पर सट्टा और पैसों का खेल: ब्लॉक रोड मोड़ के पास बिल्डिंग मैटेरियल दुकान के बगल में खुलेआम चल रहा अवैध धंधा।
- खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: जुए के खेल की पूरी जानकारी होने के बावजूद चौकी प्रभारी द्वारा कार्रवाई न करने से मिल रहा संरक्षण का संदेश!
- मास्टरमाइंड अशोक गुप्ता और सूरज गुप्ता की चर्चा: ऑनलाइन जुए के इस नेटवर्क में बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश।
- बर्बादी के कगार पर युवा पीढ़ी: शॉर्टकट पैसे कमाने के चक्कर में दांव पर लग रहा युवाओं का भविष्य, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के बड़ेवन चौकी क्षेत्र में इन दिनों ऑनलाइन जुए का अवैध और संगठित कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानीय पुलिस की आँखें इस पर पूरी तरह से बंद हैं।
ब्लॉक रोड के पास चल रहा सट्टे का खेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्लॉक रोड मोड़ से ठीक पहले एक बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान के बगल में यह काला कारोबार संचालित हो रहा है।यहाँ बाकायदा मोबाइल फोन के जरिए नंबर लगाकर हार-जीत का बड़ा दांव खेला जा रहा है। जुए के इस खेल में पैसों का भारी लेनदेन हो रहा है, जिससे सटोरियों के हौसले बुलंद हैं।
चर्चा यह भी है कि इस पूरे नेटवर्क के संचालन में अशोक गुप्ता को कथित मास्टरमाइंड के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नंबर लगवाने और इस गंदे धंधे को गति देने में सूरज गुप्ता की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस अवैध गतिविधि की चर्चा पूरे इलाके में आम है और इसकी भनक पुलिस तक पहुँच चुकी है, तब भी चौकी क्षेत्र की पुलिस गहरी नींद में क्यों सोई है?
स्थानीय स्तर पर चौकी प्रभारी की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों में यह चर्चा आम है कि बिना किसी अंदरूनी सह या संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार खुलेआम चलाया जाना नामुमकिन है। क्या खाकी की खामोशी इस जुए के खेल को मौन समर्थन दे रही है?
बर्बादी के कगार पर युवा पीढ़ी
ऑनलाइन जुए के इस दलदल में युवा पीढ़ी तेजी से धकेली जा रही है। शॉर्टकट तरीके से पैसे कमाने की चाहत में युवा अपना और अपने परिवार का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होना व्यवस्था पर एक बड़ा कलंक है।
यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो इस नेटवर्क से जुड़े संचालक से लेकर संरक्षण देने वाले कई बड़े चेहरों के राज खुल सकते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस काले कारोबार पर शिकंजा कसते हैं या फिर इसी तरह युवाओं का भविष्य दांव पर लगता रहेगा?
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