बस्ती: झोलाछाप ‘बंगाली डॉक्टर’ के गलत इंजेक्शन से 10 दिन के भीतर दूसरी मौत, 17 वर्षीय किशोर की गई जान.

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में मौत के सौदागर: स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती और झोलाछाप ‘बंगाली डॉक्टरों’ के शिकंजे में उजड़ रही हैं जिंदगियां
- न डिग्री, न पंजीकरण: ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल.
- रुधौली के नसीबगंज चौराहे पर दर्दनाक हादसा: इंजेक्शन लगते ही किशोर के मुंह से आया झाग, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत.
- सल्टौआ के बाद रुधौली में कहर: बिना वैध कागजातों के मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे फर्जी डॉक्टर, आरोपी फरार.
रूधौली।। बस्ती जिले के ग्रामीण इलाकों और चौराहों पर बिना किसी डिग्री और पंजीकरण के प्रैक्टिस करने वाले तथाकथित ‘बंगाली डॉक्टरों’ (झोलाछाप) का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब यह आम जनता के लिए मौत का परवाना बन गए हैं। जिले के रुधौली और साल्टौआ क्षेत्र में मात्र दस दिनों के भीतर ऐसी दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें गलत इलाज और इंजेक्शन के कारण दो बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णीय नींद अब तक नहीं टूटी है।
ताजा मामला रुधौली थाना क्षेत्र के नसीबगंज चौराहे का है, जहां एक किशोर प्रशांत उर्फ रवि (17) को पैर की फुंसी का इलाज कराना अपनी जिंदगी से हाथ धोने के बराबर साबित हुआ। शुक्रवार शाम जब वह एक झोलाछाप ‘बंगाली डॉक्टर’ के पास पहुंचा, तो तथाकथित चिकित्सक ने उसे बेधड़क इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही किशोर के मुंह से झाग आने लगा, उसे चक्कर आने लगे और सीएसीएच पहुंचते-पहुंचते उसकी मौत हो गई। इस घटना से ठीक दस दिन पहले, 25 अगस्त को साल्टौआ ब्लॉक के पछमोहनी बाजार में भी एक 25 वर्षीय महिला को बुखार की शिकायत पर झोलाछाप द्वारा दिए गए इंजेक्शन के कुछ ही घंटों के भीतर जान गंवानी पड़ी थी। इन दोनों ही मामलों में मरीज की मौत के तुरंत बाद आरोपी डॉक्टर क्लीनिक में ताला लगाकर फरार हो गए।
यह सवाल बार-बार खड़ा होता है कि आखिर इन फर्जी चिकित्सकों का यह खूनी खेल किसकी शह पर फल-फूल रहा है? बिना किसी मेडिकल डिग्री या वैध पंजीकरण के ये झोलाछाप न केवल धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं, बल्कि मरीजों की जान जोखिम में डालकर छोटे-छोटे ऑपरेशन तक अंजाम दे रहे हैं। मरीजों को पलभर में राहत दिखाने के नाम पर ‘हाई पावर’ की दवाइयां दी जाती हैं, जो थोड़ी सी चूक पर जानलेवा साबित होती हैं। हैरानी की बात यह है कि पछमोहनी बाजार का आरोपी डॉक्टर वर्षों से अवैध क्लीनिक चला रहा था, स्वास्थ्य विभाग द्वारा नाममात्र के लिए नोटिस तो जारी किए गए, लेकिन उन्हें कागजों में ही दबा दिया गया।
यदि समय रहते इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाती और स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाता, तो आज इन परिवारों के चिराग न बुझते। अब देखना यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कागजी बयानों से बाहर निकलकर इन मौत के सौदागरों पर कब वास्तविक बुलडोजर चलाते हैं, या फिर किसी अगली अनहोनी का इंतजार किया जाएगा?
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