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छात्र राजनीति की भट्टी से निकलकर राष्ट्रीय क्षितिज तक: बस्ती के हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर

31 Aug 2026, 04:34 PM • Vande Bharat Live TV News
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अजीत मिश्रा (खोजी)

छात्र राजनीति की भट्टी से निकलकर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक: हरीश चंद्र द्विवेदी का राजनीतिक सफर

तेलियाजोत के साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरीश द्विवेदी बने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री; असम और राजस्थान से लेकर राष्ट्रीय संगठन तक संभाल रहे हैं अहम जिम्मेदारियां

बस्ती/नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांगठनिक ढांचे में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल ने एक बार फिर अपनी मजबूत धमक दर्ज कराई है। बस्ती लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे हरीश चंद्र द्विवेदी को पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया है। छात्र राजनीति से अपने सफर की शुरुआत करने वाले हरीश द्विवेदी का यह राजनीतिक उत्थान सादगी, निरंतरता और सांगठनिक दक्षता की मिसाल माना जाता है।

​प्रारंभिक जीवन एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

​हरीश चंद्र द्विवेदी का जन्म 22 अक्टूबर 1973 (कुछ स्रोतों में 22 अक्टूबर 1971) को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र स्थित तेलियाजोत (कटया) गाँव के एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता स्व. साधु शरण दुबे किसान इंटर कॉलेज, बस्ती में शिक्षक थे, जबकि माता यशोदा देवी गृहणी थीं। वर्ष 2006 में उनका विवाह विनीता द्विवेदी से हुआ। उनके परिवार में एक पुत्र कुशाग्र और एक पुत्री अवंतिका हैं।

​उनकी शुरुआती शिक्षा किसान इंटर कॉलेज, बस्ती से हुई। इसके बाद उन्होंने एच.आर.पी.जी. कॉलेज खलीलाबाद से पढ़ाई पूरी करते हुए वर्ष 1998 में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. की डिग्री हासिल की।

​छात्र राजनीति और वैचारिक नीव: एबीवीपी से भाजयुमो तक

​हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर वैचारिक संगठनों के जरिए परवान चढ़ा। वर्ष 1991 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के संपर्क में आए और पूर्णकालिक रूप से संगठन से जुड़ गए। उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें एक के बाद aक कई बड़े दायित्व सौंपे गए:

  • 1993-1995: एबीवीपी बस्ती के जिला प्रमुख
  • 1994-1996: प्रदेश सहमंत्री
  • 1995-1998: गोरखपुर विभाग के संगठन मंत्री
  • 1998-2000: प्रयाग विभाग के संगठन मंत्री
  • 2000-2003: प्रयागराज और सुल्तानपुर विभाग के संगठन मंत्री

​वर्ष 2004 में उन्होंने भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा। सांगठनिक कौशल के चलते उन्हें तुरंत युवा मोर्चा (भाजयुमो) में बड़ी भूमिका मिली। वह 2005 से 2007 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सलाहकार और भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री रहे। इसके पश्चात, 2007 से 2010 तक भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष और 2010 से 2013 तक उत्तर प्रदेश भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला। इस कार्यकाल के दौरान उनकी सक्रियता “तिरंगा यात्रा” जैसे अभियानों में विशेष रूप से देखने को मिली।

​चुनावी राजनीति में उन्होंने वर्ष 2012 में बस्ती सदर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमाई, हालांकि इस चुनाव में उन्हें 32,121 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

​संसद में दो कार्यकाल और संसदीय समितियां

​विधानसभा चुनाव के अनुभव के बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा के रण में उतारा और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा:

  • 16वीं लोकसभा (2014): बस्ती लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिग्गज उम्मीदवार बृज किशोर सिंह “डिम्पल” को 33,562 वोटों के अंतर से पराजित किया।
  • 17वीं लोकसभा (2019): राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करते हुए उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने बसपा के मजबूत उम्मीदवार राम प्रसाद चौधरी को 30,354 वोटों (2.88%) के अंतर से हराया। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

​सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 16 मई 2014 से 4 जून 2024 तक रहा, जिसके बाद यह सीट राम प्रसाद चौधरी के पास चली गई। अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण समितियों में कार्य किया:

  • 2014-2019: ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति, कोयला मंत्रालय सलाहकार समिति, सूचना प्रौद्योगिकी समिति (2016-18) और वित्त समिति (2018-19) के सदस्य रहे।
  • 2019-2024: उन्हें लोकसभा की अत्यंत महत्वपूर्ण याचिका समिति (Committee on Petitions) का अध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही वह सड़क परिवहन मंत्रालय सलाहकार समिति और प्राक्कलन समिति के भी सदस्य रहे।

​राष्ट्रीय संगठन में विस्तार और महामंत्रित्व का दायित्व

​सांसदीय कार्यों के साथ-साथ हरीश द्विवेदी को केंद्रीय नेतृत्व ने लगातार राष्ट्रीय संगठन की बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी। वह भाजपा की राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय मंत्री और राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं तथा बिहार के सह-प्रभारी की भूमिका भी निभा चुके हैं।

​पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 26 जुलाई 2024 को उन्हें असम का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया। उनके प्रभार संभालने के बाद से राज्य में पार्टी की राजनीतिक स्थिति मजबूत बनी रही। इसके बाद उन्हें राजस्थान निकाय चुनाव का भी प्रभारी बनाया गया।

​संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और राज्यों में मिली सफलताओं का परिणाम यह रहा कि अगस्त 2026 में हुए बड़े संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर पदोन्नत किया। पार्टी की इस नई राष्ट्रीय टीम में विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे स्थापित चेहरों के साथ-साथ हरीश द्विवेदी, स्मृति ईरानी, बिप्लब देब और सतीश पूनिया जैसे प्रभावी नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री की नई कमान सौंपी गई है। बस्ती के एक साधारण शिक्षक के पुत्र से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तक का यह सफर पूर्वांचल की राजनीति में एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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