विक्रमजोत में ‘खाकी’ की शह पर मौत का व्यापार: मौर्य की बिल्डिंग में धड़ल्ले से दहक रही कच्ची शराब की भट्टियां!

बस्ती का ‘विक्रमजोत’: कानून के पहरेदारों की नाक के नीचे पनप रहा कच्ची शराब का जहरीला ‘कुटीर उद्योग’
- कानून के रक्षक बने भक्षक? शंकरपुर के पास मौर्य की दुकान से धधक रही कच्ची शराब की आग, आबकारी विभाग नदारद!
- बस्ती का ‘विक्रमजोत’ बना अवैध शराब का गढ़: जब खाकी ही बन जाए संरक्षणदाता, तो कौन रोकेगा यह कारोबार?
- छापेमारी महज दिखावा, धंधा जारी: माझा क्षेत्र में ‘कुटीर उद्योग’ की तरह फल-फूल रहा है कच्ची शराब का काला कारोबार!
विक्रमजोत, बस्ती: जनपद के विक्रमजोत चौकी क्षेत्र में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि अवैध कच्ची शराब माफियाओं का समानांतर साम्राज्य चल रहा है। यहाँ कानून के रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं, जिसकी बदौलत क्षेत्र में कच्ची शराब की भट्टियां धड़ल्ले से दहक रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कच्ची शराब की भट्टी की तस्वीरों ने प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें वे अपराध मुक्त क्षेत्र का ढोंग रचते हैं।

‘खाकी’ की मिलीभगत से फला-फूला अवैध कारोबार
सूत्रों की मानें तो विक्रमजोत चौकी के अंतर्गत संचालित यह अवैध कारोबार स्थानीय चौकी इंचार्ज की सरपरस्ती में फल-फूल रहा है। शंकरपुर गाँव के पास स्थित मौर्य की बिल्डिंग की एक दुकान में चल रही इन दर्जनों भट्टियों पर पुलिस की मेहरबानी का आलम यह है कि धुआं तो उठता है, लेकिन कानून की आंखें धुएं के उस पार नहीं देख पातीं। क्या यह संभव है कि चौकी इंचार्ज की नाक के नीचे दर्जनों भट्टियां दहकती रहें और उन्हें भनक तक न लगे? यह सवाल अब जनता की जुबान पर है कि आखिर किसके इशारे पर यह ‘मौत का खेल’ जारी है।
आबकारी विभाग की ‘छापेमारी’ सिर्फ एक औपचारिकता
जिले का आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय केवल ‘कोरम पूरा’ करने में व्यस्त है। विभाग की छापेमारी सिर्फ कागजी खानापूर्ति और दिखावा बनकर रह गई है। माफियाओं को पता है कि कब, कहाँ और कितनी छापेमारी होगी, जिससे वे सुरक्षित निकल जाते हैं। इस मिलीभगत ने माझा क्षेत्र में कच्ची शराब के धंधे को एक संगठित ‘कुटीर उद्योग’ का रूप दे दिया है।
प्रशासन की चुप्पी, कब जागेगी सरकार?
मौर्य की बिल्डिंग में बेखौफ चल रही ये भट्टियां न केवल कानून का मज़ाक उड़ा रही हैं, बल्कि आसपास के गांवों के युवाओं और मजदूरों के भविष्य को भी जहरीला बना रही हैं। कच्ची शराब का यह जहर किसी भी दिन बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकता है।
क्या बस्ती पुलिस के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे? या फिर ‘साहब’ की शह पर यह अवैध कारोबार इसी तरह फलता-फूलता रहेगा? जनता अब जवाब और कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही है, इससे पहले कि कोई बड़ी अनहोनी हो जाए।
डिस्क्लेलेमर:: यह लेख स्थानीय नागरिकों में व्याप्त आक्रोश और वायरल तस्वीरों के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासन को इस पर अविलंब कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







