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मुफ्त के पौधे खोलेंगे समृद्धि की राह: सोनहत में नीलगिरी क्लोन से चमकेगी किसानों की किस्मत

11 Aug 2026, 06:17 PM • Vande Bharat Live TV News
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वन विभाग की अनूठी पहल से निजी भूमि पर हरियाली के साथ तैयार होगा किसानों की अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया; 50 से 5000 तक पौधों का निशुल्क वितरण

 

विशेष संवाददाता -ऐसानुल हक़ अंसारी 

 

कोरिया। वनांचल सोनहत में अब खाली और अनुपयोगी पड़ी निजी जमीन किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बन सकती है। वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष पौधरोपण अभियान के तहत किसानों और ग्रामीणों को उन्नत किस्म के नीलगिरी (यूकेलिप्टस) क्लोन पौधे पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मानसून के अनुकूल मौसम में शुरू हुई यह पहल यदि व्यवस्थित तरीके से बड़े पैमाने पर अपनाई जाती है तो आने वाले वर्षों में किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने के साथ क्षेत्र में औद्योगिक कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने में भी मददगार हो सकती है।

 

नीलगिरी तेजी से बढ़ने वाली वृक्ष प्रजातियों में शामिल है। इसकी लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से पल्प एवं पेपर उद्योग, पैकेजिंग, प्लाईवुड/पैनल तथा कुछ अन्य औद्योगिक उपयोगों में किया जाता है। यही वजह है कि कृषि योग्य भूमि के अतिरिक्त ऐसी निजी भूमि, जहां अन्य लाभकारी फसलें लेना कठिन है, वहां नियोजित वृक्षारोपण किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का विकल्प बन सकता है।

 

*50 से लेकर 5000 पौधों तक निशुल्क वितरण*

 

वन विभाग की इस योजना के तहत एक आवेदनकर्ता को उसकी उपलब्ध निजी भूमि के अनुसार 50 से लेकर 5000 तक नीलगिरी क्लोन पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिन किसानों ने पूर्व में आवेदन किया है, उनके खेतों और भूमि का सत्यापन कर पौधों का वितरण प्रारंभ किया जा चुका है।

 

वन परिक्षेत्राधिकारी सोनहत श्री राठिया के मार्गदर्शन में विभागीय अमला आवेदकों की भूमि का सत्यापन कर पौध वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। इससे योजना में पात्र किसानों तक पौधे पहुंचाने और वास्तविक भूमि के आधार पर पौधरोपण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को प्रारंभिक चरण में पौध खरीदने पर होने वाला खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। हालांकि रोपण, भूमि की तैयारी, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, सुरक्षा और कटाई-परिवहन जैसे खर्च किसान की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

 

*5-6 साल में तैयार हो सकता है व्यावसायिक वृक्ष*

 

नीलगिरी की खासियत इसकी तेज वृद्धि है। उपयुक्त जलवायु, मिट्टी, क्लोन की गुणवत्ता और प्रबंधन के आधार पर कई व्यावसायिक नीलगिरी रोपण अपेक्षाकृत कम अवधि में कटाई योग्य आकार तक पहुंच सकते हैं। सामान्य परिस्थितियों में लगभग 4 से 6 वर्ष का चक्र कई व्यावसायिक प्लांटेशन में देखा जाता है, हालांकि वास्तविक अवधि भूमि, किस्म, वर्षा, सिंचाई और प्रबंधन पर निर्भर करती है।

यानी आज लगाया गया पौधा किसान के लिए तत्काल आय का माध्यम नहीं, बल्कि अगले कुछ वर्षों के लिए ‘ग्रीन एसेट’ यानी हरित संपत्ति के रूप में तैयार हो सकता है।

 

*पेपर मिलों में मांग से किसानों को बाजार की संभावना*

 

नीलगिरी की लकड़ी का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक उपयोग पल्प और पेपर निर्माण में होता है। इसकी अपेक्षाकृत सीधी और तेजी से बढ़ने वाली लकड़ी होने के कारण पल्पवुड के रूप में इसकी उपयोगिता है।

 

