Government Employee News: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर… लंबी सेवा के बाद पेंशन से वंचित नहीं कर सकते – सुप्रीम कोर्ट

इंदौर / तेजकुमार जारवाल /
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़/ जिला रिपोर्टर, इंदौर, मध्य प्रदेश /
भोपाल / लंबे समय तक सेवा देने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी की है। पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (Punjab School Education Board) एवं अन्य बनाम सतनाम सिंह (Satnam Singh) एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर 2026 को दिए फैसले में कहा कि किसी कर्मचारी की लंबे समय तक की गई वास्तविक सेवा को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन लाभ से अलग नहीं किया जा सकता।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने नियमित होने से पहले अनुबंध, तदर्थ, दैनिक वेतन या वर्क-चार्ज के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दी हैं। नियुक्ति पत्र की शब्दावली से ज्यादा महत्वपूर्ण सेवा की वास्तविक प्रकृत सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कर्मचारी की सेवा का वास्तविक स्वरूप महत्वपूर्ण है।
केवल नियुक्ति पत्र में इस्तेमाल किए गए शब्दों या पद की तकनीकी स्थिति के आधार पर वर्षों की सेवा को पेंशन योग्य सेवा से बाहर करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण से पहले अनुबंध, तदर्थ, दैनिक वेतन या वर्क-चार्ज के आधार पर की गई सेवा को परिस्थितियों के अनुसार पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जा सकता है।
इसके साथ ही सेवा के दौरान आए ऐसे कृत्रिम या प्रशासनिक अंतराल, जो वास्तविक निरंतर सेवा को प्रभावित नहीं करते, उन्हें भी हर मामले में सेवा में बाधा नहीं माना जाना चाहिए। पेंशन को बताया सेवा से जुड़ा अर्जित अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को कर्मचारी की पूर्व सेवा से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा के रूप में देखा।
न्यायालय के अनुसार, जिसने लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं और बाद में उसे नियमित किया गया, उसे केवल तकनीकी या कृत्रिम आधार पर पेंशन लाभ से वंचित करना सामान्य परिस्थितियों में उचित नहीं होगा। फैसले में न्यायालय ने पूर्व में दिए गए विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया, जिनमें नियमितीकरण से पहले की सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा के रूप में स्वीकार करने के सिद्धांत पर जोर दिया गया है।
ऐसे मामले में भी इस सिद्धांत को महत्व दिया गया, जिसमें कर्मचारी 2004 से पहले सेवा में आया था और बाद में नियमित हुआ। मध्यप्रदेश के पुराने शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए भी अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को मध्यप्रदेश के उन पुराने शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग अस्थायी, संविदा, अध्यापक या स्थानीय निकाय आधारित व्यवस्थाओं में काम करने के बाद नियमित या नए संवर्ग में नियुक्ति प्राप्त की।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शिक्षक नेता उपेन्द्र कौशल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे हजारों कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने शासन की व्यवस्था के तहत लंबे समय तक सेवा दी और बाद में उसे नियमित सेवा का हिस्सा बनाया गया, तो उसकी पूर्व सेवा की वास्तविक प्रकृति और सेवानिवृत्ति लाभों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
1998 के बाद नियुक्त पुराने शिक्षकों का मुद्दा भी उठाया
उपेन्द्र कौशल ने कहा कि केवल नियमितीकरण की तारीख को आधार बनाकर कर्मचारी की वर्षों पुरानी सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं होना चाहिए। उन्होंने मध्यप्रदेश में 1998 के बाद अलग-अलग चरणों में नियुक्त पुराने शिक्षकों की सेवा, वेतन, वरिष्ठता और पेंशन से जुड़े मामलों पर भी सरकार से व्यापक विचार करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शासन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावना को ध्यान में रखते हुए पुराने शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थिति का वर्षवार, संवर्गवार और नियुक्ति की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर परीक्षण करना चाहिए। सरकार से नीति बनाकर विसंगतियां दूर करने की मांगशिक्षक नेता ने सरकार से मांग की कि पुराने शिक्षकों-कर्मचारियों की पूर्व सेवा को लेकर चली आ रही विसंगतियों की समीक्षा की जाए।
जिन कर्मचारियों ने लंबे समय तक सेवा देने के बाद नियमित सेवा प्राप्त की है, उनके वास्तविक सेवा योगदान को ध्यान में रखते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के संबंध में ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में लंबे समय से पूर्व सेवा की गणना, वरिष्ठता और पेंशन लाभ को लेकर मांग कर रहे पुराने शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी के मामले में लागू नियमों, नियुक्ति की प्रकृति और संबंधित सेवा रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग कानूनी स्थिति बन सकती है।
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