पैकोलिया में नशे का काला कारोबार: पुलिस की कथित सरपरस्ती और संलिप्तता पर उठे तीखे सवाल

अजीत मिश्रा (खोजी)
पैकोलिया में नशे के अवैध कारोबार परवान पर: पुलिस की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल, बड़े तस्कर बेखौफ
- बस्ती: हसीनाबाद चौकी क्षेत्र बना अवैध नशे का गढ़, छोटे तस्करों तक सिमटी कार्रवाई से जनता में आक्रोश
- खाकी के साये में फल-फूल रहा स्मैक, चरस और कच्ची शराब का सिंडिकेट, बड़े तस्कर बेखौफ
- युवाओं की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? पैकोलिया पुलिस और चौकी इंचार्ज की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
बस्ती। जनपद के पैकोलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला हसीनाबाद चौकी इलाका इन दिनों अवैध नशे के कारोबार का सुरक्षित गलियारा बनता जा रहा है। कच्ची शराब से लेकर गांजा, स्मैक और चरस जैसे घातक नशीले पदार्थों का यह काला कारोबार क्षेत्र के युवाओं को दीमक की तरह अंदर से खोखला कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस महकमे के तमाम दावों और कानून व्यवस्था के चौबीसों घंटे मुस्तैद होने के दावों के बावजूद जमीन पर हालात बद से बदतर हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह पूरा सिंडिकेट पैकोलिया थाना प्रभारी निरीक्षक और हसीनाबाद चौकी इंचार्ज की कथित और प्रत्यक्ष सरपरस्ती में फल-फूल रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों में इस संलिप्तता को लेकर भारी आक्रोश और गहरी चिंता व्याप्त है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में गली-कूचों से लेकर चौराहों तक पुड़िया-पुड़िया नशे की बिक्री खुलेआम हो रही है, जिससे किशोर और युवा पीढ़ी तेजी से नशे की दलदल में धंसती जा रही है। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति और आंकड़ों की बाजीगरी तक सीमित है। पुलिस कभी-कभार कुछ छोटे-मोटे पैडलर्स को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, लेकिन इस अवैध नेटवर्क के असली आकाओं—यानी उन बड़े सप्लायरों और मास्टरमाइंडों—तक हाथ डालने से खाकी हमेशा कतराती नजर आती है।
हसीनाबाद चौकी क्षेत्र बना अपराध का केंद्र
हसीनाबाद चौकी क्षेत्र कथित तौर पर इस अवैध कारोबार का केंद्र बिंदु बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी संगठित रूप से चल रहे ठिकानों पर कोई प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं होती। यदि कभी औपचारिकता के लिए छापेमारी की भी जाती है, तो कार्रवाई की भनक तस्करों को पहले ही मिल जाती है, जिससे बड़े चेहरे हमेशा सुरक्षित बच निकलते हैं। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के तार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका दायरा पड़ोसी जिलों तक फैला हुआ है, जिसे स्थानीय पुलिस की शह के बिना संचालित करना असंभव माना जा रहा है।
भविष्य पर मंडराता खतरा और जनता के तीखे सवाल
नशे के इस कारोबार ने क्षेत्र के अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। कई ग्रामीण अपराधियों और उनके कथित खाकी संरक्षकों के खौफ के कारण खुलकर सामने आने से बचते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर सुलगता यह असंतोष प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी को बयां करता है। जनता के मन में अब सबसे बड़ा और सीधा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पैकोलिया पुलिस और हसीनाबाद चौकी इंचार्ज की मिलीभगत के बिना इलाके में इतना बड़ा अवैध कारोबार चल सकता है? क्या पुलिस की यह निष्क्रियता महज लापरवाही है या इसके पीछे किसी बड़े आर्थिक हित का खेल चल रहा है?
अब निगाहें बस्ती जिले के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हैं या नहीं। क्या जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय जांच करवाकर उन बड़े तस्करों और उनके कथित संरक्षकों को बेनकाब करेगा, या फिर पैकोलिया की युवा पीढ़ी इसी तरह नशे की भेंट चढ़ती रहेगी?
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