मस्तूरी के गतौरा में गणेश पंडाल बना रणभूमि,

इमानुएल भारद्वाज की रिपोर्ट
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आस्था और भगवान के नाम पर होने वाले आयोजनों को विवाद और हिंसा का मंच नहीं, बल्कि शांति और सद्भाव का माध्यम बनाया जाना चाहिए। पुरानी रंजिश चाहे कितनी भी हो, उसे हिंसा का रूप देने से किसी समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि एक छोटी-सी बात कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है।
ऐसे ही एक मामला
मस्तूरी थाना क्षेत्र के गतौरा गांव में गणेश पंडाल में गाना बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया। 22 दिसंबर की रात दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान लाठी-डंडे, टंगिया और चाकू जैसे हथियारों का इस्तेमाल किए जाने की बात पुलिस ने कही है। इस हिंसक झड़प में शैलेश कुमार राठौर उर्फ राज गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी बाद में मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई और देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने लाठी-डंडों के साथ-साथ टंगिया और चाकू से भी हमला किया। घटना में कई अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मस्तूरी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने इस मामले में 13 आरोपियों और एक नाबालिग को पकड़ा है। पुलिस द्वारा घटना में इस्तेमाल किए गए हथियारों को भी जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है और घटना के पीछे विवाद की पूरी वजह तथा इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
धार्मिक स्थल पर हिंसा ने खड़े किए सवाल
यह घटना केवल एक आपसी विवाद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश भी छोड़ती है। जिस स्थान पर लोग भगवान की पूजा और श्रद्धा के लिए एकत्र होते हैं, वहां छोटी-सी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ जाना चिंता का विषय है। धार्मिक आयोजन लोगों को जोड़ने, भाईचारा बढ़ाने और शांति का संदेश देने के लिए होते हैं, लेकिन जब पुराने विवाद और आपसी रंजिश इन आयोजनों में हावी हो जाती है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
जरूरत इस बात की है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सभी लोग संयम और समझदारी से काम लें। गाना बजाने या किसी अन्य छोटी बात को
लेकर विवाद होने पर उसे बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। किसी भी विवाद में हथियार उठाना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे परिवारों और पूरे समाज को ऐसी क्षति होती है जिसकी भरपाई आसान नहीं होती
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