क्षेत्र में यदि बड़े पैमाने पर नीलगिरी का उत्पादन बढ़ता है तो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औद्योगिक कच्चे माल की मात्रा बढ़ सकती है। इससे किसानों को भविष्य में स्थानीय व्यापारियों, लकड़ी खरीदारों अथवा औद्योगिक खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

 

हालांकि लकड़ी की वास्तविक कीमत एक निश्चित दर नहीं होती। बाजार भाव प्रजाति, व्यास, गुणवत्ता, मात्रा, परिवहन दूरी और खरीदार के अनुसार बदल सकता है। इसलिए किसानों को पौधरोपण से पहले संभावित खरीद केंद्र, परिवहन लागत और उस समय के बाजार भाव की जानकारी लेना जरूरी होगा।

 

*एक पौधा नहीं, आने वाले वर्षों की ‘हरित पूंजी’*

 

नीलगिरी प्लांटेशन को किसान पारंपरिक वार्षिक फसल की तरह नहीं, बल्कि मध्यम अवधि के निवेश के रूप में देख सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी किसान को भूमि की क्षमता के अनुसार 1000 पौधे मिलते हैं और उनमें से अधिकांश पौधे सफलतापूर्वक विकसित होते हैं, तो कुछ वर्षों बाद उसके पास एक साथ बड़ी मात्रा में लकड़ी का उत्पादन तैयार हो सकता है।

 

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—5000 पौधे मिलने का अर्थ 5000 पेड़ों से निश्चित आय होना नहीं है। पौधों की जीवित रहने की दर, पौधों के बीच दूरी, भूमि की उर्वरता, पानी की उपलब्धता, रोग-कीट नियंत्रण, रखरखाव और कटाई के समय मिलने वाला बाजार भाव अंतिम आमदनी तय करेंगे।

 

इसीलिए वैज्ञानिक तरीके से पौधरोपण और नियमित देखभाल इस योजना की सफलता की कुंजी है।

 

*नीलगिरी के प्रमुख फायदे*

 

1. तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति

 

नीलगिरी की कई व्यावसायिक किस्में तेजी से बढ़ती हैं, जिसके कारण अपेक्षाकृत कम अवधि में लकड़ी का उत्पादन लिया जा सकता है।

 

2. औद्योगिक मांग

 

पल्प एवं पेपर उद्योग में नीलगिरी की लकड़ी का व्यापक उपयोग होता है। इससे इसके लिए औद्योगिक बाजार उपलब्ध रहता है।

 

3. निजी भूमि का बेहतर उपयोग

 

ऐसी भूमि जहां नियमित कृषि करना कठिन है, वहां उपयुक्त परिस्थितियों में वृक्षारोपण अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।

 

4. शुरुआती पौध लागत में राहत

 

वन विभाग द्वारा पौधे निशुल्क उपलब्ध कराए जाने से किसानों के लिए पौध खरीदने का प्रारंभिक खर्च कम हो जाता है।

 

5. भविष्य के लिए एकमुश्त आय

 

कटाई के समय तैयार लकड़ी को एक साथ बेचने से किसान को अपेक्षाकृत बड़ी राशि प्राप्त हो सकती है। हालांकि वास्तविक लाभ उत्पादन और बाजार भाव पर निर्भर करेगा।

 

6. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति

 

बड़े पैमाने पर प्लांटेशन होने पर पौधरोपण, देखभाल, कटाई, लोडिंग और परिवहन जैसी गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।

 

7. हरित क्षेत्र में वृद्धि

 

निजी भूमि पर वृक्षों की संख्या बढ़ने से क्षेत्र का कुल वृक्षावरण बढ़ सकता है और परिदृश्य अधिक हरित हो सकता है।

 

*पर्यावरण के लिहाज से जरूरी है वैज्ञानिक प्रबंधन*

 

नीलगिरी के आर्थिक लाभों के साथ इसके पर्यावरणीय पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अलग-अलग परिस्थितियों में नीलगिरी के जल उपयोग, जैव विविधता और मिट्टी पर प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। इसलिए इसे प्राकृतिक जंगलों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उपयुक्त निजी भूमि पर योजनाबद्ध व्यावसायिक वृक्षारोपण के रूप में देखना अधिक उचित है।

