नेशनल लोक अदालत में राजस्व वसूली बढ़ी किन्तु बड़े बकाया दारो पर चुप्पी का आलम क्यों

मैहर
नगर पालिका परिषद मैहर में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में जलकर एवं संपत्ति कर सहित नगर पालिका के विभिन्न बकाया मामलों में राजस्व वसूली की गई। अध्यक्ष श्रीमती गीता संतोष सोनी के कुशल मार्गदर्शन में कई पार्षद भी सुबह से ही मौके पर डटे रहे। इसका असर राजस्व वसूली में भी देखने को मिला।
हालांकि, लोक अदालत के दौरान नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रिंस अग्रवाल की लंबे समय तक गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। जानकारी के अनुसार टैक्स आईडी जनरेट करने की प्रक्रिया में ओटीपी सीएमओ के मोबाइल पर आने की व्यवस्था होने के कारण उनकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सीएमओ स्वयं मौके पर मौजूद रहते तो क्या राजस्व वसूली का आंकड़ा और बेहतर नहीं हो सकता था?
लोक अदालत से पहले यह भी चर्चा थी कि नगर पालिका के बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं, ताकि बकाया करदाताओं पर भुगतान का दबाव बने। लेकिन लोक अदालत के दौरान ऐसी कोई सूची सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका क्षेत्र में बड़े संस्थान और करोड़ों की संपत्तियां शामिल हैं, तो उनसे जुड़े बड़े बकाया करों की वसूली को लेकर क्या कार्रवाई की गई?
नगर पालिका परिषद मैहर की सीमा में केजेएस सीमेंट भी आता है। शहर में चर्चा है कि बड़े बकायेदारों से राजस्व वसूली नगर पालिका के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन लोक अदालत में केजेएस सीमेंट से संबंधित बकाया राशि अथवा वसूली को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि लोक अदालत का उद्देश्य यदि अधिक से अधिक राजस्व की वसूली और बकाया मामलों का समाधान है, तो बड़े बकायेदारों को लेकर नगर पालिका की रणनीति क्या रही?
लोक अदालत में अध्यक्ष और पार्षदों की सक्रियता के बीच सीएमओ की अनुपस्थिति पर चर्चाओं का दौर चलता रहा। शहर में तो यहां तक तंज सुनने को मिला कि सीएमओ अगर लोक अदालत में मौजूद रहकर इतना अच्छा प्रदर्शन कर लेते हैं तो दोपहर बाद भी कार्यालय नहीं आते तो शायद राजस्व वसूली का आंकड़ा 70 लाख रुपये के पार पहुंच जाता!
बहरहाल, लोक अदालत में हुई राजस्व वसूली नगर पालिका के लिए सकारात्मक पहल है, लेकिन बड़े बकायेदारों की सूची, उनकी बकाया राशि और उनसे हुई वसूली की जानकारी सार्वजनिक होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नगर पालिका ने छोटे बकायेदारों के साथ-साथ बड़े बकायेदारों से वसूली के लिए कितनी गंभीरता के साथ साथ हमदर्दी भी दिखाई।
मैहर ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा
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