308 पहियों वाला ‘महाबली’ ट्रक चंदौली से लखीमपुर की ओर रवाना, करीब 400 किमी का सफर; जानिए संभावित रूट, पड़ाव और समय

गाजीपुर/वाराणसी। बेल्जियम से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह होते हुए लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए जा रहा 308 पहियों वाला विशालकाय ‘महाबली’ ट्रक चंदौली से वाराणसी की ओर रवाना हो गया है।
ट्रक पर करीब 164.28 मीट्रिक टन वजनी और 41 मीटर लंबा रिएक्टर लदा है। वाहन के विशाल आकार के कारण इसे सामान्य यातायात की तरह नहीं चलाया जा रहा है और रास्ते में कई स्थानों पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
चार दिन चंदौली में रुका रहा ट्रक
25 सितंबर को नौबतपुर बॉर्डर से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद ऊंचाई, चौड़ाई और रास्ते की बाधाओं के कारण ट्रक चंदौली में करीब चार दिन रुका रहा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड क्षेत्र में वैकल्पिक मार्ग तैयार कराने और संबंधित विभागों से अनुमति मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया।
वाराणसी में भी कई जगह चुनौती
चंदौली के बाद ट्रक वाराणसी की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तावित मार्ग में डाफी, मोहनसराय, रखौना, गंजारी, रिंग रोड, हरहुआ और संदहा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं।
इतने बड़े वाहन को निकालने के लिए सड़क की चौड़ाई, मोड़, बिजली के तार और अन्य ऊंचाई संबंधी बाधाओं की जांच की जा रही है। गाजीपुर और गोरखपुर की ओर बढ़ेगा काफिला
लॉजिस्टिक्स टीम के अनुसार वाराणसी के बाद ट्रक को गाजीपुर और गोरखपुर की दिशा में ले जाया जाएगा।
आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़े मार्ग का इस्तेमाल करने की योजना बताई गई है। हालांकि, ओवर डायमेंशन कार्गो होने के कारण वास्तविक मार्ग स्थानीय परिस्थितियों और प्रशासनिक अनुमति के आधार पर बदला जा सकता है।
बेहद धीमी रफ्तार, दो-तीन सप्ताह का अनुमान
इस ट्रक की यात्रा सामान्य वाहनों से बिल्कुल अलग है। रिपोर्टों के मुताबिक रास्ते की जटिलताओं के कारण यह कई स्थानों पर प्रतिदिन करीब 10 से 20 किलोमीटर ही आगे बढ़ पा रहा है।
लॉजिस्टिक्स टीम ने लखीमपुर खीरी पहुंचने में करीब दो से तीन सप्ताह लगने का अनुमान जताया है। 📦 तथ्य बॉक्स
महाबली ट्रक की खासियत
पहिए: 308
मशीन: विशाल रिएक्टर
वजन: 164.28 मीट्रिक टन
लंबाई: करीब 41 मीटर
गंतव्य: ग्राम कुंभी, लखीमपुर खीरी
प्लांट: बलरामपुर चीनी मिल का बायोप्लास्टिक प्लांट
प्रमुख संभावित रूट: चंदौली → वाराणसी → गाजीपुर → गोरखपुर → पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की दिशा → कुंभी
अनुमानित कुल यात्रा: करीब 2–3 सप्ताह
मार्ग की स्थिति: आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक रास्ते और विशेष यातायात व्यवस्था
संक्षिप्त निष्कर्ष
चंदौली से निकल चुका 308 पहियों वाला ‘महाबली’ अब वाराणसी के रास्ते लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा है।
164 टन से अधिक वजनी रिएक्टर को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाना लॉजिस्टिक्स और प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण अभियान है। रास्ते में बाधाओं के अनुसार पड़ाव और मार्ग बदल सकते हैं, इसलिए गोरखपुर के बाद का सटीक रूट अभी संभावित माना जाना चाहिए।
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