बस्ती: सूदखोरी के काले कारोबार में बेकसूर राहगीर पर जानलेवा हमला, लालगंज पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में सूदखोरों का नंगा नाच: राहगीर को बनाया शिकार, कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे दबंग
- दूसरे के कर्ज की वसूली के लिए दबंगों ने पार कीं गुंडागर्दी की हदें, खून से लथपथ सड़क पर तड़पता रहा युवक
- लालगंज में सूदखोरों का नंगा नाच: शुभम भोजनालय के पास सरेराह युवक को पीटा, दी जान से मारने की धमकी
- कानून को ठेंगा दिखा रहे बस्ती के दबंग: रामकुमार चौहान, सूरजप्रकाश और सूरत चौहान पर गंभीर आरोप
- खून के प्यासे सूदखोरों के आतंक से सहमा इलाका, पीड़ित ने लालगंज थाने में लगाई न्याय की गुहार
बस्ती जिले की धरती पर खाकी का खौफ कमजोर पड़ता दिख रहा है और कानून के रखवालों की नाक के नीचे सूदखोरी का काला कारोबार इंसानी जान पर भारी पड़ रहा है। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र का है, जहां सजनाखोर और धुसनाखोर गांव के पास दबंगों ने गुंडागर्दी की ऐसी खौफनाक दास्तान लिखी कि किसी की भी रूह कांप जाए। ब्याज के पैसे वसूलने के नाम पर कानून को अपनी जागीर समझने वाले इन दरिंदों ने एक बेकसूर राहगीर को सरेराह मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया।
घटनाक्रम किसी खौफनाक फिल्मी सीन से कम नहीं था। शुभम भोजनालय के पास सजनाखोर निवासी पवन कुमार अपने रास्ते जा रहा था। उसका किसी के भी लेन-देन या कर्ज से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था, लेकिन सूदखोरी के नशे में चूर रामकुमार चौहान, सूरजप्रकाश और सूरत चौहान के लिए इंसानियत और कानून के कोई मायने नहीं हैं। किसी अन्य के बकाया पैसों की वसूली के लिए इन दबंगों ने बीच राह में पवन को घेर लिया। इसके बाद लाठी-डंडों और लात-घूंसों से ऐसी बेदर्दी की कि वह युवक वहीं सड़क पर खून से लथपथ होकर तड़पने लगा। जब पीड़ित ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसका विरोध किया, तो इन सिरफिरे सूदखोरों ने उसे सीधे जान से मारने की धमकी दी और धौंस जमाते हुए मौके से फरार हो गए।
यह सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है जो गांवों और कस्बों में पनप रहे अवैध ब्याज के काले धंधे पर लगाम कसने में नाकाम साबित हो रही है। लाचारी और मजबूरी का फायदा उठाकर दूसरों के खून-पसीने की कमाई पर पलने वाले ये तत्व अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि इन्हें किसी के जीवन या कानून का कोई डर नहीं है। क्या बस्ती पुलिस और प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या सूदखोरों के इनर्गों को खुली छूट मिल चुकी है कि वे जब चाहें जिसे चाहें निशाना बना लें?
पीड़ित पवन कुमार ने लालगंज थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है। अब गेंद लालगंज पुलिस के पाले में है। देखना यह है कि पुलिस महकमा इस मामले में महज कागजी औपचारिकताएं पूरी करता है या इन खून के प्यासे दबंगों की गिरेबान तक हाथ पहुंचाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजता है। बस्ती की फिजाओं में गूंजता यह सवाल हर जिम्मेदार नागरिक की जुबान पर है—आखिर कब तक कानून के साये में ये सूदखोर आम आदमी की जिंदगी से यूं ही खेलते रहेंगे?
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