जर्जर विद्यालय पर सियासत या हकीकत? विद्यालय को लेकर AAP ने किया था ट्वीट

हाथरस नगर क्षेत्र की गौशाला परिसर में संचालित कक्षा एक से आठ तक के सरकारी विद्यालय की जर्जर इमारत को लेकर इन दिनों राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस विद्यालय की जर्जर हालत की तस्वीर साझा करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा था। उनके ट्वीट का सार यह था कि सरकार सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने में नाकाम है, जबकि भाजपा कार्यालय बेहतर स्थिति में बनाए जा रहे हैं। लेकिन अब इस विद्यालय की मौजूदा तस्वीर कुछ अलग कहानी बयां कर रही है।
जानिए पूरा जानकारी
विद्यालय के इंचार्ज शिक्षक प्रदीप कुमार पाठक के मुताबिक, विद्यालय भवन काफी जर्जर हो चुका था। शिक्षा विभाग की प्रक्रिया के तहत पुराने भवन की नीलामी कराई गई है और अब जर्जर इमारत को तोड़ने का काम चल रहा है। इसके बाद इसी स्थान पर नए सिरे से विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाएगा। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें बराबर में स्थित दूसरे विद्यालय के कमरों में शिफ्ट कर दिया गया है। शिक्षक के अनुसार वहां बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी है। वहीं विद्यालय में कायाकल्प का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या केवल जर्जर भवन की तस्वीर दिखाकर सरकार की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करना उचित है? या फिर किसी निर्माणाधीन अथवा पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में चल रहे विद्यालय की पूरी स्थिति को सामने रखना भी जरूरी है?
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राजनीतिक दलों को सरकार की कमियों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनता के सामने तस्वीर का दूसरा पहलू भी आना चाहिए। यदि पुराना भवन वास्तव में जर्जर था, उसे हटाकर नया भवन बनाया जा रहा है और बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक व्यवस्था में जारी है, तो इसे भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी के ट्वीट को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसे उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने और राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं। फिलहाल असली तस्वीर यही है कि पुरानी जर्जर इमारत हटाई जा रही है, बच्चों की पढ़ाई जारी है और नए विद्यालय भवन के निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। ऐसे में मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि यह देखने का भी है कि नए भवन का निर्माण कब तक पूरा होता है और बच्चों को बेहतर सुविधाएं कब मिलती हैं।
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