सनातन धर्म में विघ्नहर्ता गणपति जी की पूजा बिना कोई शुभ कार्य की शुरुआत नहीं होती है

हमारे सनातन धर्म में श्री गणेश जी की पूजा के बिना में कोई भी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं होती है। श्री गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता भी कहा जाता है।
सनातन धर्म में श्री गणेश चतुर्थी का मंगलकारी, पर्व भगवान श्री गणेश जी को समर्पित प्रमुख त्योहारों में से एक है। धार्मिक मान्यतानुसार भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि के दिन भगवान श्री गणेश जी का अवतरण( जन्म) माना जाता है।
श्री गणेश चतुर्थी के दिन भक्तजन धार्मिक विधि विधान से गणपति बप्पा की पूजा आराधना करतें हैं, इस दिन घरों और सार्वजनिक पूजा पंडालों में श्री गणेश जी की प्रतिमा की विधिवत स्थापना की जाती है, और पूरे बस दिनों तक धर्म शास्त्र के विधान अनुसार उनकी पूजा अर्चना की जाती है। भगवान श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, बुद्धि, ज्ञान, और शुभता के देवता माना जाता है, और इसलिए किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पूर्व सबसे पहले श्री गणेश जी का स्मरण, वंदन आराधना करने की परंपरा भी रही है।
इस वर्ष श्री गणेश चतुर्थी का यह पावन मंगलकारी पर्व सोमवार 14 सितंबर को है , भारतीयों के लिए श्री गणेश चतुर्थी का यह परम पावन पवित्र दिन दिव्यता के साथ असाधारण अंतरंगता की अवधि के शुरुआत भी होती है। श्री गणेश चतुर्थी प्रतिवर्ष भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है ।
अधिकांश हिंदू व्रत त्योहार का निर्धारण सूर्योदय के समय पर निर्धारित होतें हैं, , श्री गणेश जी की स्थापना प्राय: मध्याह्न काल दोपहर के समय से नियंत्रित होती है, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि भगवान श्री गणेश जी का अवतरण(जन्म) मध्याह्न काल में हुआ माना जाता है, और इस अवधि में श्री गणेश जी प्रतिमा स्थापित करना पूजा करना पूरे त्योहार का सबसे अधिक शुभ कार्य भी माना जाता है। ,गणेश जी के पर्व से संबंधित कहानी-: प्राय: अधिकतर लोगों को यह पता है कि गणेश जी को हाथी का सिर कैसे मिला।
माता पार्वती जी नें श्री गणेश को अपने शरीर के चंदन के लेप से बनाया था, और उन्हें अपने महल के द्वार पर द्वारपाल के रूप में नियुक्त किया था, और जब भगवान शिव जी ने एक ऐसे बालक के द्वारा अपने ही महल में प्रवेश करने से रोक दिए जाने पर, जिसे कि शिव जी ने उस बालक को पहले कभी नहीं देखा था, क्रोध में आकर उस बालक का सिर गर्दन से अलग कर दिया। इसको देखकर जब माता पार्वती जी का दुख सृष्टि को नष्ट करने की धमकी देने लगा तो शिव जी ने उत्तर दिशा की ओर मुख किए हुए पहले प्राणी, एक हाथी के सिर को लगाकर उस बालक को फिर से पुनर्जीवित किया ,और शिव जी ने उस बालक को बड़ा वरदान दिया कि कोई भी यज्ञ, पूजा , कार्य, तीनों लोकों में तब तक सफल नहीं होगा जब तक कि श्री गणेश जी की सर्वप्रथम पूजा न की जाए।.गज- हाथी का मुख होने से गणेश जी को गजानन भी कहतें हैं।
गणेश पर्व से संबंधित एक और भी कथा है जो कि इस विशेष दिन के अजीब नियमों को भी दर्शाती है- हमारे पुराण बतातें हैं कि मोदकों के भोज के पश्चात श्री गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर घर को लौट रहे थे , और जब उनका छोटा सा वाहन मूषक लड़खड़ाया और गणेश जी गिर पड़े, इस देखकर चंद्र,देव हंस पड़े थे, इससे गणेश जी अपने उपहास से आहत होकर चंद्रमा को श्राप दे दिया-; कि भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि पर जो कोई भी चंद्रमा को देखेगा , तो उस पर झूठा आरोप लगेगा और वह अपयश झेलेगा। चंद्रमा को लगा यह श्राप भगवान श्रीकृष्ण जी को भी नहीं छोड़ा, इस तिथि पर चंद्रमा को देखने के बाद उन पर अनमोल स्यामंतक मणि चुराने का आरोप लगा, और इससे श्रीकृष्ण ने सार्वजनिक संदेह सहा, एक जंगल के माध्यम से रत्न का पता लगाया , अट्ठाइस दिनों तक भालू राजा जाम्बवान से लड़ाई भी लड़ी और उसे वह रत्न लौटा दिया, और अपने ऊपर लगे आरोप को साफ किया,यह नारद मुनि थे, जिन्होनें वास्तविक कारण बताया – चंद्रमा और श्राप का।
