सिद्धार्थनगर में नशा तस्करी का ‘महा-खेल’: 85 लाख का गांजा बरामद, दो तस्कर पुलिस को चकमा देकर फरार

अजीत मिश्रा (खोजी)
सिद्धार्थनगर में नशा तस्करी का बड़ा खेल: 85 लाख के गांजे के साथ तस्कर गिरफ्तार, पुलिस की गिरफ्त से भागे दो ‘मोहरे’
- पुलिस की ‘ढीली’ घेराबंदी का फायदा उठा भागे दो तस्कर, 85 लाख का गांजा जब्त; क्या यही है सुरक्षा का सच?
- सिद्धार्थनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 85 लाख का गांजा बरामद, लेकिन हाथ नहीं आए नोएडा के ‘नशा तस्कर’
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर सक्रिय मादक पदार्थों के तस्करों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा सिद्धार्थनगर में हुई ताजा कार्रवाई से लगाया जा सकता है। शिवनगर डिडई थाना क्षेत्र में पुलिस ने 85 लाख रुपये कीमत का 162 किलोग्राम गांजा बरामद कर एक बड़ी सफलता तो हासिल की है, लेकिन दो तस्करों का पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।
एनएच-28 बना तस्करी का ‘सेफ कॉरिडोर’?
यह घटना 23 जून की शाम को बैलगाड़िया टोल प्लाजा के पास हुई। शिवनगर डिडई पुलिस जब वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी, तभी एक वाहन में लादा गया अवैध गांजे का जखीरा पकड़ा गया। सवाल यह है कि इतनी भारी मात्रा में मादक पदार्थ आखिर किन-किन जिलों की सीमाएं पार कर यहाँ तक पहुँचा? क्या तस्करों ने एनएच-28 को तस्करी के लिए सुरक्षित गलियारा (सेफ कॉरिडोर) मान लिया है?
फर्रुखाबाद से नोएडा तक फैली तस्करी की जड़ें
पुलिस की गिरफ्त में आया तस्कर श्याम उर्फ श्यामू दीक्षित फर्रुखाबाद का रहने वाला है। वहीं, फरार हुए दो आरोपी पिंटू चौरसिया और सूर्य प्रकाश नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) के निवासी बताए जा रहे हैं। गांजे की इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में नशे का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी जड़ें पश्चिमी यूपी से लेकर नेपाल सीमा तक फैली हुई हैं।
पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान
पुलिस ने एक तस्कर को तो दबोच लिया, लेकिन दो मुख्य आरोपियों का मौके से फरार हो जाना पुलिस की घेराबंदी में बड़ी खामी को दर्शाता है। क्या पुलिस की मौजूदगी के बावजूद तस्कर भागने में सफल रहे, या उनकी तैयारियों में कोई चूक थी? फरार आरोपियों की पहचान होने के बाद अब पुलिस टीमें उनके पीछे भाग रही हैं, लेकिन जनता का सवाल है कि इस नशे के नेटवर्क का ‘मास्टरमाइंड’ कौन है और वह कब तक सलाखों के पीछे होगा?
नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी
सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक जहर है जो क्षेत्र की युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। 85 लाख रुपये का यह गांजा सिर्फ एक खेप है, लेकिन ऐसे कितने और जखीरे रोज पुलिस की नजरों से बचकर निकल जाते होंगे?
फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या सिद्धार्थनगर पुलिस फरार तस्करों को जल्द गिरफ्तार कर इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर पाती है, या फिर यह मामला भी चंद दिनों बाद फाइलों में दब जाएगा।
आप इस घटनाक्रम को किस तरह देखते हैं? क्या आपको लगता है कि सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को अपनी चेकिंग व्यवस्था और अधिक सख्त करने की जरूरत है?
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