भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में नशा उन्मूलन पर सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने चलाया जन जागरण अभियान

बहराइचl महामना मालवीय मिशन (अवध) के तत्वावधान में भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाके में स्थित वन्य क्षेत्र में पर्यावरण एवं जल संरक्षण तथा नशा उन्मूलन के लिए विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में जन जागरण अभियान चलाए जाने की कार्ययोजना बनाई गई है। अभियान का शुभारंभ गोरखपुर वन्य परिक्षेत्र से प्रारंभ होकर पीलीभीत जनपद स्थित गोमती नदी उदगम स्थल (माधव टांडा) तक पहुँचेगी।
प्रस्तावित जन जागरण यात्रा में वन विभाग, सिंचाई विभाग, एस ०एस ०बी ० व अन्य प्रशासनिक विभागों से भी सहयोग लिया जाना प्रस्तावित किया गया है। महामना मालवीय मिशन, गायत्री परिवार व संघ परिवार के प्रतिनिधियों ने आज वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना से उनके आवास पर वार्ता कर प्रस्तावित पर्यावरण जल संरक्षण एवं नशा उन्मूलन विषयक जन जागरण अभियान के प्रस्तावना एवं रूप रेखा पत्र को सौंपकर अभियान में हर संभव सहयोग का सामूहिक आग्रह किया।
महामना मालवीय मिशन अध्यक्ष (अवध) संजीव श्रीवास्तव एडवोकेट, महामंत्री सोमेश वर्धन सिंह एडवोकेट, उपाध्यक्ष डॉ पंकज श्रीवास्तव व पर्यावरणविद ओम प्रकाश सक्सेना ने बताया कि पर्यावरण जल संरक्षण व नशा उन्मूलन विषयक जन जागरण अभियान अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव रखा है। पदाधिकारियों ने बताया कि यात्रा गोरखपुर परिक्षेत्र नेपाल से भारतीय परिक्षेत्र में आवक स्थल से होकर सीमावर्ती वन्य क्षेत्र से सटे इलाकों जनपद सिद्घार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर , श्रावस्ती, बहराइच(सरयू नदी उद्भव परिक्षेत्र)तराई क्षेत्र से होते हुए लखीमपुर (शारदा नदी परिक्षेत्र)से पीलीभीत गोमती नदी उदगम स्थल माधव टांडा (रुहेलखंड परिक्षेत्र) तक बनाई गई है।
यात्रा आयोजकों ने बताया कि प्रस्तावित यात्रा में गायत्री परिजन, राम कृष्ण मिशन, बाबा जयगुरुदेव परिवार, आर्य समाज, शिक्षक व शिक्षण परिवार, पर्यावरणविदो के अलावा अन्य सामाजिक व धार्मिक तथा शैक्षणिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों से भी सघन सम्पर्क वार्ता की जा रही है आयोजक मंडल से जुड़े पदाधिकारीयों ने बताया कि प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य सीमावर्ती इलाको में अवैध नशा क्रय-विक्रय उपभोग व उत्पादन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु स्थानीय जन सहयोग तथा पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए जगह जगह पंचवटी व हरिशंकरी व फलदार वृक्षों के रोपण तथा स्थानीय जन सहयोग से रोपित वृक्षों का संरक्षण व वन्य जीव जंतु के संरक्षण हेतु सीमावर्ती इलाको के लोगों को सहयोग व संवाद के आधार पर लोगो को जागरूक करना है।र्मिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में जन जागरण अभियान चलाए जाने की कार्ययोजना बनाई गई है। अभियान का शुभारंभ गोरखपुर वन्य परिक्षेत्र से प्रारंभ होकर पीलीभीत जनपद स्थित गोमती नदी उदगम स्थल (माधव टांडा) तक पहुँचेगी।
प्रस्तावित जन जागरण यात्रा में वन विभाग, सिंचाई विभाग, एस ०एस ०बी ० व अन्य प्रशासनिक विभागों से भी सहयोग लिया जाना प्रस्तावित किया गया है। महामना मालवीय मिशन, गायत्री परिवार व संघ परिवार के प्रतिनिधियों ने आज वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना से उनके आवास पर वार्ता कर प्रस्तावित पर्यावरण जल संरक्षण एवं नशा उन्मूलन विषयक जन जागरण अभियान के प्रस्तावना एवं रूप रेखा पत्र को सौंपकर अभियान में हर संभव सहयोग का सामूहिक आग्रह किया।
महामना मालवीय मिशन अध्यक्ष (अवध) संजीव श्रीवास्तव एडवोकेट, महामंत्री सोमेश वर्धन सिंह एडवोकेट, उपाध्यक्ष डॉ पंकज श्रीवास्तव व पर्यावरणविद ओम प्रकाश सक्सेना ने बताया कि पर्यावरण जल संरक्षण व नशा उन्मूलन विषयक जन जागरण अभियान अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव रखा है। पदाधिकारियों ने बताया कि यात्रा गोरखपुर परिक्षेत्र नेपाल से भारतीय परिक्षेत्र में आवक स्थल से होकर सीमावर्ती वन्य क्षेत्र से सटे इलाकों जनपद सिद्घार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर , श्रावस्ती, बहराइच(सरयू नदी उद्भव परिक्षेत्र)तराई क्षेत्र से होते हुए लखीमपुर (शारदा नदी परिक्षेत्र)से पीलीभीत गोमती नदी उदगम स्थल माधव टांडा (रुहेलखंड परिक्षेत्र) तक बनाई गई है।
यात्रा आयोजकों ने बताया कि प्रस्तावित यात्रा में गायत्री परिजन, राम कृष्ण मिशन, बाबा जयगुरुदेव परिवार, आर्य समाज, शिक्षक व शिक्षण परिवार, पर्यावरणविदो के अलावा अन्य सामाजिक व धार्मिक तथा शैक्षणिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों से भी सघन सम्पर्क वार्ता की जा रही है आयोजक मंडल से जुड़े पदाधिकारीयों ने बताया कि प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य सीमावर्ती इलाको में अवैध नशा क्रय-विक्रय उपभोग व उत्पादन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु स्थानीय जन सहयोग तथा पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए जगह जगह पंचवटी व हरिशंकरी व फलदार वृक्षों के रोपण तथा स्थानीय जन सहयोग से रोपित वृक्षों का संरक्षण व वन्य जीव जंतु के संरक्षण हेतु सीमावर्ती इलाको के लोगों को सहयोग व संवाद के आधार पर लोगो को जागरूक करना है।
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