MP के अतिथि विद्वानों ने बनाई ‘विद्वान जनता पार्टी’ यानी VJP… उच्च शिक्षा मंत्री के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव!

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
मध्यप्रदेश में नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अतिथि विद्वानों का विरोध अब राजनीतिक दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। अतिथि विद्वानों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ (VJP) के नाम से राजनीतिक संगठन बनाने का ऐलान किया है।
यह घोषणा उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आई है। शुजालपुर में देंगे टक्कर
अतिथि विद्वानों का दावा है कि मंत्री के साथ चर्चा के दौरान उन्हें चुनाव लड़ने की चुनौती दी गई थी।
इसके बाद आंदोलनकारियों ने इसे चुनौती के तौर पर लेते हुए चुनावी मैदान में उतरने की बात कही और VJP के नाम से पोस्टर जारी किया। उपलब्ध रिपोर्टों में भी पार्टी गठन और शुजालपुर से चुनाव लड़ने की संभावित घोषणा का उल्लेख है।
पोस्टर में शुजालपुर का जिक्र,VJP के सामने आए पोस्टर में शुजालपुर विधानसभा क्षेत्र का भी उल्लेख किया गया है। शुजालपुर से उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विधायक हैं।
पोस्टर में अतिथि विद्वानों के सम्मान, नियमितीकरण की गारंटी, सुरक्षित भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को प्रमुख मुद्दों के तौर पर रखा गया है। हालांकि,
नई पार्टी का औपचारिक पंजीयन हुआ है या नहीं और आगामी चुनाव में यह संगठन किस स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां करेगा, इस संबंध में अभी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नियमितीकरण और फॉलन आउट रोकने की मांग
अतिथि विद्वान लंबे समय से नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की नीति की मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों भोपाल में बड़ी संख्या में अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर धरना दिया था।
उनकी प्रमुख मांग है कि नियमितीकरण और स्थायित्व की नीति बनने तक ‘फॉलन आउट’ प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। नौकरी की सुरक्षा की मांग
अतिथि विद्वानों के अनुसार, नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण होने पर संबंधित कॉलेज में पहले से कार्यरत अतिथि विद्वान की सेवा प्रभावित हो सकती है।
इसी व्यवस्था को लेकर आंदोलनकारी लगातार सरकार से नीति बनाने और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से राजनीति तक पहुंचा मामला
पिछले दिनों अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर अन्य नेताओं से भी मुलाकात की है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से नियमितीकरण और स्थायित्व को लेकर आश्वासन मिलने के बावजूद ‘फॉलन आउट’ प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। अब ‘विद्वान जनता पार्टी’ के ऐलान के बाद अतिथि विद्वानों का आंदोलन एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, VJP की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और उम्मीदवारों को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