विशेषज्ञों की दृष्टि से एक ही प्रजाति का अत्यधिक एकल रोपण करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और भूमि की प्रकृति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक वन क्षेत्रों, जलस्रोतों और जैव विविधता वाले संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक प्लांटेशन करने से पहले संबंधित विभागीय नियमों का पालन आवश्यक है।

 

*किसानों के लिए कमाई का गणित कैसे समझें?*

 

नीलगिरी प्लांटेशन से संभावित आय का मोटा आकलन केवल पौधों की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक सूत्र कुछ इस तरह समझा जा सकता है—

 

कुल संभावित आय = तैयार लकड़ी की मात्रा × उस समय का बाजार भाव

 

शुद्ध आय = कुल बिक्री राशि – भूमि तैयारी – रोपण – रखरखाव – सिंचाई – सुरक्षा – कटाई – परिवहन आदि खर्च

 

इसलिए किसानों को केवल ‘लाखों की कमाई’ के दावे पर निर्भर रहने के बजाय अपने क्षेत्र में उपलब्ध क्लोन, अपेक्षित उत्पादन, कटाई अवधि और स्थानीय बाजार दर के आधार पर गणना करनी चाहिए।

 

*आवेदन की प्रक्रिया बेहद सरल*

 

जो किसान अपनी निजी या खाली पड़ी भूमि पर नीलगिरी का प्लांटेशन करना चाहते हैं, वे संबंधित वन परिक्षेत्र कार्यालय अथवा वनमंडल कार्यालय से योजना की वर्तमान पात्रता एवं प्रक्रिया की जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं।

 

*आवेदन में सामान्यतः—*

 

आवेदक का नाम एवं पता

– निजी भूमि का क्षेत्रफल

– संबंधित खसरा नंबर

– भूमि से जुड़े आवश्यक दस्तावेज

– संपर्क संबंधी जानकारी

 

प्रदान करनी होगी। विभागीय सत्यापन और पात्रता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्धता एवं स्वीकृति के अनुसार पौधे दिए जा सकते हैं।

 

*सोनहत के किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?*

 

सोनहत जैसे वनांचल क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार अपनी आय के लिए कृषि, वनोपज और अन्य ग्रामीण गतिविधियों पर निर्भर हैं। ऐसे में निजी भूमि के एक हिस्से पर योजनाबद्ध व्यावसायिक वृक्षारोपण किसानों को एक अतिरिक्त और दीर्घकालिक आय का विकल्प दे सकता है।

 

यदि किसान समूह बनाकर बड़े पैमाने पर पौधरोपण करें और भविष्य में बिक्री के लिए सामूहिक विपणन व्यवस्था विकसित हो, तो परिवहन और खरीदारों तक पहुंच की समस्या भी कुछ हद तक कम की जा सकती है।

 

*आज पौधा, कल तैयार संपत्ति*

 

नीलगिरी का पौधा आज लगाने पर अगले कुछ वर्षों तक किसान को धैर्य, देखभाल और निवेश की जरूरत होगी। लेकिन सही भूमि, उपयुक्त क्लोन, वैज्ञानिक दूरी, नियमित रखरखाव और बेहतर बाजार संपर्क के साथ यही पौधे भविष्य में किसान की हरित पूंजी बन सकते हैं।

 

*वन विभाग की ओर से निशुल्क पौधे उपलब्ध कराने*

 

 की पहल* इस पूरी प्रक्रिया में किसानों की शुरुआती लागत को कम करती है। अब जरूरत है कि अधिक से अधिक पात्र किसान योजना की जानकारी लें, अपनी भूमि की उपयुक्तता समझें और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पौधरोपण करें।

सोनहत की खाली पड़ी जमीनों पर यदि योजनाबद्ध तरीके से हरियाली उगती है, तो आने वाले वर्षों में यह सिर्फ जंगल की हरियाली नहीं होगी—बल्कि किसानों के खेतों में खड़ी एक ऐसी ‘हरित पूंजी’ भी होगी, जो परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे सकती है।

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