नारद जी ने इसका उपाय बताया और यही कारण भी है कि हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर भारत मे हर घर में यह कथा जोर से पढ़ी जाती है, जो भी गणेश जी की पूजा करता है और इस दिन स्यमन्तक मणि कथा सुनता है ,वह मिथ्या दोषों से सुरक्षित रहता है। मानयता है कि इस दिन भले गलती से चंद्र दर्शन हो भी जाए तो , परंपरागत रूप से कथा सुनते समय सिर पर कुछ दाने अक्षत के रखे जातें हैं।
जितने दिनों तक भगवान श्री गणेश जी हमारे आपके घरों में रहतें हैं उतने दिनों तक प्रतिदिन सुबह शाम उनकी आरती पूजा कर उन्हें ताजा नैवेद्य भोग लगाना चाहिए।.वह एक मेहमान स्वरूप होतें हैं, और उनके साथ भी वैसा ही आदर व्यवहार करना चाहिए जैसे घर घर आए मेहमान का किया जाता है।.गणपति पूजन के दौरान हर घर परिवार उन्हें पूरे दस दिन तक नही रखता है, परंपरा कई अवधियों की भी अनुमति देता है, और यह सभी समान रूप से मान्य भी हैं, इनमें महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिमा स्थापना के समय पर किया गया वादा वही है जिसे आप हम सब निभातें हैं। गणपति पूजा आराधना के बाद विसर्जन से पूर्व एकबार अंतिम आरती अवश्य करनी चाहिए, और नैवेद्य भी भोग लगाना चाहिए, और उत्तर पूजा के साथ आतिथ्य में किसी भी प्रकार के भूल चूक के क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और फिर बप्पा को जयघोष के साथ विदा किया जाना चाहिए, जो कि सदियों से हमेशा गणपति विसर्जन के समय गूंजता आ रहा है- "गणपति बप्पा मोरया, अगले वर्ष तू जल्दी आ"।
यहां पर जल के बारे में एक आवश्यक बात-: घर पर एक बाल्टी या टैंक में घुलने वाली पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की मूर्ति ही भगवान और उन नदियों दोनों का सम्मान करती हैं ,जिन्हें वह आशिर्वाद देखते हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां और रासायनिक रंग ऐसा काम नहीं करतें हैं ।
गणेश जी की पूजा हर देवी देवता से पहले करने का एक कारण भी है, यह कठिनाई रहित जीवन का वादा तो नहीं करते – वह वादा करते हैं कि कठिनाई की अंतिम बात नहीं होगी। जब आप और हम गणेश चतुर्थी के दिन अपने घरों में गणपति बप्पा जी की मूर्ति स्थापित करतें हैं तो आप हम किसी कोने को सजा नहीं रहे होते, हम सब उनको आमंत्रित कर रहे होतें हैं, जो कि हमारे अंदर छुपी हुई विकार ,घृणा, दंभ अहंकार, आदि गंदगी की सफाई करतें हैं, ताकि वह दस दिनों तक के लिए हमारे मन रूपी घर के अंदर आएं और बैठ जाएं।
श्री गणेश जी लोक मंगल के देवता हैं, लोक मंगल ही इनका उद्देश्य भी होता है, परंतु जहां अमंगल होता है, उसे दूर करने के लिए श्री गणेश जी सदैव आगे रहतें हैं, गणेश जी रिद्धि सिद्धी के स्वामी भी हैं, इसलिए इनकी कृपा से सुख संपदा , समृद्धी का अभाव नहीं रहता है। श्री गणेश जी को दूर्वा और मोदक अति प्रिय हैं।
गणेश जी परम रहस्यमय हैं, उनके रहस्य को कोई भी भेद नहीं सकता। श्रीगणेश जी चतुर्थी मात्र एक उत्सव, पूजा ,पर्व, सजावट का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह बुद्धी, विवेक, अनुशासन, सकरात्मकता, और नई शुरुआत का संदेश भी देता है, भगवान श्रीगणेश जी की पूजा वंदना करते समय सबसे जरूरी बात यह होती है कि ऋद्धा भक्ति, बाहरी स्वच्छता के साथ साथ अपने अंदर की की भी स्वच्छता मन की सच्चाई।.
।। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्योदय समप्रभ ।
निर्विघ्नं क्रू मेंबर देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।। गणपति बप्पा मोरया ।।।
आप सभी हार्दिक हार्दिक बधाई, शुभकामनाऐं ।। सभी स्वस्थ रहें, निरोगी रहें , सबको सुख समृद्धि दीर्घायु की प्राप्ति हो , ईश्वर की कृपा ,मां भारती का मंगलकारी आंचल तले सबको सुकुन भरा जीवन मिले ।।
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