दशहरा मैदान में तैयार हुआ कृत्रिम तालाब, कायलाना झील बचाने की अपील

जोधपुर : पर्यावरण संरक्षण और गणेश विसर्जन को लेकर दशहरा मैदान, 16 सेक्टर हाउसिंग बोर्ड में इस वर्ष भी कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। नगर निगम जोधपुर के सहयोग तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से तैयार किए गए इस कृत्रिम तालाब का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और श्रद्धालुओं को पर्यावरण अनुकूल विसर्जन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
अभियान का नेतृत्व पर्यावरण प्रेमी एवं नगर निगम जोधपुर के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली कर रहे हैं। समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कायलाना झील सहित प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग न करें और कृत्रिम तालाब में ही विसर्जन करें।
समिति के अनुसार कायलाना झील की स्वच्छता को लेकर पिछले करीब 120 दिनों से लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में अब तक 2000 से अधिक स्वयंसेवकों ने श्रमदान किया है।
सफाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, थैलियां, कपड़े और अन्य सामग्री झील से निकाली गई है। पंडित जीवराज श्रीमाली ने बताया कि पिछले करीब 10 वर्षों से गुरु के तालाब की सफाई एवं कायाकल्प के कार्य से जुड़े अनुभव का उपयोग कायलाना झील को स्वच्छ रखने के अभियान में किया जा रहा है।
समिति का कहना है कि श्रद्धालु अक्सर गणेश प्रतिमाओं के साथ वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक से बनी सजावटी सामग्री भी जल में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। समिति ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि प्रतिमाओं के वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक सामग्री को जल स्रोतों में न डालें, बल्कि विसर्जन स्थल पर टीम को सौंप दें।
समिति के अनुसार इन सामग्रियों को रीसाइक्लिंग और रीयूज के लिए अलग किया जाएगा। समिति ने यह भी अपील की है कि लोग मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें।
वहीं, समिति ने कहा है कि श्रद्धालु अपने पास मौजूद POP अथवा केमिकल रंगों वाली प्रतिमाएं भी कृत्रिम विसर्जन स्थल पर ला सकते हैं। समिति के अनुसार ऐसी प्रतिमाओं को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार कर विसर्जन के बाद रीसाइक्लिंग एवं रीयूज के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
समिति ने एक वैकल्पिक पर्यावरण हितैषी परंपरा अपनाने का संदेश भी दिया है। इसके तहत लोगों से आग्रह किया गया है कि नई प्रतिमा लाने के बजाय घर में स्थापित स्थायी गणेश जी को ही पाट पर विराजमान कर 3, 7 या 10 दिन पूजा-अर्चना के बाद पुनः घर में स्थापित किया जा सकता है और विसर्जन से बचा जा सकता है।
इस अभियान में नगर निगम जोधपुर, उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी जोधपुर, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला तथा नंदनवन मयूर सेवा समिति सहित विभिन्न संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। समिति ने अगले वर्ष और व्यापक स्तर पर जागरूकता एवं व्यवस्थित विसर्जन व्यवस्था करने की बात कही है।
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