अवैध हथियार फायरिंग मामले में पुलिस की कार्यवाही पर उठे सवाल ।

अवैध हथियार से फायरिंग के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, पीड़ित को जाना पड़ा हाईकोर्ट।
10 महीने बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं, हाईकोर्ट ने डीजीपी हरियाणा से मांगा जवाब, 2 नवंबर तक हलफनामा दायर करने के आदेश।
तावडू। सदर थाना क्षेत्र में अवैध हथियार अधिनियम के तहत दर्ज एक मुकदमे में पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करने का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष द्वारा कई बार उच्च अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस से जवाब मांगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला थाना सदर तावडू में नवंबर 2025 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जो आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज की गई थी। पीड़ित महेश निवासी गांव रठीवास का आरोप है कि 24 अगस्त 2025 की रात उसके रंगाला-रठीवास रोड स्थित ऑफिस पर अर्टिगा गाड़ी में सवार लोगों ने अवैध हथियार से फायरिंग की थी, जिसमें उसके ऑफिस के शीशे टूट गए थे और मौके से कारतूस भी बरामद हुआ था। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई थी। पीड़ित का कहना है कि घटना के तीन महीने बाद पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन 10 महीने बीत जाने के बाद भी किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई और न ही वारदात में प्रयुक्त वाहन और हथियार की बरामदगी की गई। इसको लेकर पीड़ित पक्ष ने एसपी नूंह से लेकर डीजीपी हरियाणा तक कई बार शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद पीड़ित ने अधिवक्ता खालिद के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच की मांग की। याचिका पर गत 25 सितंबर को जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी पंचकूला को आदेश दिए कि जांच एजेंसी द्वारा अब तक इस मामले में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं, उसका पूरा विवरण हलफनामे के रूप में दाखिल किया जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर तय की है। कुल मिलाकर पुलिस द्वारा मामले में उचित कार्रवाई नहीं होने पर इस पूरे विवरण को पुलिस की किरकिरी के रूप में देखा जा रहा है।
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