लान्जीबेरना में फ्लाई-ऐश से लदी गाड़ी जब्त, ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपा; थाने में शिकायत दर्ज

राजगांगपुर (सुंदरगढ़)
सुंदरगढ़ और झारसुगुड़ा सहित आसपास के जिलों में कारखानों का कचरा, रसायन युक्त पानी, धुआं और दुर्गंधयुक्त दूषित हवा लोगों के जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है। इस बीच विभिन्न कारखानों के पावर प्लांट से प्रतिदिन हजारों डंपर और 14 से 18 पहियों वाले ट्रकों में भरकर निकलने वाली फ्लाई-ऐश (राख) को अवैध रूप से कहीं भी फेंका जा रहा है। ऐसा ही एक मामला लान्जीबेरना गांव में सामने आया है, जहां गांव से सटी जमीन पर राख डाल रही एक गाड़ी को ग्रामीणों ने रोक लिया।
खेती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 30 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कारखानों से निकलने वाली फ्लाई-ऐश और औद्योगिक कचरे को कृषि भूमि, जंगल और राज्य राजमार्गों के किनारे डालकर उपजाऊ व संरक्षित जमीन को नष्ट किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले पर सरकार और प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं।
'ओडिशा स्टील एंड आयरन' की गाड़ी पकड़ी गई
मिली जानकारी के अनुसार, दिनदहाड़े लान्जीबेरना गांव से सटी जमीन पर "ओडिशा स्टील एंड आयरन" कारखाने की फ्लाई-ऐश से लदी एक गाड़ी अवैध रूप से राख खाली कर रही थी। ग्रामीणों ने वाहन को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इसके साथ ही लान्जीबेरना थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा फ्लाई-ऐश परिवहन करने वाले वाहनों में जीपीएस (GPS) प्रणाली लगाना अनिवार्य किया गया है, फिर भी प्रशासन जल, जंगल, जमीन और वायुमंडल को दूषित करने वाले तत्वों को रोकने में विफल साबित हो रहा है। इससे जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या शासन-प्रशासन उद्योगपतियों और ट्रांसपोर्टरों को परोक्ष रूप से संरक्षण दे रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि यह न केवल किसान विरोधी नीति है, बल्कि प्रशासन और पूंजीपतियों की मिलीभगत के कारण पर्यावरण नष्ट हो रहा है और लोगों में बीमारियां फैल रही हैं।
पुलिस प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाता है।
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