बस्ती में माफियाराज: माझा खुर्द में दिवाकर सोनकर की ‘सल्तनत’, प्रशासन बना मूकदर्शक

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: माझा खुर्द में खनन माफिया दिवाकर सोनकर की ‘सल्तनत’, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
- सरकारी खजाने को चूना, पर्यावरण को खतरा: खनन माफिया दिवाकर सोनकर को किसका संरक्षण?
- कलवारी का ‘बालू माफिया’ बेखौफ, पुलिस और प्रशासन को खुलेआम चुनौती!
बस्ती: जनपद के कलवारी थाना क्षेत्र अंतर्गत माझा खुर्द गाँव इन दिनों खनन माफियाओं की अवैध गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। बालू माफिया दिवाकर सोनकर के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह दिन-रात प्रतिबंधित मशीनों का उपयोग कर खुलेआम अवैध खनन का ‘काला खेल’ खेल रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध कारोबार ने न केवल सरकारी राजस्व को लाखों की चपत लगाई है, बल्कि पर्यावरण और ग्रामीणों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
नियम-कानून ताक पर, गरज रही पोकलैंड और लोडर
माझा खुर्द क्षेत्र में व्याप्त अराजकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ दिन के उजाले और रात के अंधेरे में भी धड़ल्ले से पोकलैंड, लोडर और लिफ्टर जैसी भारी मशीनें गरज रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही दर्जनों ओवरलोड डंपर और सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों का काफिला सड़कों पर दौड़ने लगता है। पर्यावरण नियमों और सरकारी प्रतिबंधों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
प्रशासन की मौन स्वीकृति या माफिया का रसूख?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में दिवाकर सोनकर बेखौफ होकर इस अवैध साम्राज्य को चला रहा है? लगातार मिल रही शिकायतों और क्षेत्र में हो रहे भारी नुकसान के बावजूद खनन विभाग और स्थानीय पुलिस की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासन माफिया के आगे बेबस है, या जिम्मेदारों की ‘मूक सहमति’ से ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
खतरे में पर्यावरण और ग्रामीण जनजीवन
अवैध खनन का यह खेल केवल सरकारी खजाने को खाली नहीं कर रहा, बल्कि प्रकृति का सीना भी छलनी कर रहा है। अंधाधुंध खनन से खेतों का कटाव हो रहा है और ग्रामीण रास्तों को भारी क्षति पहुँच रही है। भविष्य में इससे बाढ़ और भू-स्खलन जैसी आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है, जिसके लिए सीधे तौर पर खनन माफिया जिम्मेदार हैं।
कार्रवाई की उठी मांग
कलवारी थाना क्षेत्र में दिवाकर सोनकर के इस अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जनता अब यह देखने को उत्सुक है कि क्या जिला प्रशासन अवैध खनन पर प्रभावी लगाम लगा पाएगा, या फिर फाइलों में दर्ज होने वाली यह शिकायतें हमेशा की तरह रद्दी की टोकरी में डाल दी जाएंगी? क्या माझा खुर्द को खनन माफिया के चंगुल से मुक्ति मिलेगी, या यह काला खेल इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगा?
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