श्रावण मास की अमावस्या तीथि को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है

।। सोमवार 10 अगस्त 2026 ।।
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, नागपुर/महाराष्ट्र—: हमारे सनातन धर्म संस्कृति में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बतलाया गया है। अमावस्या तिथी पर दान धर्म, पितृ तर्पण, भगवत स्मरण, आदि के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। श्रावण मास भगवान आशुतोष शिव शंकर को समर्पित होने के कारण हरीयाली अमावस्या पर शिव आराधना का विशेष महत्व हो जाता है। हिंदू धर्म में श्रावण मास को बहुत ही महत्त्वपूर्ण मास माना जाता है। श्रावण मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। हरियाली अमावस्या को प्रकृति पितरों और भगवान शिव जी से जुड़ा हुआ माना जाता है। बारिश के कारण इस माह में वातावरण चारों तरफ खुशनुमा सुंदर लगने लगती है, जिससे अमावस्या तिथि का संबंध प्रकृति, हरीयाली से जोड़कर भी देखा जाता है। हमारे हिंदू धर्म के अनुसार पेड़ पौधों में भी देवी देवताओं का वास माना गया है, और इसी कारण इस दिन वृक्षारोपण, वृक्षों का संरक्षण सेवा , पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्यों को शुभदायक माना जाता है। हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव जी की पूजा अर्चना, शिवलिंग का जलाभिषेक आदि करने का विशेष महत्व रहता है। हरियाली अमावस्या का प्रकृति और कृषि को समर्पित है, इस दिन कृषक बंधु अपने कृषि संबंधी उपकरणों ,हल आदि की पूजा करतें है,और अच्छे मानसून, अच्छी फसल होने की कामना किया करतें है। हरियाली अमावस्या पर बरगद,नीम, आंवला, पीपल, तुलसी आदि जीवनदायक पौधों को लगाने की परंपरा भी रही है, । इस दिन कृषक बंधु नई फसल गुड़ धानी आदि का बना हुआ प्रसाद बांटकर आपस में एक दूसरे को सुख समृद्धि की बधाईयां देते हैं। भारत में कई जगहों पर इसे आषाढ़ी अमावस्या के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों, जलाशयों में स्नान करके भगवान शिव जी का पूजन अर्चन करना , पितृ तर्पण, और जरूरतमंद लोगों को दान आदि देना शुभ फलदायक होता है। इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर भगवान शिव जी की पूजा आराधना, शिवलिंग पर जलाभिषेक करना उत्तम होता है। यदि संभव हो तो इस दिन किसी पौधे का रोपण करते हुए पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। श्रावण मास में बारिश के चलते चारों तरफ हरीयाली और सुंदर सुहावना मौसम रहता है, ऐसे समय में प्रकृति, भगवान और अयने पितृजनों के प्रति आभार प्रकट करने का संदेश भी मिलता है। हरीयाली अमावस्या का यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है ।।
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